देश की विमानन कंपनियां यात्रियों के फर्जी कोविड-19 जांच रिपोर्ट दिखाकर यात्रा करने की समस्या से जूझ रही हैं और इसे लेकर घरेलू और विदेशी स्वास्थ्य प्राधिकरणों के निशाने पर हैं। इस वजह से भारत की विमानन कंपनियां केवल वही रिपोर्ट स्वीकार कर रही हैं, जिनमें क्यूआर कोड है। बड़ी तादाद में फर्जी कोविड नेगेटिव रिपोर्टों से वे विदेशी स्वास्थ्य प्राधिकरण और देश के कुछ राज्य सतर्क हो गए हैं, जो अपने यहां प्रवेश के लिए कोविड नेगेटिव रिपोर्ट मांगते हैं।
विमानन कंपनियों ने स्वास्थ्य प्राधिकरणों की चेतावनी और इस मुश्किल दौर में यात्रियों का भरोसा खोने के जोखिम को देखते हुए सरकार से संपर्क कर कोविड जांच रिपोर्टों को मानक बनाने का आग्रह किया है। बिज़नेस स्टैंडर्ड को जानकारी मिली है कि नागरिक उड्डयन मंत्रालय ने स्वास्थ्य मंत्रालय को पत्र लिखा है। इसमें कहा गया है कि केवल उन आरटी-पीसीआर रिपोर्टों को विमानन कंपनियां और हवाई अड्डे प्रामाणिक मानेंगे, जिनमें क्यूआर कोड होगा। यह क्यूआर कोड रिपोर्टों को उनकी मूल जांच रिपोर्ट से जोड़ेगा।
हालांकि विमानन कंपनियां आईसीएमआर से मान्यता प्राप्त 634 जांच प्रयोगशालाओं की जांच रिपोर्ट स्वीकार कर रही हैं। इन प्रयोगशालाओं में से ज्यादातर क्यूआर कोड के साथ आने वाला प्रमाणपत्र नहीं देती हैं, जिससे विमानन कंपनियों के लिए इनका सत्यापन करना मुश्किल हो जाता है। पिछले सप्ताह दिल्ली सरकार ने महाराष्ट्र से दिल्ली आने वाले हवाई यात्रियों की आरटी-पीसीआर नेगेटिव रिपोर्टों की जांच नहीं करने के लिए चार विमानन कंपनियों- इंडिगो, स्पाइसजेट, एयरएशिया इंडिया और विस्तारा के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की धमकी दी थी। अप्रैल की शुरुआत में नागरिक उड्डयन प्राधिकरणों ने भारत और यूएई के बीच उड़ानों वाली विमानन कंपनियों के साथ बातचीत की थी। इस बातचीत का विषय यह था कि देश में ऐसे बहुत से हवाई यात्री आ रहे हैं, जिनके पास नेगेटिव प्रमाणपत्र होने के बावजूद वे हवाई अड्डों पर उतरते समय संक्रमित पाए जा रहे हैं।
एक निजी विमानन कंपनी के कार्याधिकारी ने कहा, ‘प्राधिकरणों ने प्रमाणपत्रों की जांच का भार विमानन कंपनियों पर डाल दिया है। ठीक उसी तरह, जिस तरह विमानन कंपनियों को यात्रियों को उड़ान की मंजूरी देने से पहले उचित यात्रा वीजा की जांच करनी पड़ती है। किसी पीडीएफ को एडिट करना बहुत आसान है। ऐसी जरूरतों की तादाद काफी अधिक है, इसलिए बोर्डिंग कर्मचारियों के लिए इस चीज पर नजर रखना नामुमकिन है कि कौनसा प्रमाणपत्र असली है।’
यह समस्या उस समय उजागर हुई थी, जब हॉन्ग कॉन्ग जा रही विस्तारा की एक उड़ान में एक तिहाई याात्री संक्रमित पाए गए, जबकि उनके पास नेगेटिव होने की रिपोर्ट थीं। उसके बाद हॉन्ग कॉन्ग ने भारत की उड़ानें बंद कर दी थीं। अब लगभग सभी विमानन कंपनियां यात्रियों से कह रही हैं कि वे क्यूआर के साथ जांच रिपोर्ट लेकर आएं।