गुरुवार को बीएसई का मेटल सूचकांक 4.4 प्रतिशत चढ़ गया और इस तरह से इस महीने अब तक इसमें 11.5 प्रतिशत की तेजी आ चुकी है। इस्पात कंपनियों के शेयर इस्पात कीमतों में भारी तेजी की वजह से हाल के महीनों में मजबूत हुए हैं। एशियाई फ्लैट हॉट रोल्ड कॉइल (एचआरसी) की कीमतें 20 प्रतिशत से ज्यादा चढ़ी हैं, जबकि यूरोप में मौजूदा कैलेंडर वर्ष में इनमें 40 प्रतिशत तक का इजाफा हुआ है।
धातु कंपनी शेयरों में इस साल 41 प्रतिशत की तेजी आई है। तुलनात्मक तौर पर सेंसेक्स महज 4 प्रतिशत तक चढ़ा है।
बीएसई मेटल सूचकांक मार्च में काफी हद तक सपाट बना रहा क्योंकि इस्पात कीमतें चीनी नव वर्ष के आसपास नरम बनी रहीं। हालांकि कीमतें फिर से चढ़ी हैं और निवेशकों ने धातु कंपनियों के शेयरों में दिलचस्पी बढ़ानी शुरू कर दी है।
जेफरीज ने इस सप्ताह के शुरू में जारी एक रिपोर्ट में कहा, ‘एशियाई इस्पात कीमतों में चीन में तेजी के बाद न सिर्फ भारतीय कीमतों की अल्पावधि निरंतरता को लेकर चिंताएं दूर हुई हैं बल्कि अब इनमें तेजी की गुंजाइश भी बढ़ी है। हमने टाटा स्टील और जेएसडब्लयू स्टील के लिए वित्त वर्ष 2022-23 का एबिटा 2-7 प्रतिशत तक बढ़ा दिया है। यदि भारतीय/यूरोपीय हाजिर इस्पात कीमतें बनी रहती हैं तो हम वर्ष में टाटा/जेएसटीएल के लिए वित्त वर्ष 2022 एबिटा के लिए 66 प्रतिशत/30 प्रतिशत, 28 प्रतिशत/6 प्रतिशत का मुक्त नकदी प्रवाह प्रतिफल दर्ज कर सकते हैं।’
जेएसडब्ल्यू स्टील का शेयर 9.25 प्रतिशत बढ़कर 615 के सर्वाधिक ऊंचे स्तर पर बंद हुआ। वहीं जिंदल स्टील और सरकार के स्वामित्व वाली सेल के शेयर में 6-6 प्रतिशत की तेजी आई।
टाटा स्टील का शेयर 4.9 प्रतिशत चढ़कर 918 रुपये की नई ऊंचाई पर पहुंच गया और उसने 2008 के पिछले सभी सर्वाधिक ऊंचे स्तरों को तोड़ दिया। कंपनी का बाजार पूंजीकरण भी तेजी से चढ़ा है।
घरेलू ब्रोकरेज फर्म सेंट्रम ने एक रिपोर्ट में लिखा है, ‘हमारा मानना है कि धातु शेयरों में वित्त वर्ष 2021 में सेंसेक्स के मुकाबले तेज प्रदर्शन के बावजूद अच्छी बढ़त की गुंजाइश दिख रहा है।’
रिपोर्ट में कहा गया है, ‘कोविड-19 महामारी के बाद पूरी अर्थव्यवस्था में मांग सुधरी है और निर्माण पीएमआई से इसका संकेत मिला है। इसके अलावा निर्यात नियंत्रित करने के प्रयास में एचआरसी पर निर्यात छूट 13 प्रतिशत से घटने जैसे कदम भी सकारात्मक हैं।’
विश्लेषकों का कहना है कि इस्पात शेयरों में मजबूत दिलचस्पी से कंपनियों को अपना कर्ज घटाने में मदद मिलेगी और इससे दबाव की स्थिति पैदा होने पर राहत मिल सकेगी।
दिलचस्प बात यह है कि बीएसई मेटल सूचकांक अभी भी दिसंबर 2007 के 20,000 के अपने रिकॉर्ड ऊंचे स्तरों से नीचे बना हुआ है।