प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
भारत का डायग्नॉस्टिक्स उद्योग क्षमता वृद्धि और भौगोलिक विस्तार में इजाफा कर रहा है। बड़ी डायग्नोस्टिक श्रृंखलाएं और क्षेत्रीय कंपनियां रोकथाम, उन्नत और सटीक परीक्षणों की बढ़ती मांग को पूरा करने के लिए नई प्रयोगशालाओं, एकीकृत केंद्रों और नमूना संग्रह नेटवर्क में निवेश कर रही हैं।
डॉ. लाल पैथलैब्स (डीएलपीएल) देश की सबसे बड़ी डायग्नोस्टिक्स सेवा प्रदाताओं में से एक है और वर्तमान में पूरे भारत में वह लगभग 300 परीक्षण प्रयोगशालाओं और 6,500 से अधिक ब्रांडेड नमूना संग्रह केंद्रों का संचालन करती है। कंपनी वित्त वर्ष आधारित विस्तार रणनीति का अनुपालन करती है और व्यापक पहुंच और विस्तार को प्राथमिकता देती है।
वित्त वर्ष 2025 में डॉ. लाल पैथलैब्स ने 18 नई प्रयोगशालाएं और लगभग 900 नमूना संग्रह केंद्र स्थापित किए। कंपनी की योजना अगले कैलेंडर वर्ष में 15-20 और परीक्षण प्रयोगशालाएं स्थापित करने और 700-800 संग्रह केंद्र जोड़ने की है। अधिकांश नई प्रयोगशालाएं उन क्षेत्रों में शुरू की जाएंगी, जहां सेवाएं कम हैं और पहुंच सीमित है जबकि संग्रह केंद्र उन शहरों में खोले जाएंगे, जहां कंपनी पहले से ही कार्यरत है। ये केंद्र नए स्थानों पर भी स्थापित किए जाएंगे ताकि बाजार में उपस्थिति मज़बूत की जा सके और अंतिम ग्राहक तक पहुंच बेहतर बन सके।
डॉ. लाल पैथलैब्स के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) शंख बनर्जी ने कहा, योजनाबद्ध विस्तार के साथ-साथ हमारा सोवाका केंद्र जनवरी की शुरुआत में लॉन्च किया जाएगा। यह केंद्र डॉक्टरों द्वारा तैयार निवारक स्वास्थ्य कार्यक्रम मुहैया कराएगा, जिसमें व्यापक निदान और व्यक्तिगत मार्गदर्शन को शामिल किया जाएगा।
इस बीच, एगिलस डायग्नोस्टिक्स ने कहा कि उसकी विस्तार रणनीति भौतिक उपस्थिति में तीव्र वृद्धि के बजाय विशेषीकृत और जीनोमिक्स-आधारित परीक्षणों की बढ़ती मांग से अधिक प्रभावित हो रही है। कंपनी को उम्मीद है कि ऑन्कोलॉजी, आनुवंशिक विकार, प्रत्यारोपण प्रतिरक्षा विज्ञान और उन्नत आणविक निदान के क्षेत्र में अपने परीक्षण पोर्टफोलियो का विस्तार करने से जीनोमिक्स और सटीक निदान की हिस्सेदारी में लगातार वृद्धि होगी। नेटवर्क के मोर्चे पर, एजिलस दिल्ली एनसीआर और मुंबई जैसे घनी आबादी वाले शहरी बाजारों में अपनी उपस्थिति बढ़ाने की योजना बना रही है। साथ ही क्षेत्रीय और राष्ट्रीय संदर्भ प्रयोगशालाओं द्वारा समर्थित हब-ऐंड-स्पोक मॉडल के माध्यम से मझोले औऱ छोटे शहरों में भी विस्तार कर रही है।
कंपनी वर्तमान में भारत में 400 से अधिक प्रयोगशालाओं का परिचालन करती है। इन्हें 4,000 से अधिक ग्राहक संपर्क केंद्रों का समर्थन है। अगले साल कंपनी लगभग 10 से 15 नई प्रयोगशालाएं और लगभग 700 नमूना संग्रह केंद्र शुरू करने की योजना बना रही है। कंपनी ने बताया कि चूंकि यह विस्तार मांग पर आधारित है, इसलिए प्रयोगशालाओं को बंद करने या उनका युक्तिकरण करने के संबंध में अभी स्पष्टता सीमित है और जनवरी के अंत तक इस बारे में और स्पष्टता की उम्मीद है।
मध्यम आकार की और क्षेत्रीय डायग्नोस्टिक कंपनियां भी निवेश बढ़ा रही हैं। उनका ध्यान एकीकृत निदान पर ज्यादा केंद्रित है। दिल्ली एनसीआर की महाजन इमेजिंग ऐंड लैब्स वर्तमान में दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद और जयपुर में 15 एकीकृत निदान केंद्र और प्रयोगशालाएं संचालित करती है। वह भी वित्त वर्ष 2026 के दौरान कई नए केंद्र खोलने की योजना बना रही है। इस विस्तार में नोएडा में एक उच्च स्तर का एकीकृत निदान और रेडियोलॉजी केंद्र और दिल्ली के पूसा रोड पर एक न्यूक्लियर मेडिसिन और पीईटी-सीटी सुविधा शामिल है, जो वित्त वर्ष 2026 की चौथी तिमाही में चालू होने वाली हैं।
मुख्य परिचालन अधिकारी कबीर महाजन ने कहा, वित्त वर्ष 2026 में हमारा विस्तार उच्च स्तरीय एकीकृत निदान केंद्रों के निर्माण पर केंद्रित होगा जो रेडियोलॉजी, प्रयोगशाला चिकित्सा, जीनोमिक्स और परमाणु चिकित्सा को एक ही छत के नीचे लाते हैं, जिससे व्यापक और त्वरित निदान संबंधी जानकारियों के लिए बढ़ती प्राथमिकता का पता चलता है।
उद्योग जगत के अधिकारियों का मानना है कि यह विस्तार भारत के निदान बाजार में संरचनात्मक बदलावों को दर्शाता है।