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ट्रंप की सुरक्षा रणनीति में भारत से संबंधों पर जोर, हिंद-प्रशांत क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की पहल

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भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया से मिलकर बने अनौपचारिक सुरक्षा समूह क्वाड का उद्देश्य खुले, स्थिर और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देना है

Last Updated- December 07, 2025 | 10:40 PM IST
Donald Trump
अमेरिका के राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप | फाइल फोटो

पिछले सप्ताह जारी राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप की राष्ट्रीय सुरक्षा रणनीति के अनुसार अमेरिका भारत के साथ मुख्य रूप से वाणिज्यिक मोर्चे पर अपने संबंध मजबूत करने का प्रयास करेगा, ताकि उसे हिंद-प्रशांत सुरक्षा में योगदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके। इस दस्तावेज में यह भी संकेत दिया गया है कि चीन के उदय को प्रमुख रणनीतिक चुनौती के रूप में देख रहा अमेरिकी प्रशासन चाहेगा कि क्वाड संगठन और इसमें भारत की निरंतर भागीदारी सुनि​श्चित हो।

भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया से मिलकर बने अनौपचारिक सुरक्षा समूह क्वाड का उद्देश्य खुले, स्थिर और समावेशी हिंद-प्रशांत क्षेत्र को बढ़ावा देना है। लेकिन, चीन इसे स्वयं को घेरे जाने के प्रयास के रूप में देखता है और इसे खारिज करता है।

इस रणनीति दस्तावेज में विशेष रूप से भारत का जिक्र करते हुए कहा गया है, ‘हमें भारत के साथ अन्य के साथ-साथ वाणिज्यिक संबंध बेहतर बनाए रखने होंगे, ताकि उसे ऑस्ट्रेलिया, जापान और अमेरिका के साथ निरंतर सहयोग सहित हिंद-प्रशांत सुरक्षा में योगदान करने के लिए प्रोत्साहित किया जा सके।’

दक्षिण चीन सागर को नियंत्रित करने वाले किसी भी प्रयास को एक और बड़ी सुरक्षा चुनौती के रूप में वर्गीकृत करते हुए दस्तावेज में उन समुद्री मार्गों को खुला रखने के लिए ठोस उपाय करने और आवश्यक निवारण ढांचा विकसित करने का आह्वान किया गया है, जिसमें कोई भी संभावित ताकत दुनिया की सबसे महत्त्वपूर्ण व्यापारिक रग (रास्ते) को अपनी इच्छानुसार खोल या बंद कर सकती है अथवा उस पर शुल्क लगा सकती है।

इसमें यह भी कहा गया है, ‘इसके लिए न केवल हमारी सैन्य विशेष रूप से नौसैनिक  क्षमताओं में और अधिक वृद्धि करने की आवश्यकता है, बल्कि हर उस राष्ट्र के साथ मजबूत सहयोग बनाना होगा, जिसे भारत से लेकर जापान और उससे आगे तक, यदि समस्या का समाधान नहीं हुआ तो नुकसान उठाना पड़ेगा।’

हिंद-प्रशांत और व्यापक एशियाई क्षेत्र पर जोर देने के बावजूद दस्तावेज पश्चिमी गोलार्ध को उस क्षेत्र के रूप में रेखांकित करता है, जहां अमेरिका संभवतः अपने अधिकांश प्रयास केंद्रित करेगा। वह इसे अपना गोलार्ध बताता है। इसमें कहा गया है, ‘वर्षों तक उपेक्षा के बाद अमेरिका पश्चिमी गोलार्ध में अमेरिकी प्रभुत्व को बहाल करने, उसे बढ़ाने तथा पूरे क्षेत्र में अपनी निर्बाध पहुंच बनाए रखने के लिए मुनरो सिद्धांत को दोबारा लागू करेगा।’

यहां भी भारत को एक संभावित भागीदार के रूप में चिह्नित किया गया है। इस दस्तावेज में कहा गया है, ‘अमेरिका को पश्चिमी गोलार्ध तथा दुर्लभ खनिजों के मामले में अफ्रीका में अपनी संयुक्त स्थिति को मजबूत करने एवं बेहतर बनाने के लिए अपने यूरोपीय और भारत समेत तमाम एशियाई सहयोगियों एवं भागीदारों को सूचीबद्ध करना चाहिए।’

पश्चिमी गोलार्ध में उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका तथा आसपास के समुद्र शामिल हैं। दस्तावेज में ट्रंप के उस दावे को दोहराया गया है कि उन्होंने 7 मई से 10 मई के बीच भारत एवं पाकिस्तान के बीच हुई शत्रुता को समाप्त कर दिया था। इस संबंध में भारत स्पष्ट कहता है कि अप्रैल में पहलगाम आतंकवादी हमले के बाद ऑपरेशन सिंदूर के तहत पाकिस्तान के भीतर आतंकवादियों के बुनियादी ढांचों पर की गई कार्रवाई को उद्देश्य पूर्ति एवं पाकिस्तानी पक्ष की ओर से गुहार लगाने के बाद रोका गया था।

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First Published - December 7, 2025 | 10:39 PM IST

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