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मॉरीशस में कोई मुखौटा कंपनी नहीं, वित्तीय क्षेत्र में पारदर्शिता: मंत्री

मॉरीशस के वित्तीय सेवा और सुशासन मंत्री भोला ने कहा कि मॉरीशस ने हमेशा सुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा दिया है।

Last Updated- March 15, 2024 | 6:38 PM IST
India-Mauritius

मॉरीशस के मंत्री सूमिल्दुथ भोला ने अपने देश में किसी भी मुखौटा कंपनी की मौजूदगी से इनकार करते हुए कहा है कि मॉरीशस वित्तीय सेवा क्षेत्र में पारदर्शिता को सुनिश्चित कर रहा है। भोला ने राष्ट्रीय राजधानी में पीटीआई-भाषा को दिए एक विशेष साक्षात्कार में कहा कि मॉरीशस भारत से निवेश की उम्मीद कर रहा है।

उन्होंने भारत को एक आर्थिक महाशक्ति बताया। मॉरीशस के वित्तीय सेवा और सुशासन मंत्री भोला ने कहा कि मॉरीशस ने हमेशा सुशासन और पारदर्शिता को बढ़ावा दिया है। भारत के साथ मॉरीशस के लंबे समय से मजबूत द्विपक्षीय संबंध हैं और वह मुख्य रूप से वित्त-प्रौद्योगिकी क्षेत्र में सहयोग की तलाश कर रहा है।

उन्होंने कहा, ”भारत आना खुशी की बात है। मैं कहूंगा कि मॉरीशस के लिए भारत महत्वपूर्ण है, वहीं भारत के लिए भी मॉरीशस खासकर वित्तीय सेवा के क्षेत्र में महत्वपूर्ण है।” मॉरीशस से भारत आने वाली पूंजी को लेकर कुछ हलकों में जताई जा रही चिंताओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा कि यह केवल एक धारणा है।

उन्होंने कहा, ”यह केवल एक धारणा है… मैं पुष्टि कर सकता हूं कि मॉरीशस में कोई मुखौटा कंपनी नहीं है। हम ओईसीडी (मानदंडों) के अनुरूप संचालन करते हैं… हम पारदर्शिता को बढ़ावा दे रहे हैं।” मॉरीशस भारतीय शेयर बाजार में आने वाले विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (एफपीआई) का एक महत्वपूर्ण स्रोत है और यहां से मुखौटा कंपनियों के जरिए अवैध तरीकों से धन भेजने को लेकर चिंताएं जताई जाती रही हैं।

मंत्री ने कहा कि उनके देश ने अपने वित्तीय क्षेत्र को ओईसीडी मानदंडों और एफएटीएफ सिफारिशों सहित अंतरराष्ट्रीय मानदंडों के साथ जोड़ दिया है। वित्तीय कार्रवाई कार्य बल (एफएटीएफ) धनशोधन और आतंकवादी वित्तपोषण को रोकने के लिए वैश्विक कार्रवाई का नेतृत्व करता है। आर्थिक सहयोग और विकास संगठन (ओईसीडी) अंतरराष्ट्रीय कराधान मामलों पर एक प्रमुख वैश्विक निकाय है।

भोला ने कहा कि मॉरीशस को भारत से निवेश की तलाश है। मॉरीशस विशेष रूप से भारत और अफ्रीका के बीच एक मंच के रूप में काम करता है और भारतीय निवेशकों को यह जानना चाहिए कि हमने कारोबारी सुगमता में काफी प्रगति की है। भारत के विदेश मंत्रालय के मुताबिक, वर्ष 2000 से 2022 तक मॉरीशस से भारत में कुल 161 अरब अमेरिकी डॉलर का प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफडीआई) आया जो भारत में कुल एफडीआई का 26 प्रतिशत थी।

भोला ने कहा, ”हम प्रतिस्पर्धी नहीं हैं। हम एक सहयोगी की तरह हैं। हम भारत और भारतीय अधिकारियों को बताना चाहते हैं कि हम वित्तीय क्षेत्र में प्रतिस्पर्धा के बजाय सहयोग की उम्मीद करते हैं।” मॉरीशस और भारत के बीच एक व्यापक आर्थिक सहयोग एवं साझेदारी समझौता (सीईसीपीए) अप्रैल 2021 में लागू हुआ था।

First Published - March 15, 2024 | 6:38 PM IST (बिजनेस स्टैंडर्ड के स्टाफ ने इस रिपोर्ट की हेडलाइन और फोटो ही बदली है, बाकी खबर एक साझा समाचार स्रोत से बिना किसी बदलाव के प्रकाशित हुई है।)

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