तेजी से बढ़ रहे ग्लूकागॉन-लाइक पेप्टाइड (जीएलपी-1) बाजार में अपनी पैठ बढ़ाने के उद्देश्य से डेनमार्क की दवा कंपनी नोवो नॉर्डिस्क ने भारत में अपनी सेमाग्लूटाइड आधारित मधुमेह की दवा ओजेम्पिक को उतारा है। इसकी शुरुआती 0.25 मिलीग्राम (एमजी) खुराक की कीमत 2,200 रुपये प्रति सप्ताह रखी गई है। अगले साल मार्च में सेमाग्लूटाइड की पेटेंट अवधि खत्म होने से कुछ महीने पहले यह पहल की गई है।
कंपनी सस्ती दवा लाने पर जोर ऐसे समय में दे रही है जब उसकी प्रतिस्पर्धी इलाई लिली की मौनजारो मधुमेह एवं मोटापे के बाजार पर हावी है। पिछले तीन महीनों के दौरान मौनजारो भारत में सबसे अधिक बिकने वाली दवा बन गई है।
सप्ताह में एक खुराक वाली इंजेक्शन से ली जाने वाली जीएलपी-1 एगोनिस्ट दवा ओजेम्पिक का उपयोग टाइप-2 डायबिटीज के इलाज के लिए किया जाता है। मोटापे या वजन प्रबंधन संबंधी अन्य समस्या वाले मरीजों को हुए लाभ के कारण ओजेम्पिक की मांग जबरदस्त है। यह दवा 0.25 एमजी, 0.5 एमजी और 1 एमजी की तीन खुराक में उपलब्ध होगी।
प्री-फिल्ड पेन में शुरुआत के लिए 0.25 एमजी इंजेक्शन की चार खुराकें होती हैं। इसकी कीमत 8,800 रुपये प्रति माह (2,200 रुपये प्रति सप्ताह) रखी गई है। इसी प्रकार 0.5 एमजी प्रति माह की कीमत 10,170 रुपये (2,542.5 रुपये प्रति सप्ताह) और 1 एमजी की कीमत 11,175 रुपये (2,793.75 रुपये प्रति सप्ताह) है।
नोवो नॉर्डिस्क इंडिया के प्रबंध निदेशक विक्रांत श्रोत्रिय ने कहा कि ओजेम्पिक अब भारत में इंसुलिन मूल्य दायरे में उपलब्ध होगी। श्रोत्रिय ने बिज़नेस स्टैंडर्ड से खास बातचीत में कहा, ‘भारत में किसी नवाचार को उतारना केवल लॉन्च ही नहीं बल्कि पहुंच भी है ताकि लोग इसे आसानी से खरीद सकें।’
इस साल मार्च में उतारी गई मौनजारो ने सात महीने के दौरान 496 करोड़ रुपये की कमाई कर ली है। इसका मुकाबला करने के लिए नोवो ने जून 2025 में केवल मोटापे की दवा वेगोवी को उतारा था। मगर उसकी बिक्री रफ्तार सुस्त रही। नवंबर तक इससे महज 50 करोड़ रुपये की आय हो पाई। बाद में नोवो ने उसकी सभी खुराकों की कीमतों में 30 से 35 फीसदी की कटौती की घोषणा की।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगले साल सेमाग्लूटाइड की पेटेंट अवधि खत्म होने से भारतीय दवा निर्माताओं की ओर से इसकी जेनेरिक दवाओं की बाढ़ आ सकती है। ऐसे में इसकी कीमत करीब 80 फीसदी तक कम हो सकती है। डॉ रेड्डीज, सिप्ला, मैनकाइंड और सन फार्मा जैसी कंपनियां पहले से ही भारत के 1,109 करोड़ रुपये के एंटी-ओबिसिटी बाजार में अपनी पैठ बढ़ाने की कोशिश कर रही हैं। इसमें केवल सेमाग्लूटाइड का अनुमानित योगदान 427 करोड़ रुपये का है।
फार्मारैक के उपाध्यक्ष (वाणिज्यिक) शीतल सपल ने कहा, ‘पाइपलाइन में 14 से अधिक मोटापारोधी दवाएं हैं।’ मगर डॉक्टरों का कहना है कि ओजेम्पिक को केवल टाइप 2 डायबिटीज के इलाज के लिए मंजूरी दी गई है। इसलिए केवल मधुमेह से पीड़ित मरीजों को ही यह दवा लिखने की अनुमति है।