वरिष्ठ नागरिकों को कोविड टीका लगाए जाने के मौजूदा चरण में टीकाकरण की रफ्तार तेज हो रही है। ऐसे में अस्पतालों और नगर निकायों का मानना है कि न केवल और अधिक टीकाकरण केंद्रों को मंजूरी देने बल्कि टीकाकरण केंद्रों को बड़े अस्पतालों से अलग करने की भी जरूरत है। उदाहरण के लिए मुंबई के नगर निकाय ने स्थानीय क्लबों, गैर-सरकारी संगठनों (एनजीओ) जैसी जगहों पर भी टीकाकरण शुरू करने की योजना बनाई है क्योंकि इसने अगले 30 दिन में 30 लाख लोगों के टीकाकरण का महत्त्वाकांक्षी लक्ष्य तय किया है। इस समय टीकाकरण केंद्रों को प्रशिक्षित कर्मचारी रखने की जरूरत होती है, जो एलर्जिक रिएक्शन होने की स्थिति में उसकी पहचान और उपचार करने में सक्षम हैं। महाराष्ट्र पहले ही 20 लाख से अधिक खुराक दे चुुका है और मुंबई में रोजाना करीब 42,000 लोगों का टीकाकरण हो रहा है।
हालांकि अस्पताल चौबीसों घंटे कोविड-19 टीकाकरण को मंजूरी दिए जाने के फैसले की प्रशंसा कर रहे हैं। लेकिन उनमें से ज्यादातर को नहीं लगता कि लोग आधी रात को टीका लगवाने के लिए आएंगे। एक निजी अस्पताल के मालिक ने कहा, ‘यह कोई आपात जरूरत नहीं है।’
अस्पतालों का मानना है कि सरकार को और टीकाकरण केंद्रों को मंजूरी देनी चाहिए और मौजूदा केंद्रों का बेहतर इस्तेमाल करना चाहिए। उजाला साइग्नस ग्रुप ऑफ हॉस्पिटल्स के संस्थापक निदेशक शुचिन बजाज ने कहा, ‘कोविड टीकाकरण के लिए सरकारी क्षमता के एक बड़े हिस्से का इस्तेमाल नहीं हो रहा है। निजी अस्पताल अपने टीकाकरण स्लॉट का बेहतर इस्तेमाल कर रहे हैं।’
टीकाकरण केंद्रों पर तैनात डॉक्टरों का कहना है कि बड़े अस्पतालों के बाहर बड़ी कतारें लग रही हैं, जबकि छोटे अस्पतालों में आधी क्षमता का ही इस्तेमाल नहीं हो रहा है। बजाज ने कहा, ‘अगर लोग सभी क्षेत्रों में स्थित टीकाकरण केंद्रों में जाएं और बड़े अस्पतालों में उमडऩा बंद कर दें तो क्षमता का उपयोग सुधरेगा।’
मुंबई के एक बड़े निजी अस्पताल हिंदुजा हॉस्पिटल्स ने कहा कि उन्होंने अभी तक एक भी खुराक बरबाद नहीं की है। हिंदुजा हॉस्पिटल्स के सीओओ जॉय चक्रवर्ती ने कहा, ‘हम एक साथ 10 लोगों (कोविशील्ड के पैक में 10 खुराक हैं) को खुराक दे रहे हैं ताकि कोई खुराक बरबाद न हो। अगर किसी दिन सत्र के अंत में कतार में केवल तीन लोग रहते हैं तो हम उन्हें अगले दिन आने के लिए कहते हैं।’
इसी तरह दक्षिण की एक अस्पताल शृंखला ने कहा कि वे खुराक बरबाद करने के बजाय अपने उन स्वास्थकर्मियों को दूसरी खुराक दे रहे हैं, जिन्हें पहली खुराक लगने के बाद एक महीना हो चुका है। इस शृंखला के प्रबंध निदेशक ने कहा, ‘हम सभी खुराकों का रिकॉर्ड रख रहे हैं ताकि किसी अनौपचारिक खुराक की कोई गुंजाइश न हो। आने वाले हर व्यक्ति का सबसे पहले को-विन में पंजीकरण किया जाता है और फिर उसे टीका लगाया जाता है।’
हालांकि सक्षम अधिकारी टीकाकरण को तेज करने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अनौपचारिक टीकाकरण को लेकर भी चिंताएं बनी हुई हैं। इस ओर इशारा अन्य किसी व्यक्ति ने नहीं बल्कि राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्राधिकरण के प्रमुख आर एस शर्मा ने किया था। निजी अस्पतालों का अब तक कुल टीकाकरण में करीब 28 फीसदी हिस्सा रहा है। ये अस्पताल यह सुनिश्चित करने को लेकर सजग है कि उन्हें आवंटित प्रत्येक खुराक का ब्योरा रखा जाए।
हाल में ऐसी शिकायतें आई थीं कि निजी अस्पताल को-विन प्लेटफॉर्म का दुरुपयोग कर रहे हैं। इस पर एक अस्पताल ने कहा कि ज्यादातर निजी अस्पतालों पर यह आरोप सही नहीं है। यह आरोप उन मामलों में सही हो सकता है, जहां टीकाकरण केंद्र पर भारी भीड़ उमड़ रही है। उन्होंने कहा, ‘भारतीय वीआईपी संस्कृति के लिए बदनाम हैं। यह हर जगह होता है और यह टीकाकरण में भी हो सकता है। वरिष्ठ अधिकारी, अमीर लोग आकर अपनी बारी आए बिना ही टीकाकरण के लिए कह सकते हैं।’ अस्पताल कोविन सॉफ्टवेयर को अद्यतन बनाने का भी इंतजार कर रहे हैं, जिससे लाभार्थी विशेष समय अवधि बुक कर सकेंगे। इससे टीकाकरण केंद्रों पर भीड़भाड़ को कम करने में मदद मिलेगी और टीकाकरण अभियान का बेहतर प्रबंधन संभव हो सकेगा।