facebookmetapixel
Stock Market Today: वेनेजुएला संकट के बीच एशियाई बाजारों में मिला-जुला रुख, जानें कैसी होगी शेयर बाजार की शुरुआतStocks To Watch Today: ONGC से Adani Power तक, आज बाजार में इन स्टॉक्स पर रहेगी नजरमजबूत फंडामेंटल के साथ शेयर बाजार में बढ़त की उम्मीद, BFSI क्षेत्र सबसे आगे: रमेश मंत्रीअमेरिकी प्रतिबंधों से वेनेजुएला की तेल अर्थव्यवस्था झुलसी, निर्यात पर गहरा असर; भारत का आयात भी घटाबांग्लादेश ने IPL के प्रसारण पर लगाया प्रतिबंध, एक्सपर्ट बोले: इस फैसले से कुछ ज्यादा फर्क नहीं पड़ेगादिल्ली दंगा साजिश केस में उमर खालिद और शरजील इमाम को जमानत देने से सुप्रीम कोर्ट ने किया इनकारGrok विवाद में X को सरकार ने दी 72 घंटे की और मोहलत, महिलाओं व बच्चों की तस्वीरों पर केंद्र सख्तकेंद्रीय बजट से पहले IVCA की मांग: AIF ने प्राइवेट क्रेडिट फंड्स के लिए टैक्स में समानता की मांग कीSMC बिल पर एम. दामोदरन की चेतावनी: सेबी का निवेशकों की सुरक्षा पर फोकस कमजोरविश्व आर्थिक मंच की सलाना बैठक में दावोस जाएंगे भारतीय नेतागण, चौहान और वैष्णव करेंगे अगुआई

रूस से कच्चा तेल लेकर आ रहे अमेरिकी प्रतिबंध वाले पोत को रोके जाने की उम्मीद नहीं

इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कच्चे तेल के बारे में लगी सीमा का उल्लंघन करने पर कई समुद्री कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

Last Updated- November 23, 2023 | 10:18 PM IST
US exports of crude oil to India last month climbed to their highest in over two years.

अमेरिकी प्रतिबंध झेल रहा पोत दो दिनों में भारत पहुंचने का अनुमान है। यह उम्मीद नहीं कि रूस से कच्चा तेल लेकर आ रहे इस पोत को रोकने के लिए भारत सरकार कोई निर्देश जारी करेगी। इस मामले की जानकारी रखने वाले विभिन्न मंत्रालयों के वरिष्ठ अधिकारी ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि केंद्र द्वारा इस पोत को लंगर डालने से रोकने का निर्देश दिए जाने की उम्मीद नहीं है।

वरिष्ठ नियामकीय अधिकारी ने बताया, ‘अभी तक इस पोत को आने से रोकने का कोई निर्देश नहीं दिया गया है। नौवहन निदेशालय के महानिदेशक श्याम जगन्नाथन ने बीते सप्ताह कहा था कि नियामक विदेश मंत्रालय के संदेश का इंतजार करेगा। अभी तट के समीप लागू नियम अंतरराष्ट्रीय प्रतिबंधों वाले जहाज पर लागू नहीं होते हैं।’ उन्होंने कहा कि इस बारे में केंद्र को फैसला लेने का अधिकार है।

रिपोर्ट के मुताबिक पोत एनएस सेंचुरी उन तीन में से है जो नियमित तौर पर रूस के कच्चे तेल की आपूर्ति भारत में कर रहा है। यह भारत में गुजरात के तट पर शनिवार को पहुंचने की उम्मीद है।

वाडिनार बंदरगाह एक गैर प्रमुख बंदरगाह है। केंद्र सरकार के अधीन ज्यादातर प्रमुख बंदरगाह हैं और गैर प्रमुख बंदरगाहों का संचालन निजी क्षेत्र व समुद्री सीमा से जुड़े संबंधित राज्य के पास है। गुजरात के मैरीटाइम बोर्ड के पास वाडिनार बंदरगाह का संचालन है और इस पोत के संचालन में केंद्र सरकार का कोई नियंत्रण नहीं है।

युद्ध में खोई बढ़त

बीते साल सात देशों के समूह ने पश्चिमी नौवहन व बीमा कंपनियों को रूस के 60 डॉलर से अधिक के कच्चे तेल के सौदे को प्रतिबंधित कर दिया था। इन सात देशों में अमेरिका, कनाडा, फ्रांस, जर्मनी, इटली, जापान और यूके हैं। इसके अलावा रूस के कच्चे तेल और रिफाइंड शिपमेंट पर यूरोपीय संघ के देशों ने भी प्रतिबंध लगा रखा है।

इस महीने की शुरुआत में अमेरिकी ट्रेजरी विभाग ने कच्चे तेल के बारे में लगी सीमा का उल्लंघन करने पर कई समुद्री कंपनियों पर प्रतिबंध लगा दिया था।

अंतरराष्ट्रीय मीडिया ने बाद में रिपोर्ट दी थी कि एनएस सेंचुरी के साथ-साथ दो अन्य पोतों कजान, लिगोव्स्की प्रॉस्पेक्ट का नाम सूची में रखा गया है। इन तीनों पोतों पर लाइबेरिया का ध्वज है। नाम गु्प्त रखने की शर्त पर विदेश मंत्रालय के वरिष्ठ अधिकारी ने बताया, ‘अभी तक इस पोत को रोके जाने पर कोई फैसला नहीं हुआ है।’

First Published - November 23, 2023 | 10:18 PM IST

संबंधित पोस्ट