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रिक्तियां भरने के लिए ‘मिशन मोड’ में केंद्र

Last Updated- December 11, 2022 | 2:41 PM IST

केंद्र सरकार अपने विभागों और मंत्रालयों में रिक्तियां भरने के लिए अभियान में जुट गई है। सरकार का व्यय विभाग लंबित नियुक्तियां करने के लिए अपने संबद्ध पक्षों से बातचीत कर रहा है। 

अगले लोकसभा चुनाव से पहले, दिसंबर 2023 तक घोषित 10 लाख खाली पदों को भरने के लिए नियमित कार्यवाही की जा रही है। 

भले ही सरकारी विभागों में रिक्तियों को भरने के लिए कार्मिक और प्रशिक्षण मंत्रालय मुख्य मंत्रालय है, लेकिन व्यय स्थापना समन्वय विभाग (कार्मिक) भर्ती अभियान के लिए सहायता प्रदान कर रहा है। 

बिज़नेस स्टैंडर्ड को एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया,’व्यय विभाग के पास केंद्र सरकार में रिक्तियों और वेतन ग्रेड जिसपर भर्ती की जानी है उसका पूरा डेटाबेस है।’ विभाग यह डेटा कार्मिक विभाग के साथ साझा कर रहा है, जिसे नियमित रूप से अन्य विभागों के साथ उनकी भर्ती योजनाओं का पालन करने का काम सौंपा गया है। 1 मार्च, 2021 तक केंद्र और केंद्र शासित प्रदेशों में 41 लाख स्वीकृत पदों के मुकाबले 31 लाख लोगों को रोजगार दिया गया। सरकारी विभागों में रिक्त पदों की संख्या 9.9 लाख थी, जो सभी रैंकों में कुल स्वीकृत पदों के रिक्त पदों का 24 फीसदी है। 

सूत्रों ने बताया कि वित्त मंत्रालय सहित विभिन्न विभागों में ड्राइवरों, सफाईकर्मियों और चतुर्थ वर्गीय अन्य कर्मचारियों की भर्ती के लिए सर्कुलर पहले से ही निकलने शुरू हो गए हैं।

सामाजिक रूप से पिछड़े वर्गों के साथ अन्य सभी रिक्तियों को समय पर भरने के लिए केंद्र सार्वजनिक उपक्रमों पर भी जोर दे रहा है। मंत्रालय और सरकारी विभागों को भी कहा गया है कि अपने अधीन आने वाले पीएसयू को सीधे बहाली और प्रोन्नित करने के लिए जरूरी कदम उठाने का निर्देश दें। कार्मिक मंत्रालय ने भी केंद्र के स्वामित्व वाले पीएसयू में अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति और अन्य पिछड़ा वर्ग के लिए आरक्षित लंबित पड़ी नियुक्तियों को भरने के लिए निर्देश जारी किया है। सार्वजनिक उद्यम विभाग भी पीएसयू को समय पर नियुक्तियां पूरी करने का जोर दे रहा है।

इसे सुनिश्चित करने के लिए पिछले सप्ताह डीपीई के तहत केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के लिए एक मिशन भर्ती प्रकोष्ठ का गठन किया गया था। वित्त वर्ष 19 से पीएसयू में रोजगार लगातार घट रहा है। वित्त वर्ष 19 में पीएसयू ने 16.2 लाख लोगों को रोजगार दिया था। इसके अगले साल यह 9 फीसदी घटकर 14.8 लाख हो गया। वित्त वर्ष 21 में सार्वजनिक उपक्रम में 13.7 लाख लोगों को रोजगार मिला।पिछले सप्ताह, वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के मुखियों के साथ बैठक कर लंबित पड़ी नियुक्तियों और मासिक भर्ती योजना की समीक्षा की। 2012-13 के 886,490 सरकारी बैंक कर्मियों की संख्या 2020-21 में घटकर 770,800 हो गई है।

First Published - September 28, 2022 | 9:55 PM IST

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