Budget Session 2026: संसद का बजट सेशन बुधवार (28 जनवरी) को राष्ट्रपति द्रौपती मुर्मू के अभिभाषण के साथ शुरू हो गया। उपराष्ट्रपति सी. पी. राधाकृष्णन, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू का संसद परिसर में स्वागत किया गया। इस दौरान सरकार के सांस्कृतिक प्रतीक के रूप में अपनाए गए ‘सेंगोल’ को लेकर एक अधिकारी भी मौजूद रहे।
संसद के संयुक्त सत्र को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि सरकार देश में सामाजिक न्याय के लिए प्रतिबद्ध है। राष्ट्रपति ने कहा कि देश के लगभग 95 करोड़ नागरिकों को अब सामाजिक सुरक्षा लाभ प्राप्त हो रहे हैं। सरकार भ्रष्टाचार और घोटालों से निपटने और पब्लिक फंड के सही इस्तेमाल को सुनिश्चित करने में सफल रही है।
बजट सत्र की शुरुआत में अपने संबोधन में राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने कहा कि देश में इस समय 150 वंदे भारत ट्रेनें दौड़ हो रही हैं। उन्होंने कहा कि भारत अपना खुद का स्पेस स्टेशन स्थापित करने की दिशा में तेजी से आगे बढ़ रहा है।
राष्ट्रपति मुर्मू ने यह बात संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सेशन को संबोधित करते हुए कहा कि यूरोपीय संघ (EU) के साथ मुक्त व्यापार समझौता (FTA) सेवा और विनिर्माण क्षेत्रों को गति देगा। इससे युवाओं के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा होंगे। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार ‘सुधार एक्सप्रेस’ के पथ पर अग्रसर है। भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पुराने नियमों में बदलाव किया जा रहा है।
राष्ट्रपति ने संसद के दोनों सदनों के संयुक्त सत्र को संबोधित किया। इसके साथ ही बजट सत्र की औपचारिक शुरुआत हुई। राष्ट्रीय राजधानी में धुंध भरी सुबह के बीच राष्ट्रपति संसद पहुंचीं। वह छह घोड़ों से खींची जाने वाली पारंपरिक शाही बग्घी में सवार थीं। घुड़सवार राष्ट्रपति अंगरक्षक दल ने उन्हें एस्कॉर्ट किया।
राष्ट्रपति अभिभाषण के दौरान संसद की संयुक्त बैठक में उप राष्ट्रपति सी पी राधाकृष्णन, लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला, प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, गृह मंत्री अमित शाह, लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी, राज्यसभा में नेता प्रतिपक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, जे पी नड्डा, निर्मला सीतारमण, किरेन रिजिजू समेत विभिन्न केंद्रीय मंत्री, सपा प्रमुख अखिलेश, तृणमूल नेता महुआ मोइत्रा सहित विपक्षी दलों के कई नेता तथा सत्ता पक्ष एवं विपक्ष के विभिन्न सांसद मौजूद थे।
लोकसभा कक्ष में अपने लगभग एक घंटे के अभिभाषण में मुर्मू ने यह भी कहा कि सरकार की नीतियों के अनुरूप सुरक्षाबलों ने माओवादी आतंक पर भी निर्णायक कार्रवाई की है और माओवादी आतंक की चुनौती 126 जिलों से घटकर आठ जिलों तक सिमट गई है, जिनमें भी 3 जिले ही ऐसे हैं, जो गंभीर रूप से प्रभावित हैं।
उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार सच्चे सामाजिक न्याय के लिए समर्पित है तथा ‘सबका साथ, सबका विकास’ का दृष्टिकोण हर नागरिक के जीवन में बदलाव ला रहा है। उन्होंने कहा कि पारदर्शिता और ईमानदारी व्यवस्थाओं को मजबूत बना रही है तथा पौने सात लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष लाभ अंतरण (डीबीटी) के माध्यम से लोगों तक पहुंचाये गये हैं।
मुर्मू ने कहा, ”पिछले 10-11 वर्षों में भारत ने हर क्षेत्र में अपनी नींव मजबूत की है। यह वर्ष 2047 तक विकसित भारत बनाने के लक्ष्य का मजबूत आधार है।” उन्होंने कहा कि सरकार के तीसरे कार्यकाल में गरीबों को सशक्त बनाने का अभियान तेज हुआ है। राष्ट्रपति ने इस बात पर जोर दिया कि सरकार सच्चे सामाजिक न्याय के लिए समर्पित है और इसी का नतीजा है कि एक दशक में 25 करोड़ लोगों को गरीबी से बाहर निकाला गया है।