facebookmetapixel
Advertisement
चंद्रशेखरन के बाद टीसीएस के सामने नेतृत्व की नई चुनौती, टाटा समूह के साथ तालमेल पर भी नजरउदारीकरण के 35 साल: ‘एशिया के डेट्रॉइट’ से चेन्नई ने कैसे तय किया दुनिया के ऑटो हब तक का सफरअटकी चंद्रशेखरन के वारिस की तलाश, उत्तराधिकारी चुनने वाली चयन समिति गठित करने में लगेगा वक्त; AGM पर भी संशयभारत के एयर मोबिलिटी बाजार में उतरने की तैयारी, 2029 से ईवीटीओएल उड़ाने की स्काईड्राइव की योजनाMMDR विधेयक पर कुछ राज्यों को एतराज, खनन मंत्री बोले- प्रमुख खनिजों तक सीमित रहेंगे प्रावधानएयरटेल के ग्राहकों को महंगे प्लान में शिफ्ट करने से Vi को मिल सकता है मौका, बढ़ेगी कमाईस्मॉलकैप-मिडकैप फंड्स में फिर बढ़ी निवेशकों की दिलचस्पी, हर 3 इक्विटी फोलियो में 1 इनकाआरबीआई के नए नियमों से कर्ज दरों में बदलाव होगा तेज, बैंकों के स्प्रेड पर भी पड़ेगा असरQ1 Results: ABREL का घाटा बढ़ा, IGL का मुनाफा 44% घटा; LG Electronics का लाभ 27% बढ़ाभारत को मैन्युफैक्चरिंग हब बनाने की तैयारी, नीति आयोग ने औद्योगिक पार्क और क्लस्टर का दिया सुझाव

व्हाट्सऐप की सुनवाई से हटीं न्यायमूर्ति सिंह

Advertisement
Last Updated- December 12, 2022 | 9:45 AM IST

दिल्ली उच्च न्यायालय की न्यायमूर्ति प्रतिभा सिंह ने आज उस याचिका की सुनवाई से खुद को दूर कर लिया, जिसमें दिग्गज मैसेजिंग कंपनी व्हाट्सऐप की निजता नीति में बदलाव को चुनौती दी गई है। न्यायमूर्ति सिंह ने एक संक्षिप्त सुनवाई में व्हाट्सऐप की तरफ से अदालत को भेजे गए एक ईमेल का जिक्र किया। उन्होंने ईमेल पर आपत्ति जताई और खुद को मामले से अलग कर लिया। विधि मंच बार ऐंड बेंच के मुताबिक यह माना जा रहा है कि ईमेल में कहा गया है कि न्यायमूर्ति सिंह जब वकील थीं, तब वह एक संबंधित मामले में पेश हुई थीं। बाद में व्हाट्सऐप ने बिना शर्त ईमेल वापस ले लिया, लेकिन न्यायमूर्ति सिंह ने मामले की सुनवाई नहींं करने का फैसला लिया।
बार ऐंड बेंच के मुताबिक न्यायमूर्ति सिंह ने कहा, ‘मैं इस मामले की सुनवाई नहीं करने जा रही हूं। मैं किसी भी स्थिति में सुनवाई नहीं करूंगी।’ अतिरिक्त सोलिसिटर जनरल चेतन शर्मा ने न्यायाधीश से आग्रह किया कि वे खुद को सुनवाई से अलग नहीं करें। उन्होंने कहा कि इस मामले की सुनवाई के लिए उनसे बेहतर कोई व्यक्ति नहीं हो सकता है और  यह कानून का बहुत महत्त्वपूर्ण सवाल है। लेकिन न्यायमूर्ति सिंह ने कहा कि वह
इसे दूसरे न्यायाधीश के पास भेज रही हैं।
व्हाट्सऐप की तरफ से पेश हुए वरिष्ठ अधिवक्ता मुकुल रोहतगी ने कहा कि इस मामले को किसी एकल न्यायाधीश के पीठ के समक्ष सूचीबद्ध किया जाए। न्यायामूर्ति सिंह ने आदेश दिया कि इस मामले को अन्य एकल न्यायाधीश के पीठ के पास भेजा जाए, लेकिन यह मुख्य न्यायाधीश के आदेश पर निर्भर करेगा। उन्होंने कहा कि यह मामला एक जनहित याचिका के रूप में माना जाए। अब इस मामले की सुनवाई दूसरा कोई पीठ सोमवार, 18 जनवरी, 2021 को करेगा।
वकील चैतन्य रोहिला की तरफ से दायर याचिका में दावा किया गया है कि व्हाट्सऐप की नई निजता नीति भारतीय संविधान के भाग तीन में दिए गए निजता के अधिकार का पूरी तरह से उल्लंघन करती है। टेक्नोलॉजी लॉ फर्म टेकलेजिस एडवोकेट्स ऐंड सॉलिसिटर्स के प्रबंध साझेदार सलमान वारिस ने कहा, ‘याची का मुख्य दावा यह है कि नई नीति में उपयोगकर्ता से फेसबुक के स्वामित्व वाले अन्य ऐप या तीसरे पक्ष के ऐप के साथ डेटा साझा नहीं करने का विकल्प छीन लिया गया है।’
याचिका में यह भी कहा गया है कि इस बारे में भी कोई स्पष्टता नहीं है कि किस हद तक डेटा साझा किया जाएगा। इससे ये सवाल पैदा होते हैं कि उपयोगकर्ताओं के संवेदनशील डेटा का क्या किया जाएगा। इसमें कहा गया है कि नए नियमों एवं शर्तों के तहत व्हाट्सऐप लेनदेन का डेटा, मोबाइल डिवाइस की सूचना, आईपी एड्रेस और अन्य डेटा साझा करेगी।  
वारिस ने कहा, ‘याची ने आरोप लगाया है कि व्हाट्सऐप ने भारत में सार्वजनिक कार्य करते हुए हमारे निजता के मौलिक अधिकार का मजाक बना दिया है। इसके अलावा उपयोगकर्ताओं की सूचनाओं को साझा करके, भेजकर और अन्य देशों में भंडारित कर राष्ट्रीय सुरक्षा को जोखिम में डाल रही है।’ उन्होंने कहा, ‘इस घोर उल्लंघन को रोकने के लिए याची ने आग्रह किया कि केंद्र सरकार को सूचना प्रौद्योगिकी अधिनियम के तहत अपनी शक्तियों के इस्तेमाल का निर्देश दिया जाए।’

Advertisement
First Published - January 15, 2021 | 10:46 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement