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भारत-कनाडा राजनयिक तनाव से वीजा मामले निपटाने में देरी, अप्रवासन और छात्रों पर सीमित असर

विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा में काम कर रहे लोगों को कार्य स्थल पर किसी भी तरह के उत्पीड़न या अन्य परेशानी के बारे में चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

Last Updated- October 16, 2024 | 10:49 PM IST
India-Canada

भारत और कनाडा के बीच बिगड़ते रिश्तों का असर आम लोगों पर भी पड़ रहा है। अनेक भारतीय अप्रवासन, वर्क और छात्र वीजा को लेकर ऊहापोह की स्थिति में हैं। विश्लेषकों का मानना है कि ताजा राजनयिक विवाद वीजा नीति को सीधे प्रभावित नहीं करेगा।

सर्कल ऑफ काउंसेल में पार्टनर रसेल ए स्टेमेट्स ने कहा, ‘यह समझना जरूरी है कि भारत और कनाडा के बीच जारी गतिरोध का असर अप्रवासन मुद्दे पर नहीं पड़ने जा रहा है। भू-राजनीतिक मामलों में कनाडा ऐसे मुद्दों को अलग ही रखता है।’

राजनयिक विवाद की जड़

कुछ अज्ञात हमलावरों ने कनाडा में एक गुरुद्वारे के बाहर खालिस्तान समर्थक हरदीप सिंह निज्जर की हत्या कर दी थी। पिछले साल कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने इस हत्याकांड में भारत सरकार की संलिप्तता के आरोप लगाए थे।

भारत ने न केवल इन आरोपों का सख्ती से खंडन किया था बल्कि ऐसा नहीं करने के लिए ट्रूडो को चेताया भी था। यह विवाद पिछले सोमवार को उस समय और गहरा गया जब भारतीय विदेश मंत्रालय को मिले एक राजनयिक पत्र में यह संकेत दिया गया कि निज्जर हत्याकांड की जांच में शक की सुई भारतीय उच्चायोग के अधिकारियों पर भी जा रही है और उनसे पूछताछ की जा सकती है। इसके बाद भारत ने कनाडाई राजदूत को बुलाकर चेताया और उसके राजनयिकों को देश छोड़ने के लिए कह दिया और सुरक्षा का हवाला देकर कनाडा से अपने राजनयिक और अधिकारियों को दिल्ली बुला लिया।

घर से दूर घर जैसा माहौल

कनाडा में लाखों भारतीय नागरिक रहते हैं, जो यहां विभिन्न कामों से अर्थव्यवस्था को गति दे रहे हैं। भारतीयों को कनाडा का माहौल अपने घर जैसा ही लगता है। यही कारण है कि छात्र पढ़ाई के लिए अन्य देशों के मुकाबले कनाडा के ही विश्वविद्यालयों में दाखिला लेने को प्राथमिकता देते हैं। अन्य देशों के मुकाबले यहां उन्हें कम दिक्कतें होती हैं और हर मोड़ पर कोई न कोई अपने देश का नागरिक मिल जाता है।

विवाद का भारतीयों पर असर

यद्यपि अप्रवासन नीतियों में कोई आधिकारिक बदलाव नहीं हुआ है, लेकिन भारत में कनाडाई राजनयिकों की संख्या घट जाने से वीजा मामले निपटाने में काफी देर लग रही है।

अप्रवासन सलाहकार और अभिनव इमिग्रेशन सर्विसेज के संस्थापक अजय शर्मा कहते हैं, ‘इस देरी से भले वीजा मामलों को संभालने में कनाडा के अधिकारियों को राहत मिली हो, लेकिन यात्रा की तैयारी कर रहे भारतीय इससे बुरी तरह प्रभावित हो रहे हैं।’ यदि यही स्थिति रही तो इसका असर विजिटर और वर्क वीजा, दोनों पर पड़ेगा।

छात्रों के लिए चिंता का विषय?

कनाडा में पढ़ रहे भारतीय छात्रों को बदलते हालात से अधिक चिंता करने की जरूरत नहीं है, क्योंकि इससे उनकी मौजूदा स्थिति पर कोई असर नहीं पड़ने जा रहा है।

कनाडा के विश्वविद्यालय कठिन समय में अपने यहां पढ़ने वाले विदेशी छात्रों की मदद करने के लिए जाने जाते हैं। करियर मौजैक के संस्थापक और निदेशक अभिजित जवेरी कहते हैं, ‘कनाडाई संस्थानों के पास विदेशी छात्रों को संभालने के लिए मजबूत ढांचा है।’

शर्मा कहते हैं, ‘विवाद के कारण उपजे हालात में वीजा मिलने में देर का असर उन छात्रों पर पड़ सकता है, जिन्हें अभी वहां अपनी पढ़ाई शुरू करनी है, क्योंकि इससे उनका कोर्स पिछड़ जाएगा। साथ ही ऐसे लोग भी परेशान होंगे जो कनाडा में पढ़ रहे अपने बच्चों से मिलने जाना चाहते हैं।’

कार्य स्थलों पर व्यवहार

विशेषज्ञों का मानना है कि कनाडा में काम कर रहे लोगों को कार्य स्थल पर किसी भी तरह के उत्पीड़न या अन्य परेशानी के बारे में चिंता करने की कोई जरूरत नहीं है।

वनस्टेप ग्लोबल के संस्थापक और निदेशक अरित्रा घोषाल के अनुसार, ‘कनाडा में काम करने वाली बहुराष्ट्रीय कंपनियां विविधता और समावेशी माहौल बनाए रखने में विश्वास रखती हैं। इसलिए वहां का माहौल प्रभावित होने का खतरा नहीं है, लेकिन छोटे कारोबार में कार्यरत लोगों को थोड़ी-बहुत दिक्कतों का सामना करना पड़ सकता है। हालांकि इस बारे में अभी कुछ भी कहना बहुत जल्दबाजी होगी।’

कनाडा जाने वालों की संख्या कम होगी?

वर्ष 2022 में विदेशी छात्रों ने कनाडा की अर्थव्यवस्था में लगभग 37.3 अरब डॉलर का योगदान दिया था। वहां कुशल कामगारों की बहुत अधिक जरूरत है, जिसकी पूर्ति वह विदेशी छात्रों से करता है। कनाडा में रहने वाले इमिग्रेशन विश्लेषक दर्शन महाराज कहते हैं, ‘ताजा विवाद अप्रवासन को बहुत अधिक समय तक प्रभावित नहीं कर पाएगा। अच्छे संबंधों से दोनों ही देशों को फायदा है।’

First Published - October 16, 2024 | 10:49 PM IST

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