facebookmetapixel
Advertisement
देश में अंतरिक्ष सेवाओं के लिए एक महत्त्वपूर्ण मोड़, स्काईरूट एरोस्पेस की ऐतिहासिक उपलब्धिसोनम वांगचुक को निजी अस्पताल भेजने से हाईकोर्ट का इनकार, ‘चलो संसद’ मार्च से पहले दिल्ली में सुरक्षा कड़ीमॉनसून सत्र से पहले सर्वदलीय बैठक में विपक्ष का वॉकआउट! कई मुद्दों पर सरकार को घेरने की तैयारीकच्चे तेल की कीमतों में नरमी से सुधरेगा चालू खाता घाटा, अर्थशास्त्रियों ने FY27 का अनुमान घटाया₹35,000 करोड़ के कर्ज पर वोडाफोन आइडिया की उम्मीद कायम, प्रवर्तकों से अतिरिक्त भरोसे का इंतजारQ1 नतीजों की दमदार शुरुआत, कंपनियों की आय, मुनाफा दो अंक में बढ़ेमॉनसून सत्र में SMC विधेयक पर बाजार की नजर, दिग्गज निवेशकों के दांव से मिडकैप शेयरों में तेजीइक्विटी फंड्स में सकल निवेश ₹4 लाख करोड़ के पार, NFO कलेक्शन में बड़ी गिरावटरिलायंस के जून तिमाही के नतीजे उम्मीद से बेहतर, O2C और जियो कारोबार ने दिखाई दमदार बढ़तITR Filing 2026: जांचें, परखें और फिर चुनें अपने लिए सही आयकर रिटर्न फॉर्म

अमेरिकी रिपोर्ट का दावा: भारत ने अमेरिकी प्रोडक्ट्स पर हाई इंपोर्ट ड्यूटी और नॉन-टैरिफ बाधाएं बरकरार रखीं

Advertisement

यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप 2 अप्रैल से प्रस्तावित ‘रिसिप्रोकल टैरिफ’ पॉलिसी लागू करने की तैयारी में हैं।

Last Updated- April 01, 2025 | 1:39 PM IST
India-US Trade deal

अमेरिका ने एक नई रिपोर्ट में आरोप लगाया है कि भारत अमेरिकी सामानों- जैसे कृषि उत्पादों, दवा निर्माण (फॉर्मूलेशन) और मादक पेयों—पर ऊंचे टैरिफ लगाए हुए है। इसके अलावा, भारत द्वारा कई गैर-शुल्क बाधाएं (Non-Tariff Barriers) भी लागू की जा रही हैं, जिससे अमेरिकी निर्यात और निवेश प्रभावित हो रहे हैं। यह दावा अमेरिकी व्यापार प्रतिनिधि (USTR) की ओर से 31 मार्च को जारी 2025 नेशनल ट्रेड एस्टीमेट (NTE) रिपोर्ट में किया गया है। यह रिपोर्ट ऐसे समय में आई है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप 2 अप्रैल से प्रस्तावित ‘रिसिप्रोकल टैरिफ’ पॉलिसी लागू करने की तैयारी में हैं।

यह रिपोर्ट हर साल प्रकाशित होती है और उन देशों की प्रमुख नीतियों व प्रथाओं को सूचीबद्ध करती है जो अमेरिका के निर्यात, निवेश और डिजिटल व्यापार को प्रभावित करती हैं। रिपोर्ट में अमेरिका और भारत के बीच व्यापार और नियामकीय चुनौतियों को उजागर किया गया है जिनमें टैरिफ, नॉन-टैरिफ बाधाएं, बौद्धिक संपदा अधिकार, सेवाएं, डिजिटल व्यापार और पारदर्शिता से जुड़े मुद्दे शामिल हैं। ट्रेड एक्सपर्ट्स के अनुसार, इन मुद्दों में से अधिकांश पहले की रिपोर्ट्स में भी उठाए जा चुके हैं और इनमें से कुछ का समाधान भी हो चुका है।

Also read: भारत अमेरिकी कृषि उत्पादों पर लगाता है 100% टैरिफ, अब रिसिप्रोकल टैरिफ की बारी; रूसी तेल खरीदारों को भी चेताया

रिपोर्ट में कहा गया है, “भारत कई वस्तुओं पर ऊंचा एप्लाइड टैरिफ लगाए हुए है—जैसे कि वेजिटेबल ऑयल्स पर 45% तक, सेब, मक्का और मोटरसाइकिल पर 50%, ऑटोमोबाइल और फूलों पर 60%, नेचुरल रबर पर 70%, कॉफी, किशमिश और अखरोट पर 100% और मादक पेयों पर 150% तक शुल्क वसूला जा रहा है।”

भारत दवाओं पर भी “बहुत ऊंचे” बेसिक कस्टम ड्यूटी लगाए हुए है, जिसमें जीवनरक्षक दवाएं और वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (WHO) की आवश्यक दवाओं की सूची में शामिल तैयार दवाएं भी शामिल हैं। रिपोर्ट में आगे कहा गया है, “उच्च टैरिफ दरें अन्य कृषि उत्पादों और प्रोसेस्ड फूड (जैसे चिकन, आलू, साइट्रस फल, बादाम, सेब, अंगूर, टिन में बंद आड़ू, चॉकलेट, कुकीज़, फ्रोजन फ्रेंच फ्राइज और फास्ट फूड रेस्टोरेंट्स में इस्तेमाल होने वाले अन्य तैयार खाद्य पदार्थों) के व्यापार में भी एक बड़ी बाधा हैं।”

भारत के कृषि उत्पादों पर वर्ल्ड ट्रेड ऑर्गेनाइजेशन (WTO) के तहत तय टैरिफ दरें दुनिया में “सबसे ऊंची” मानी जाती हैं—इनकी औसत दर 113.1% है, जो अधिकतम 300% तक जाती है।

Advertisement
First Published - April 1, 2025 | 1:30 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement