उद्योग जगत के प्रतिनिधियों ने कोविड-19 टीके के वितरण की सरकार की योजना का समर्थन करते हुए कोविड-19 टीके देने के लिए निजी क्षेत्र की भागीदारी बढ़ाने की जरूरत पर बल दिया है। उद्योग जगत के प्रतिनिधियों का कहना है कि टीके की खुराक को बरबाद होने से बचाने के लिए इसका उचित इस्तेमाल सुनिश्चित करने के साथ-साथ उचित निगरानी और संतुलन बरतते हुए समान और सुलभ तरीके से टीके केवितरण में तेजी लाने पर जोर दिया जाना चाहिए।
भारतीय उद्योग परिसंघ (सीआईआई) ने कहा है कि कारोबारी उद्यमियों को अपने कर्मचारियों और परिवार के सदस्यों को टीका लगाने की अनुमति दी जानी चाहिए और कॉरपोरेट सामाजिक उत्तरदायित्व (सीएसआर) कार्यक्रम के तहत उन्हें आसपास के लोगों को भी टीके लगाने में अपना सहयोग देना चाहिए।
सीआईआई ने एक प्रेस विज्ञप्ति में कहा, ‘इस तरह के कार्यक्रम के जरिये टीका मुहैया करा कर संगठित क्षेत्र और स्थानीय समुदाय के 10 करोड़ लोगों को फायदा मिल सकता। उद्योग सरकार द्वारा तय किए गए सभी दिशानिर्देशों का पालन पूरी तरह से करेगा।’ हालांकि सरकार ने भी कहा है कि वह टीकाकरण अभियान में निजी क्षेत्र की भागीदारी को बड़े पैमाने पर बढ़ाएगी लेकिन केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री हर्षवर्धन ने कहा कि टीके अभी तक बाजार में बिक्री के लिए तैयार नहीं किए गए हैं क्योंकि अभी इन्हें आपातकालीन इस्तेमाल की ही मंजूरी मिली हुई है।
सीआईआई के टीका कार्यबल के मनोनीत अध्यक्ष टीवी नरेंद्रन ने कहा कि निजी क्षेत्र आबादी के उन वर्गों तक पहुंच सकता है जो देश के आर्थिक पुनरुद्धार में अपना योगदान दे सकते हैं। उन्होंने कहा, ‘सीआईआई ने कोविड-19 टीकों के लिए एक उच्च स्तरीय कार्यबल का गठन किया है जिसका मकसद सदस्य कंपनियों के कर्मचारियों के लिए टीका वितरण और टीका लगाने की प्रक्रिया के लिए उद्योग का समर्थन बढ़ाना है। साथ ही एक बड़े तबके को भी टीका देने में ये सदस्य कंपनियां अपने सीएसआर के माध्यम से अहम भूमिका निभा सकती हैं।’
सीआईआई ने यह भी सुझाव दिया है कि उद्योग को टीका लगाने की अनुमति दी जाए और साथ ही उपलब्ध टीकों का इस्तेमाल करने के साथ-साथ सभी जरूरी मानदंडों और अनुपालनों का पालन करते हुए टीकाकरण की तादाद बढ़ाने में सरकार की मदद करने की अनुमति दी जाए। उन्होंने कहा, ‘इस कदम से सरकार को अपने प्राथमिकता वाले लक्षित समूहों तक जल्दी पहुंचने का मौका मिलेगा जो लोगों को अपने काम पर वापस लाने और अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने के लिए महत्त्वपूर्ण होगा।’
सीआईआई ने कहा है कि टीकाकरण की प्रक्रिया को निजी क्षेत्र के लिए खोलने का फायदा यह होगा कि जो लोग टीका लेने के इच्छुक हैं उन्हें एक्सपायरी अवधि के भीतर ही टीके दे दिए जाएंगे और टीके का पूरा इस्तेमाल भी हो जाएगा। सभी टीकों की अवधि निर्धारित होती है और इनमें से कई टीकों की संभावित एक्सपायरी अवधि भी राष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय है। सीआईआई ने अपने बयान में इस बात पर जोर डाला है कि 50 साल से अधिक उम्र के लोगों को टीका लगाने का दूसरा चरण विशेष रूप से चुनौतीपूर्ण काम होगा। इसके लिए टीका लगाने वाली जगहों को बढ़ाने के साथ ही टीका देने वालों की तादाद भी बढ़ानी होगी।
इस महीने की शुरुआत में स्वास्थ्य मंत्रालय ने कहा था कि टीकाकरण की इस प्रक्रिया में 5,912 सार्वजनिक अस्पताल और 1,239 निजी अस्पताल शामिल हैं।