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‘दबाव में नहीं लाएंगे टीका’

Last Updated- December 15, 2022 | 3:37 AM IST

महामारी की वजह से कंपनियों पर दबाव पड़ रहा है कि वे जल्द से जल्द टीका तैयार करें लेकिन भारत बायोटेक इंटरनैशनल के चेयरमैन और प्रबंध निदेशक (एमडी) कृष्णा एला कहते हैं कि वे इस दबाव की वजह से जल्दबाजी नहीं कर सकते क्योंकि सुरक्षा और गुणवत्ता अहम है। उनका कहना था कि ऐसा टीका तैयार किए जाएगा जो सबके लिए किफायती भी होगा
हैदराबाद की इस दवा कंपनी ने कोविड-19 से जुड़े टीके का पहला क्लीनिकल परीक्षण पूरा कर लिया है। शनिवार को चेन्नई इंटरनैशनल सेंटर के सदस्यों के साथ बातचीत में एला ने कहा, ‘टीका लाने के लिए हम पर काफी दबाव है। लेकिन हमारे लिए सुरक्षा और गुणवत्ता अहम है। हम गलत टीका तैयार कर लोगों की जान के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहते।’
उन्होंने कहा, ‘हम सबसे अच्छी गुणवत्ता वाला क्लीनिकल शोध करना चाहते हैं। अंतरराष्ट्रीय एजेंसियों द्वारा हमारी निगरानी की गई है। यह देश के लिए और हमारे लिए एक प्रतिष्ठा की बात है। हम अपने शोध को लेकर कोई अदूरदर्शिता नहीं दिखाएंगे। हम बेहतरीन गुणवत्ता वाला टीका तैयार करेंगे।’ हालांकि उन्होंने टीका लाने का कोई समय बताने से इनकार कर दिया।
क्लीनिकल परीक्षण कितनी तेजी से किया जा सकता है यह समय-सीमा पर निर्भर करता है। मिसाल के तौर पर रोटावायरस का एक चरण पूरा करने में छह महीने लगते हैं। लेकिन कोवैक्सीन (भारत बायोटेक के कोविड-19 वैक्सीन) के पहले चरण  के लिए केवल 30 दिन का समय लगा और अब कंपनी ने परीक्षण के दूसरे चरण में प्रवेश किया है। एला का कहना है कि भारत का टीका उद्योग यूरोप और अमेरिका की बहुराष्ट्रीय कंपनियों से कम नहीं है और प्रौद्योगिकी तथा क्लीनिकल शोध के लिहाज से यह चीन की कंपनियों से आगे है। उन्होंने कहा कि जब रोटावायरस, पोलियो और अन्य बीमारियों का टीका बनाया गया तब भारत को लेकर संदेह दूर हुआ।

First Published - August 9, 2020 | 11:06 PM IST

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