आयकर विभाग ने करदाताओं को हजारों नोटिस जारी किए हैं, जो वित्त वर्ष 2014 से 2018 के बीच विदेशी परिसंपत्तियां उजागर नहीं करने की वजह से काला धन एवं बेनामी लेनदेन अधिनियम के तहत कार्रवाई करने के लिए भेजे गए हैं। ये नोटिस कर चोरी के मामले खोलने के लिए तय 30 अप्रैल की अंतिम तिथि से पहले जारी किए गए हैं। वर्ष 2021 के बजट में कर चोरी के मामलों को खोलने की अवधि छह साल से घटाकर तीन साल करने की घोषणा की गई है। हालांकि गंभीर कर धोखाधड़ी के मामले, जिनमें 50 लाख रुपये या उससे अधिक आय को छुपाया गया है, उनमें मामलों को खोलने की अवधि 10 साल ही रहेगी।
यह कदम संकेत देता है कि राजस्व विभाग इन अधिनियमों के तहत कार्रवाई को खुली रखने के बजाय कुछ सीमित अवधि में ही इस्तेमाल करने के बारे में विचार कर रहा है। इस समय इन दो अधिनियमों के तहत कार्रवाई के लिए समयसीमा की कोई पाबंदी नहीं है। हालांकि इन दो अधिनियमों में कोई बदलाव संसद के जरिये ही किए जा सकते हैं।
सूत्रों का कहना है कि केंद्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (सीबीडीटी) का सिस्टम महानिदेशालय आयकर अधिनियम की धारा 148 के तहत मामलों को फिर से खोलने तथा काला धन और बेनामी अधिनियम के तहत कार्रवाई के लिए आकलन वर्ष 2013-14 से 2017-18 की सूचनाएं बड़े पैमाने पर देश भर में कर अधिकारियों को भेज रहा है।
इस संबंध में सिस्टम महानिदेशालय द्वारा 1 अप्रैल को आंतरिक नोट प्रसारित किया गया। इसमें कहा गया है, ‘जोखिम आकलन के दौरान यह सामने आया कि बेनामी, विदेशी परिसंपत्ति आय की रिपोर्ट और सूचनाएं भी पाई गई हैं। बोर्ड (सीबीडीटी) ने निर्देश दिया है कि ऐसे मामलों को उचित कार्रवाई के लिए संबंधित कर अधिकारियों को भेजा जाए।’ वित्त मंत्रालय और सीबीडीटी को सोमवार को भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं मिला।