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अब महंगाई का आकलन होगा एकदम सटीक, मोदी सरकार ने उठाया बोल्ड स्टेप

महंगाई आंकलन के लिए वर्ष 1942 में WPI गणना की Base Year 1939 के साथ हुई थी। 1942 से अब तक इसे 07 बार संशोधित किया जा चुका है। वर्तमान में 2011-12 आधार वर्ष है।

Last Updated- January 02, 2025 | 6:29 PM IST
The delicate balance between growth and inflation
प्रतीकात्मक तस्वीर

अब महंगाई को लेकर देश के लोगों को बिलकुल सटीक जानकारी मिलेगी। केंद्र सरकार ने महंगाई की गणना के मौजूदा तरीके में बदलाव करने का एलान किया है। अभी तक देश में महंगाई की गणना मनमोहन सिंह की सरकार के दौरान के साल 2011-12 के आधार पर की जाती है। एक दशक से ज्यादा समय हो जाने के चलते महंगाई का आंकलन सही-सही नहीं हो पा रहा था। इसी के चलते मौजूदा केंद्र सरकार ने मंहगाई की गणना के मौजूदा सिस्टम को अपडेट करने का फैसला किया है।

महंगाई के सही आंकलन के लिए क्या उठाया कदम

केंद्र सरकार ने बृहस्पतिवार को कहा कि थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index), WPI, की गणना के आधार वर्ष को संशोधित कर 2022-23 करने के लिए नीति आयोग के सदस्य रमेश चंद की अध्यक्षता में एक कार्यसमूह गठित किया गया है। मौजूदा समय में डब्ल्यूपीआई की गणना में वर्ष 2011-12 को आधार वर्ष (Base Year) माना जाता है। WPI की गणना में आधार वर्ष की तुलना में कीमतों में वृद्धि का आकलन किया जाता है। ऐसे में base year को संशोधित करने से देश में मूल्य स्थिति की अधिक सामयिक एवं यथार्थवादी तस्वीर सामने आने की संभावना होती है।

वाणिज्य मंत्रालय ने बयान में कहा कि कार्यसमूह (Working Group) economy में आए संरचनात्मक बदलावों को ध्यान में रखते हुए आधार वर्ष 2022-23 के साथ WPI और उत्पादक मूल्य सूचकांक (producer price Index), PPI, के जिंस समूह से संबंधित सुझाव देगा। इसके अलावा समूह उत्पादों के मूल्य संग्रह की मौजूदा प्रणाली की समीक्षा करेगा और सुधार के लिए जरूरी सुझाव देगा। समूह WPI/ PPI के लिए अपनाई जाने वाली गणना पद्धति पर भी निर्णय लेगा। समूह उत्पादक मूल्य सूचकांक के संकलन की पद्धति की भी जांच करेगा, संकलन एवं प्रस्तुति में जरूरी सुधारों के सुझाव देगा और WPI से PPI का रुख करने के लिए खाका भी पेश करेगा।

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क्यों जरुरी था आधार वर्ष में संशोधन

पहले आधार वर्ष को 2011-12 से संशोधित कर 2017-18 करने की योजना थी। लेकिन अब इसे 2022-23 करने के बारे में विचार किया जाएगा। उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) ने जून, 2021 में एक कार्यसमूह की तकनीकी रिपोर्ट का मसौदा जारी किया था। उस रिपोर्ट में आधार वर्ष (base year) को संशोधित करने और नई शृंखला में लगभग 480 नए उत्पादों को शामिल करने का सुझाव दिया गया था। फिलहाल थोक मूल्य सूचकांक (Wholesale Price Index) की गणना में कुल 697 उत्पादों को आधार बनाया जाता है जिनमें 117 प्राथमिक उत्पाद, 16 ईंधन एवं बिजली उत्पाद और 564 विनिर्मित उत्पाद शामिल हैं।

कीमतों में संशोधन पर नजर रखने के लिए दो प्रमुख सूचकांकों का उपयोग किया जाता है। इनमें थोक मूल्य सूचकांक (WPI) और उपभोक्ता मूल्य सूचकांक (CPI) शामिल हैं। जहां WPI थोक बाजारों में वस्तुओं की कीमतों में उतार-चढ़ाव को मापता है, वहीं CPI खुदरा स्तर पर उन वस्तुओं और कुछ सेवाओं की कीमतों पर नजर रखता है। वर्ष 1942 में WPI गणना की शुरुआत आधार वर्ष 1939 के साथ हुई थी। उसके बाद इसे समय-समय पर सात बार संशोधित किया जा चुका है। मौजूदा समय में 2011-12 को आधार वर्ष माना जाता है जिसकी शुरुआत मई, 2017 में हुई थी।

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महंगाई के सही आंकलन के लिए कौन-कौन से दिग्गज करेंगे brain storming

भारत सरकार ने थोक मूल्य सूचकांक (डब्‍ल्‍यूपीआई) की वर्तमान श्रृंखला के आधार संशोधन को आधार वर्ष 2011-12 से 2022-23 तक करने के लिए एक कार्य समूह गठित करने का निर्णय लिया है। कार्य समूह की संरचना इस प्रकार है-

1. प्रो. रमेश चंद, सदस्य, नीति आयोग अध्यक्ष
2. अतिरिक्त महानिदेशक, फील्ड ऑपरेशन्स डिवीजन, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय सदस्य
3. उप महानिदेशक, आर्थिक सांख्यिकी प्रभाग, सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय सदस्य
4. उप महानिदेशक, राष्ट्रीय लेखा प्रभाग,

सांख्यिकी एवं जन सम्पर्क मंत्रालय

सदस्य
5. उप महानिदेशक, उद्यम सर्वेक्षण प्रभाग,

सांख्यिकी एवं जन सम्पर्क मंत्रालय

सदस्य
6. आर्थिक सलाहकार, आर्थिक मामलों का विभाग सदस्य
7. सलाहकार, मूल्य एवं विपणन प्रभाग,

कृषि एवं किसान कल्याण विभाग

सदस्य
8. वरिष्ठ आर्थिक सलाहकार, उपभोक्ता मामले विभाग सदस्य
9. उप महानिदेशक, पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्रालय सदस्य
10. मुख्य कार्यकारी अधिकारी, वस्तु एवं सेवा कर नेटवर्क (GST Network) सदस्य
11। आरबीआई के प्रतिनिधि (RBI Representative) सदस्य
12. डॉ सौम्या कांति घोष, Chief Economist, SBI Group सदस्य
13. डॉ. सुरजीत भल्ला, अर्थशास्त्री (Economist) सदस्य

(गैर सरकारी)

14. डॉ. शमिका रवि, सदस्य, प्रधानमंत्री की आर्थिक सलाहकार परिषद (PM Ecomonic Advisory Council) सदस्य

(गैर सरकारी)

15. डॉ. धर्मकीर्ति जोशी, Chief Economist, CRISIL सदस्य

(गैर सरकारी)

16. नीलेश शाह, MD, कोटक महिंद्रा एसेट मैनेजमेंट (Kotak Mahindra Asset Management) सदस्य

(गैर सरकारी)

17. इंद्रनील सेनगुप्ता, सह-प्रमुख एवं अर्थशास्त्री,

बैंक ऑफ अमेरिका मेरिल लिंच (Bank of America Merril Lynch)

सदस्य

(गैर सरकारी)

18. उप महानिदेशक, डीपीआईआईटी (DPIIT)

(सदस्य सचिव)

सदस्य

इसके अलावा कार्य समूह के अध्यक्ष आवश्यकतानुसार अन्य एजेंसियों के विशेषज्ञों/प्रतिनिधियों को भी शामिल कर सकते हैं।

कार्य समूह को इस अधिसूचना के जारी होने के 18 महीने के भीतर अपनी अंतिम रिपोर्ट आर्थिक सलाहकार कार्यालय को प्रस्तुत करने के लिए कहा गया है।

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किन-किन बातों पर विचार करेगा Working Group

1. अर्थव्यवस्था में संरचनात्मक परिवर्तनों के संदर्भ में 2022-23 आधार वर्ष के साथ डब्‍ल्‍यूपीआई और पीपीआई की कमोडिटी बास्केट का सुझाव देना।

2. मूल्य संग्रह की मौजूदा प्रणाली की समीक्षा करना और सुधार के लिए बदलाव सुझाना।

3. डब्‍ल्‍यूपीआई/पीपीआई के लिए अपनाई जाने वाली गणना पद्धति पर निर्णय लेना।

4. मूल्य और जीवन-यापन लागत के सांख्यिकी पर तकनीकी सलाहकार समिति द्वारा अनुमोदित पीपीआई के संकलन के लिए पद्धति की जांच करना और संकलन और प्रस्तुति में सुधार का सुझाव देना तथा डब्‍ल्‍यूपीआई से पीपीआई पर स्विच करने के लिए रोडमैप की सिफारिश करना।

5. अब तक अपनाई गई लिंकिंग फैक्टर की गणना की विधि की जांच करना और यदि आवश्यक हो तो लिंकिंग फैक्टर की गणना की विधि में उचित बदलाव सुझाना।

6.डब्‍ल्‍यूपीआई/पीपीआई की विश्वसनीयता बढ़ाने के लिए आवश्यक किसी भी अन्य सुधार का सुझाव देना।

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First Published - January 2, 2025 | 5:00 PM IST

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