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गलत सूचना वाले अधिकारियों पर होगी कार्रवाई : वित्त सचिव

Last Updated- December 11, 2022 | 7:12 PM IST

कल्याणकारी और सब्सिडी योजनाओं पर फिजूलखर्ची पर सख्त रुख अपनाते हुए वित्त सचिव टीवी सोमनाथन ने पिछले महीने राज्यों को लिखित चेतावनी दी थी कि अखिल भारतीय सेवाओं के अधिकारियों के खिलाफ कार्रवाई होगी, अगर वे केंद्र प्रायोजित योजनाओं के संबंध में वित्त मंत्रालय को गलत जानकारी देंगे।
सोमनाथन ने 21 अप्रैल को लिखे अपने पत्र में कहा, ‘यह संज्ञान में आया है कि और हाल के कुछ उदाहरण हैं कि केंद्र सरकार को उपलब्ध कराई जानकारी तथ्यात्मक रूप से गलत है, भले वे राज्य सरकारों के सक्षम अधिकारियों द्वारा प्रमाणित हैं। यह गलत जानकारी देने या घोर लापरवाही का संकेत है।’
सभी राज्यों व केंद्र शासित प्रदेशों को मुख्य सचिवों को पत्र भेजे गए थे और राज्य के वित्त सचिवों को इसके बारे में जानकारी दी गई थी। इसमें कहा गया है कि एक ऐसा मामला था, जहां एक सरकार के कार्यकाल के दौरान गलत जानकारी के कारण भारी भरकम उधारी ली गई औऱ अगली सरकार आने पर राशि में कटौती की गई।
सोमनाथन ने याद दिलाया है कि राज्यों के मुख्य सचिव अखिल भारतीय सेवा आचरण नियम 3 (2बी) औऱ 3 (3) के तहत आते हैं औऱ सरकारी अधिकारी तथ्यात्मक और उचित सलाह देने के लिए जिम्मेदार हैं और सही तरीके से सही जानकारी व सूचनाएं मुहैया कराने के लिए उनके प्रमाणित कागजात की जरूरत होती है।
पत्र में कहा गया है कि अगर सूचनाओं में कोई गड़बड़ी पाई जाती है तो अखिल भारतीय सेवा के अधिकारियों के नाम वित्त मंत्रालय के कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग के पास भेज दिए जाएंगे। लापरवाही या जानबूझकर गलत सूचना देने का मामला उनके सेवा रिकॉर्ड में दर्ज किया जाएगा और और उसका असर उनके सूचीकरण व प्रतिनियुक्ति पर पड़ेगा।
पत्र में कहा गया है, ‘मामले को राज्य सरकारों के समक्ष भी भेजा जा सकता है, जिससे वे अनुशासनात्मक कार्यवाही शुरू कर सकें। राज्यों में प्रतिनियुक्ति पर काम करने वाले केंद्रीय सेवाओं के अधिकारियों के मामले में मामले को उनके केंद्रीय कैडर का नियंत्रण करने वाले अधिकारियों के संज्ञान में मामले को लाया जाएगा, जिससे उनकी तरफ से उचित कार्रवाई की जा सके। इसमें राज्यों में प्रतिनियुक्ति से वापस बुलाना और/या अनुशासनात्मक कार्यवाही शामिल है।’ पत्र में कहा गया है कि छोटी त्रुटियों में इस तरह की कार्रवाई नहीं होगी।
सोमनाथन की ओर से पत्र ऐसे समय भेजा गया है जब वित्त मंत्रालय ने विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं व सब्सिडी योजनाओं में गड़बडिय़ां दूर करने को लेकर शासनादेश भेजा है। इसमें कहा गया है कि योजनाएं लागू करने वाली इकाइयां व मंत्रालय प्राथमिकता के आधार पर फिजूलखर्ची बंद करें। हालांकि केंद्र सरकार भूराजनीतिक स्थितियों के कारण बढ़ी हुई उर्वरक सब्सिडी औऱ  खाद्य सब्सिडी का बोझ उठाने को तैयार है।
खाद्य सब्सिडी के मोर्चे पर भारतीय खाद्य निगम औऱ खाद्य एवं सार्वजनिक वितरण विभाग से कहा गया है कि वे ऊपर और नीचे की मूल्य शृंखला की खामियां दूर करें।
इसी तरह से राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) और पीएम किसान जैसी प्रमुख योजनाओं के बारे में संबंधित मंत्रालयों से कहा गया है कि फर्जी लाभार्थियों और फर्जी खातों की पहचान में तेजी लाएं।  केंद्र के नीति निर्माता इस बात को लेकर खास चिंतित हैं कि मनरेगा लाभार्थियों की संख्या कोविड-19 महामारी के पहले करीब 5 करोड़ थी, जो अर्थव्यवस्था में गिरावट के बाद 7 करोड़ हो गई। लेकिन अब तक यह संख्या महामारी के पहले के स्तर पर नहीं पहुंची है।

First Published - May 6, 2022 | 11:53 PM IST

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