भारतीय वायु सेना के प्रमुख एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा है कि भारत के लिए अगली पीढ़ी की हवाई ताकत प्रणालियों एवं हथियारों के विकास के लिए एक विश्वसनीय देश के साथ रणनीतिक साझेदारी करने का यह माकूल समय है। सिंह ने बुधवार को कहा कि भविष्य में सहयोग के लिए उन्नत सैन्य विमान इंजन को लेकर फ्रांस के साथ साझेदारी का निर्णय इस दिशा में एक बुनियाद के रूप में काम कर सकता है।
उन्होंने कहा कि दुनिया में मची उथल-पुथल के बीच एक मजबूत सैन्य शक्ति, विशेष रूप से वायु की ताकत को बढ़ाना जरूरी हो गया है। सिंह ने कहा कि भारत के पास जरूरी इच्छाशक्ति और मानव पूंजी है मगर लेकिन इसे कुछ हद तक तकनीक से जुड़ी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। आईएएफ प्रमुख राष्ट्रीय ने राजधानी में सेंटर फॉर एयरोस्पेस पावर ऐंड स्ट्रैटजिक स्टडीज द्वारा ‘नैशनल सिक्योरिटी इम्पेरेटिव्स’ विषय पर आयोजित 22वें सुब्रत मुखर्जी सेमिनार में ये बातें कहीं।
उन्होंने यह आश्वासन जरूर दिया कि तकनीकी कमी समय के साथ दूर की जा सकती है। मगर सिंह ने इस बात पर जोर दिया कि आईएएफ की जरूरतों एवं इन्हें पूरा करने में लगने वाले समय भारत के पड़ोस में हो रही गतिविधियों से भी निर्धारित की जा सकती है। उन्होंने कहा कि सशस्त्र बलों और देश को विपरीत परिस्थितियों के लिए तैयार रहना चाहिए।
उन्होंने कहा, ‘मौजूदा अनुसंधान एवं विकास प्रयासों का समर्थन जारी रहना चाहिए और हमें अन्य ‘मेक इन इंडिया कार्यक्रमों’ में निवेश करने के लिए त्वरित निर्णय लेने की आवश्यकता है ताकि हमें प्रौद्योगिकी मिले और निकट भविष्य में आवश्यक उत्पाद, हथियार और प्लेटफॉर्म उपलब्ध हो पाएं। हमें तकनीक के साथ तालमेल बैठाने की जरूरत है।’
आईएएफ प्रमुख ने इस बात का भी जिक्र किया कि इस तरह के कार्यक्रम भारत को अगली पीढ़ी की हवाई शक्ति प्रौद्योगिकियों में अंतर पाटने में किस तरह मदद कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि हालांकि, देश अपने दम पर सफल हो सकता है मगर इसमें समय अधिक लग जाएगा। उन्होंने कहा कि वैश्विक रुझानों के अनुरूप भारत को इसलिए प्रक्रिया तेज करने के लिए किसी अन्य देश के साथ साझेदारी करने की जरूरत है।
सिंह ने कहा,‘हम सभी रणनीतिक साझेदारियों में हैं। अगली पीढ़ी के प्लेटफार्म एवं हथियारों के विकास के लिए रणनीतिक साझेदारी में प्रवेश करने का यह समय बिल्कुल सही है। यह उसी तर्ज पर किया जा सकता है जैसे हमने भविष्य के लड़ाकू विमानों के लिए इंजन के लिए किया है।’
सितंबर 2025 में अंतिम दो मिग-21 बाइसन स्क्वाड्रनों की सेवाएं समाप्त होने के बाद आईएएफ की युद्धक क्षमता घट कर 29 सक्रिय लड़ाकू स्क्वाड्रनों तक रह गई है जो पिछले 60 वर्षों में सबसे कम है। भारत के पास कम से कम 42 स्क्वाड्रन होना अनिवार्य बताया गया है। इससे वायु सेना को अपनी ताकत बढ़ाने के लिए विकल्पों की तलाश करने के लिए विवश होना पड़ा है। यह जरूरत इसलिए भी आन पड़ी है क्योंकि वायु सेना को अब तक एक भी तेजस मार्क-1ए विमान नहीं मिला है। ऐसे 180 विमान तैयार करने का ठेका सार्वजनिक क्षेत्र की प्रमुख कंपनी हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड को दिया गया है।
हालांकि, रक्षा खरीद बोर्ड ने पिछले सप्ताह फ्रांस की कंपनी दसॉ एविएशन से 114 राफेल लड़ाकू विमानों के खरीद प्रस्ताव पर अपनी सहमति दे दी है। इससे वायु सेना पर दबाव कुछ कम हो सकता है। प्रस्ताव पर अब रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता वाली रक्षा खरीद परिषद द्वारा विचार किया जाएगा जिसके बाद इसे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली सुरक्षा पर मंत्रिमंडलीय समिति द्वारा अंतिम मंजूरी मिल जाएगी। रक्षा सूत्रों के अनुसार जेट विमान ‘मेक इन इंडिया’ ढांचे के तहत खरीदा जाएगा जिसमें दसॉ एविएशन एक भारतीय कंपनी के साथ साझेदारी करेगी।