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कुडनकुलम में दो नई परमाणु ऊर्जा इकाइयां जल्द चालू होंगी, रूसी वीवीईआर-1000 तकनीक पर चलेगी

रोसाटॉम भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम (एनपीसीआईएल) के साथ संयुक्त रूप से विकसित की जा रही परियोजना के लिए प्रमुख उपकरण और प्रौद्योगिकी आपूर्ति कर रही है

Last Updated- December 05, 2025 | 11:05 PM IST
nuclear plant
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

तमिलनाडु के कुडनकुलम स्थित भारत के सबसे बड़े परमाणु ऊर्जा संयंत्र में जल्द ही रूसी वीवीईआर-1000 तकनीक से दो नई इकाइयां चालू हो जाएंगी। इनमें प्रत्येक की क्षमता 1,000 मेगावाट है। इसके बाद दो और इकाइयों से उत्पादन शुरू होगा। रूस की सरकारी कंपनी रोसाटॉम के महानिदेशक एलेक्सी लिखाचेव ने शुक्रवार को यह जानकारी दी। लिखाचेव रूस के राष्ट्रपति व्लादीमिर पुतिन के साथ भारत आए प्रतिनिधिमंडल में शामिल हैं।

रोसाटॉम भारतीय परमाणु ऊर्जा निगम (एनपीसीआईएल) के साथ संयुक्त रूप से विकसित की जा रही परियोजना के लिए प्रमुख उपकरण और प्रौद्योगिकी आपूर्ति कर रही है। संयंत्र में पहले से ही 1,000 मेगावाट क्षमता की दो इकाइयां काम कर रही हैं और इसकी क्षमता को धीरे-धीरे बढ़ाकर 6,000 मेगावाट करने की है।

नई दिल्ली ​​स्थित हैदराबाद हाउस में 23वें भारत-रूस शिखर सम्मेलन के मौके पर लिखाचेव ने कहा, ‘कुडनकुलम एनपीपी की इकाइयां 3 और 4 लगभग तैयार हैं। अगले साल हम सीधे इकाई 3 पर कमीशनिंग संचालन शुरू कर देंगे और इसी तरह साल-दर-साल हम कुडनकुलम एनपीपी की इकाइयों 3, 4, 5 और 6 को चालू करेंगे।’

उन्होंने कहा कि बिजली संयंत्र की मौजूदा इकाइयां पूरी क्षमता से काम कर रही हैं। ये लगातार बिजली बना रही हैं। उनका उत्पादन घोषित 1,000 मेगावाट से अ​धिक हो रहा है। भारत इससे संतुष्ट और खुश है।

लिखाचेव ने कहा, ‘वीवीईआर-1000 रूसी तकनीक है। वास्तव में यह सीरियल लगभग कन्वेयर-शैली का है। यह सहयोग मजबूत होता रहेगा।’ भारत, रूस समेत कुछ देशों में शामिल है, जिसके पास यूरेनियम खनन और प्रसंस्करण से लेकर संयंत्र के डीकमीशनिंग तक परमाणु ऊर्जा उत्पादन की पूरी क्षमता मौजूद है। यहां इस समय 8,700 मेगावाट परमाणु ऊर्जा उत्पादन क्षमता की इकाइयों का संचालन हो रहा है। वर्ष 2047 तक इस क्षमता को बढ़ाकर 100 गीगावाट करने की योजना है।

लिखाचेव ने कहा, ‘भारत में 1960 के दशक के अंत से परमाणु बिजली ग्रिड पर है। परमाणु बिजली के लिए जरूरी सामान यानी तकनीक और रिएक्टर पश्चिमी देशों मुख्य रूप से उत्तरी अमेरिका से आए थे। यह कहना उचित ही होगा कि इस दिशा में आगे बढ़ने के लिए एक स्तर पर भारत को ईंधन आपूर्ति और यूरेनियम उत्पादों के मामले में कई बाधाओं का सामना करना पड़ा।’

First Published - December 5, 2025 | 10:37 PM IST

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