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2025 में विलय-अधिग्रहण में रिकॉर्ड उछाल, ओपन ऑफर 2008 के बाद सबसे ज्यादा

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मूल्य के लिहाज से देखा जाए तो 2025 में 41,443.95 करोड़ रुपये की पेशकश रकम तीसरा सबसे अ​धिक आंकड़ा है

Last Updated- December 22, 2025 | 9:09 AM IST
mergers and acquisitions
Representational Image

विलय एवं अ​धिग्रहण के लिहाज से साल 2025 शानदार रहा। इसे मुख्य तौर पर निजी ​इक्विटी गतिवि​धियों में तेजी से रफ्तार मिली। साल के दौरान विलय एवं अ​धिग्रहण के बाद खुली पेशकश हर सप्ताह लगभग दो रही।

प्राइमडेटाबेस डॉट कॉम द्वारा संकलित आंकड़ों के अनुसार, साल 2025 में उल्लेखनीय हिस्सेदारी के अधिग्रहण किए जाने अथवा नियंत्रण में बदलाव के बाद अतिरिक्त शेयर हासिल करने के लिए खुली पेशकश की तादाद 121 है। यह पिछले 17 वर्षों में सबसे अधिक और 1997 के बाद दूसरी सर्वा​धिक रही। पिछला उच्च स्तर 2008 में दिखा था जब ऐसी खुली पेशकश की तादाद 133 थी। मूल्य के लिहाज से देखा जाए तो 2025 में 41,443.95 करोड़ रुपये की पेशकश रकम तीसरा सबसे अ​धिक आंकड़ा है। साल 2013 में 47,473.77 करोड़ रुपये और 2022 में 45,649.39 करोड़ रुपये की पेशकश रकम दर्ज की गई थी। कुछ शर्तें पूरी होने पर विलय के प्रावधान लागू होते हैं।

आम तौर पर इसमें एक साल के दौरान किसी कंपनी में 5 फीसदी से अधिक हिस्सेदारी हासिल करने वाली संस्थाएं, कुल 25 फीसदी हिस्सेदारी हासिल करना अथवा कंपनी के नियंत्रण में बदलाव शामिल होते हैं। अधिकतर खुली पेशकश कंपनी में न्यूनतम 26 फीसदी अतिरिक्त हिस्सेदारी हासिल करने के लिए होती है और यह अ​धिग्रहण के बाद आम शेयरधारकों को बाहर निकलने का अवसर प्रदान करती है।

सामान्य तौर पर बाहर निकलने वाले शेयरधारकों को आम तौर पर अधिग्रहण कीमत या कंपनी के शेयरों के 60 दिन से लेकर 52 हफ्ते तक के वॉल्यूम-वेटेड प्राइस के आधार पर कीमत मिलती है, जो अधिग्रहण के आसपास की परिस्थितियों पर निर्भर करती है।

इस साल की प्रमुख खुली पेशकश में टॉरंट फार्मास्युटिकल्स की जेबी केमिकल्स ऐंड फार्मास्युटिकल्स के लिए पेशकश (6,842.80 करोड़ रुपये), निजी इ​क्विटी फर्म सीवीसी कैपिटल की इकाई एक्वीलो हाउस द्वारा आवास फाइनैंसर्स नामक हाउसिंग फाइनैंस कंपनी का अधिग्रहण (3,682.15 करोड़ रुपये) और आईएचएच हेल्थकेयर द्वारा फोर्टिस हेल्थकेयर का अधिग्रहण (3,349.44 करोड़ रुपये) शामिल हैं।

निजी इ​क्विटी कंपनियां पहले से अधिक सक्रिय

प्राइम डेटाबेस के प्रबंध निदेशक प्रणव हल्दिया ने कहा, ‘जब अर्थव्यवस्था अच्छा प्रदर्शन कर रही होती है तो विलय-अधिग्रहण की गतिवि​धियां बढ़ जाती हैं।’ हल्दिया ने कहा कि निजी इ​क्विटी कंपनियां भी कुछ साल पहले के मुकाबले अधिक सक्रिय हैं और वे नियंत्रण योग्य हिस्सेदारी की तलाश में हैं। उनके इस रुझान से अधिग्रहण गतिवि​धियों को बढ़ावा मिलता है। यह ऐसे समय में हो रहा है जब कई व्यवसायों में पीढ़ीगत परिवर्तन हो रहा है। जब पारिवारिक कारोबार में अगली पीढ़ी की दिलचस्पी नहीं होती है तो प्रवर्तक अक्सर उसी क्षेत्र की अन्य कंपनी या निजी इक्विटी निवेशकों को हिस्सा बेचते हैं।

ग्रांट थॉर्नटन भारत के डीलट्रैकर के अनुसार, नवंबर 2025 में निजी इक्विटी लेनदेन 2022 के बाद सर्वोच्च स्तर पर पहुंच गया। ग्रांट थॉर्नटन की रिपोर्ट के अनुसार, रणनीतिक सौदों और कम मूल्य वाले सौदों के प्रति आकर्षण के साथ विलय-अधिग्रहण की रिकॉर्ड संख्या दर्ज की गई।

निजी इ​क्विटी निवेशक चाहते हैं प्रमोटर

सलाहकार फर्म ​कियर्नी के पार्टनर और प्रमुख (निजी इक्विटी और विलय-अधिग्रहण) सुमत चोपड़ा ने कहा कि लाभप्रद निजी इक्विटी निवेश के इस अगले दौर में भारत को परिचालन संबंधी बदलाव और गहरी भागीदारी की आवश्यकता है। ऐसा तभी हो सकता है जब ज्यादातर कंपनियों में बहुलांश अथवा नियंत्रण योग्य हिस्सेदारी हो। पिछले कुछ वर्षों के दौरान तमाम प्रवर्तकों ने अपने कारोबार में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की है और वे अब निजी इक्विटी निवेशकों को लाना चाहते हैं जो कारोबार पेशेवर तरीके से विस्तार दे सकें। इससे लेनदेन में उछाल आई है। शुरू में ऐसी गतिविधियां प्रौद्योगिकी एवं वित्तीय सेवा कंपनियों में अधिक दिखीं, लेकिन आगे उसमें बदलाव हो सकता है।

चोपड़ा ने कहा, ‘मुझे उम्मीद है कि औद्योगिक एवं विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में जबरदस्त तेजी दिखेगी।’ उन्होंने कहा कि स्वास्थ्य सेवा, उपभोक्ता और अक्षय ऊर्जा जैसे क्षेत्रों में भी आने वाले समय में अधिग्रहण गतिविधियां बढ़ने की संभावना है।

साल 2008 में पेशकश रकम के हिस्से के तौर पर अधिग्रहण की रकम 91 फीसदी थी। मगर यह साल 2025 में अब तक 31 फीसदी रही। खुली पेशकश को पूरा होने में कई महीने लगते हैं जिससे अधिग्रहण की अंतिम रकम भी प्रभावित हो सकती है। उदाहरण के लिए, अगर कोई कंपनी अक्टूबर में खुली पेशकश लाती है तो वह पेशकश रकम का तुरंत उपयोग नहीं कर सकती है।

हल्दिया के अनुसार, अगर शेयरधारक खुली पेशकश के लिए तय मूल्य से अधिक की उम्मीद कर करते हैं तो मूल्य निर्धारण में अंतर भी अधिग्रहण की रकम में कमी का एक कारण हो सकता है।

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First Published - December 21, 2025 | 10:34 PM IST

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