facebookmetapixel
Advertisement
AI से बढ़ सकते हैं फाइनैंशियल और साइबर रिस्क, IMF ने केंद्रीय बैंकों को निगरानी बढ़ाने की दी सलाहक्या आपका Aadhaar UAN से लिंक है? नहीं तो तुरंत करें ये कामनिर्यात के लिए इन्वेंट्री-आधारित ई-कॉमर्स में FDI को मंजूरी, एक्सपोर्ट बढ़ाने की नई पहलइंडिगो को पहली तिमाही में ₹237.6 करोड़ का घाटा, ईंधन खर्च 86% बढ़ने से बढ़ा दबावआशीष कुमार दास होंगे Infosys के नए CEO और MD, अगले साल 1 अप्रैल से संभालेंगे पद भारCrudeChem डील से बदलेगी Fineotex की तस्वीर? Choice ने BUY रेटिंग के साथ ₹51 दिया टारगेटइंफोसिस Q1 नतीजे: मुनाफा 12.2% बढ़कर ₹7,769 करोड़; राजस्व में 14% इजाफामाल ढुलाई पर रेलवे का बड़ा प्लान, 10 साल 40% हिस्सेदारी हासिल करने की तैयारीIPO के बाद अब SBI Funds लाएगा पहला टेक-फोकस्ड AIF, 20 करोड़ डॉलर के फंड की तैयारीWazirX की वापसी: 95% पुराने यूजर्स लौटे, फ्यूचर्स ट्रेडिंग में 300% उछाल

मुक्त व्यापार समझौते में हो सकती है देर

Advertisement
Last Updated- December 11, 2022 | 5:45 PM IST

ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन के इस्तीफे के कारण भारत के महत्त्वाकांक्षी मुक्त व्यापार समझौते के लिए तय वार्ता  दीवाली की समयसीमा के पार जा सकती है। ब्रिटेन में चल रही राजनीतिक खलबली निश्चित ही चल रही व्यापार वार्ता में रुकावट ला सकती है। सरकार के एक वरिष्ठ अधिकारी ने नाम न उजागर करने की शर्त पर बताया कि दोनों देशों के बीच सौहार्दपूर्ण संबंध के चलते इस व्यापार वार्ता में कोई बाधा नहीं आएगी।  लगातार विवादों में रहने और अपनी खुद की कैबिनेट द्वारा भारी विद्रोह का सामना करने के कारण प्रधानमंत्री को इस्तीफा देना पड़ा।
यूके-इंडिया व्यापार परिषद के  पूर्व मुख्य कार्या​धिकारी जयंत कृष्ण ने कहा कि जॉनसन का इस्तीफा व्यापार वार्ता के लिए बाधा बनेगा क्योंकि वह खुद दोनों देशों में गहरे संबंध बनाने के लिए सबसे आगे खड़े थे। जैसा कि देश में राजनीतिक नेतृत्व में बदलाव हो रहा है, आने वाला नेता नया व्यापार मंत्री नियुक्त करेगा जिससे बातचीत में बदलाव आ सकता है।
ब्रेक्सिट से बाहर निकलने के बाद अपनी अर्थव्यवस्था पर फिर से लौटने के लिए ब्रिटेन शीघ्र ही व्यापार समझौते को निपटाना चाहता था। दोनों देशों के बीच अधिकारियों के बीच पांचवें चरण की बैठक इसी महीने नई दिल्ली में होने वाली थी। व्यापार समझौता जनवरी में शुरू हुआ था।
जून के चौथे चरण की बैठक के बाद, ब्रिटेन के अंतरराष्ट्रीय व्यापार विभाग ने एक बयान में कहा था कि समझौते को विस्तृत प्रारूप दिया गया। दोनों तरफ से तकनीकी विशेषज्ञों ने  71 अलग सत्र में एक साथ बैठकर 20 नीतियों पर चर्चा की। संधि में शामिल तकनीकी अधिकारियों ने हाइब्रिड विधि से, कुछ ने लंदन की बैठक में जाकर हिस्सा लिया, वहीं कुछ ने ऑनलाइन बैठक में भाग लिया।
यूरोपियन सेंटर फॉर इंटरनैशनल पॉलिटिकल इकनॉमी में ब्रिटेन के निदेशक डेविड हेनिग ने ट्वीट कर बताया कि आने वाला प्रधानमंत्री शायद दोनों देशों के बीच हुए समझौते पर फिर से विचार कर सकता है और अगर कोई समझौता जल्दबाजी में लिया गया है तो ब्रिटेन के व्यापार को होने वाले लाभ पर यह निर्भर करेगा कि यह व्यापार समझौता आगे बढ़ता है या नहीं।

Advertisement
First Published - July 8, 2022 | 12:05 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement