facebookmetapixel
Advertisement
लोक सभा अध्यक्ष के खिलाफ प्रस्ताव लाने की तैयारी में विपक्ष, राहुल गांधी की मांग पर अड़ी विपक्षी पार्टियां16वें वित्त आयोग की नई अंतरण व्यवस्था: राज्यों के लिए फायदे-नुकसान और उठते सवालAI Impact Summit 2026: पंजीयन के नाम पर वसूली से बचें, इंडिया AI मिशन ने जारी किया अलर्टहिंद महासागर में भारत का बड़ा कदम: सेशेल्स के लिए 17.5 करोड़ डॉलर के आर्थिक पैकेज का ऐलानIndia AI Impact Summit 2026: दिल्ली के लग्जरी होटलों में रेट्स आसमान पर, स्वीट्स 30 लाख रुपये तकफार्मा दिग्गजों की हुंकार: चीन से मुकाबले के लिए भारतीय दवा नियमों में बड़े सुधार की जरूरतपीएम इंटर्नशिप योजना में बदलाव की तैयारी; इंटर्नशिप अवधि और आयु सीमा में कटौती संभवमारुति सुजुकी की रफ्तार: 2025 में रेल से 5.85 लाख वाहनों की रिकॉर्ड ढुलाई, 18% का शानदार उछालFY26 की पहली छमाही में कंपनियों का कैपेक्स 6 साल के हाई पर, इंफ्रा और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर ने दिखाई तेजीजगुआर लैंड रोवर के वैश्विक नक्शे पर तमिलनाडु: रानीपेट में ₹9,000 करोड़ के TATA-JLR प्लांट का उद्घाटन

भारत-ब्रिटेन व्यापार वार्ता, यात्री वाहनों के लिए शुल्क पर विचार

Advertisement
Last Updated- June 05, 2023 | 1:05 AM IST
India-UK FTA

भारत और ब्रिटेन प्रस्तावित व्यापार समझौते के तहत जटिल मुद्दों को निपटाने की को​शिश कर रहे हैं। भारत सरकार काफी संभलकर कदम आगे बढ़ा रही है। वह ब्रिटिश कंपनियों को अपने यात्री वाहन बाजार में आने देने के लिए तैयार है मगर समझौता होने के बाद एक सीमित संख्या में वाहन इस बाजार में बेचने की ही अनुमति होगी।

भारत ने शुल्क दर कोटा (टीआरक्यू) के हिसाब से भारतीय बाजार में प्रवेश की इजाजत का प्रस्ताव रखा है। इसके तहत रियायती आयात शुल्क पर 1 लाख यात्री वाहनों का आयात करने की अनुमति होगी।

मामले की जानकारी रखने वाले दो व्यक्तियों ने बिज़नेस स्टैंडर्ड को बताया कि इन वाहनों के लिए आयात शुल्क (टीआरक्यू के तहत) पांच साल में चरणबद्ध तरीके से समाप्त कर दिया जाएगा। हालांकि ये लोग सीधे तौर पर बातचीत में शामिल नहीं थे।

वित्त वर्ष 2022-23 में देश में 38.9 लाख यात्री वाहन बिके थे। इस हिसाब से ब्रिटिश कंपनियों के वाहनों के लिए तय सीमा 1 फीसदी से भी कम रहेगी। इससे स्थानीय कार विनिर्माताओं की यह चिंता दूर हो सकती है कि यदि व्यापार समझौता लागू हुआ तो आयात में अचानक वृद्धि नहीं होगी।

एक व्य​क्ति ने कहा, ‘टीआरक्यू के अलावा बाकी आयात के लिए शुल्क धीरे-धीरे खत्म कर दिया जाएगा।’ मगर यह देखना बाकी है कि ब्रिटेन इस प्रस्ताव को कबूल करता है या नहीं क्योंकि वार्ता अभी पूरी नहीं हुई है। 10वें दौर की वार्ता 5 से 9 जून तक नई दिल्ली में होनी है।
भारत को उन देशों में गिना जाता है, जहां वाहनों पर अधिक शुल्क लगाया जाता है। पूरी तरह तैयार (सीबीयू) आयातित वाहनों पर 70 से 100 फीसदी सीमा शुल्क लगता है।

वा​णिज्य विभाग ने इस बाबत जानकारी के लिए बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा भेजे गए सवालों का कोई जवाब नहीं दिया।

ब्रिटिश उच्चायोग के प्रवक्ता ने बिज़नेस स्टैंडर्ड द्वारा पूछे गए सवालों के जवाब में कहा, ‘आधुनिक, दूरदर्शी मुक्त व्यापार समझौता हमें 2030 तक भारत और ब्रिटेन के बीच व्यापार दोगुना करने के साझा लक्ष्य तक ले जा सकता है। इस व्यापार समझौते से भारतीय निर्यातकों को ब्रिटेन के बाजार में प्रवेश मिल जाएगा। इन निर्यातकों में भारत के 4.8 करोड़ छोटे एवं मझोले कारोबारी भी शामिल हैं।

ब्रिटेन ऐसा समझौता चाहता है, जिससे शुल्क दरों और लालफीताशाही में कमी आए। इससे भारतीय उपभोक्ताओं और कारोबारियों के लिए ब्रिटेन का सामान आसानी से उपलब्ध होगा।’

इस मामले से अवगत लोगों ने बताया कि ब्रिटेन वाहन और वाहन कलपुर्जा बाजार तक पूर्ण पहुंच हासिल करने के लिए बात कर रहा है। मगर भारत ने एकदम साफ कर दिया है कि वह इले​क्ट्रिक वाहन जैसे उभरते उद्योग के लिए शुल्क दरों में कटौती नहीं करना चाहता है। सरकार को भी वा​णि​ज्यिक वाहन श्रेणी में कंपनियों के विरोध का सामना नहीं करना पड़ा है। उद्योग सूत्रों ने कहा कि यात्री वाहन कंपनियों को चिंता है कि कहीं सरकार आयात शुल्क में बड़ी कटौती न कर दे।

इक्रियर की प्रोफेसर अर्पिता मुखर्जी ने कहा कि कुछ कार विनिर्माता चिंतित हैं,लेकिन शुल्क दरों में रियायत का फायदा अंतत: भारतीय उपभोक्ताओं को होगा।

उन्होंने कहा, ‘व्यापार समझौता इस तरीके से तैयार किया जाना चाहिए कि ब्रिटेन अपनी वैश्विक मूल्य श्रृंखला में भारत का इस्तेमाल उत्पादन केंद्र के तौर पर करे। फिलहाल हम काफी हद तक घरेलू बाजार पर निर्भर हैं और वै​श्विक मूल्य श्रृंखला का हिस्सा नहीं हैं। यदि भारत ब्रिटेन या यूरोपीय संघ जैसे विकसित देशों के साथ एफटीए पर हस्ताक्षर करता है तो भारत को आपूर्ति श्रृंखला की समस्याओं से निपटने में मदद मिलेगी।’

Advertisement
First Published - June 5, 2023 | 1:05 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement