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भारत व अमेरिका के बीच व्यापार समझौते में लगेगा वक्त

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मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल इस महीने के आखिर में बातचीत के लिए अमेरिका जाने वाला है।  

Last Updated- May 11, 2025 | 10:48 PM IST
India US Trade
प्रतीकात्मक तस्वीर

अमेरिका के वाणिज्य मंत्री हॉवर्ड लटनिक ने शनिवार को ब्लूमबर्ग पॉडकास्ट में कहा कि भारत के साथ व्यापार समझौते में अभी वक्त लग सकता है क्योंकि शुल्कों की लंबी सूची पर अभी बातचीत करने की जरूरत है।

लटनिक ने कहा, ‘भारत इसके लिए वास्तव में कड़ी मेहनत कर रहा है। भारत के साथ समझौते की पूरी संभावना है। मगर जब आप भारत की बात करते हैं तो 7,000 वस्तुओं और सेवाओं पर शुल्क की बात सामने आती है। इसमें वक्त लगता है। इस पर काम करना होता है।’ मुख्य वार्ताकार राजेश अग्रवाल के नेतृत्व में एक भारतीय प्रतिनिधिमंडल इस महीने के आखिर में बातचीत के लिए अमेरिका जाने वाला है।  

लटनिक ने कहा कि अमेरिका-ब्रिटेन व्यापास समझौता दूसरे समझौतों के लिए खाके की तरह काम करेगा। उन्होंने कहा, ‘लोग समझते हैं कि अगर आप कम पारस्परिक शुल्क चाहते हैं तो आपको व्यापार घाटा कम करना होगा, अपना बाजार खोलना होगा। और अगर आप वास्तव में समझदार हैं तो आपको हर क्षेत्र के लिए शुल्क पर बात करनी होगी।  इसलिए आप अपने बाजार को खोलें, हम समझदारी के साथ आ सकते हैं, जैसा हमने ब्रिटेन के साथ किया है।’ अमेरिका के वाणिज्य मंत्री ने उदाहरण देते हुए कहा कि ब्रिटेन रॉल्स रॉयस के इंजन बोइंग को बेचना चाहता है और इसके बदले वह अमेरिका से 10 अरब डॉलर के बोइंग विमान खरीदने पर राजी हुआ है। उन्होंने कहा कि अमेरिका एशिया में ऐसा व्यापार समझौता करना चाहता है, जिससे इलाके के देशों को  ऐसा खाका दिया जा सके, जिसका पालन उन्हें करना होगा।

अमेरिका-ब्रिटेन व्यापार समझौते के बावजूद वाशिंगटन ने संकेत दिया है कि 10 प्रतिशत आधार  शुल्क सभी देशों के लिए बना रहेगा और यह द्विपक्षीय समझौते के बाद भी लागू होगा।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनीशिएटिव के संस्थापक अजय श्रीवास्तव ने कहा कि अगर ब्रिटेन-अमेरिका समझौते को अन्य समझौतों के लिए खाका माना जाए तो भारत उम्मीद कर सकता है कि अमेरिका एक ‘छोटे समझौते’ को अंतिम रूप देने के लिए दबाव बना रहा है, जिसमें शुल्क में कटौती और प्रमुख वादों पर ध्यान होगा और पूर्ण मुक्त व्यापार समझौता (एफटीए) बाद में हो सकता है। उन्होंने कहा, ‘भारत से सोयाबीन, एथनॉल, सेब, अखरोट, बादाम, रेजिन, अवाकाडो, स्पिरिट, जीएमओ उत्पाद, मांस और पॉल्ट्री सहित संवेदनशील कृषि उत्पादों पर शुल्क घटाने को कहा जा सकता है। वाहन पर शुल्क छूट की भी संभावना है क्योंकि ब्रिटेन के साथ एफटीए के तहत भारत पहले ही वहां के कुछ वाहनों पर शुल्क 100 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने पर राजी हो गया है।’

उन्होंने कहा कि भारत को बातचीत में संतुलित, साफ सुथरे और संप्रभुता भरा तरीका अपनाना होगा, जिससे अर्थव्यवस्था को मजबूती मिल सके और किसानों, डिजिटल भविष्य या नियामकीय क्षेत्र में हितों से कोई समझौता न हो। अगर संतुलन नहीं बनता है तो भारत के लिए समझौते से हटना ही बेहतर होगा।

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First Published - May 11, 2025 | 10:48 PM IST

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