भारत

18 हजार से ज्यादा पीजी मेडिकल सीटें खाली, नीट पीजी की कट-ऑफ में कटौती

स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि कटऑफ कम करने का असर सरकारी और निजी दोनों तरह के संस्थानों पर पड़ेगा।

Published by
संकेत कौल   
Last Updated- January 15, 2026 | 9:40 AM IST

नीट पीजी काउंसलिंग के दूसरे दौर के बाद देश भर में 18,000 से अधिक स्नातकोत्तर चिकित्सा सीटें खाली रहने पर नैशनल बोर्ड ऑफ एग्जामिनेशन इन मेडिकल साइंस को तीसरे दौर की काउंसलिंग शुरू होने से पहले कट-ऑफ कम करनी पड़ी है। स्वास्थ्य मंत्रालय के सूत्रों ने कहा कि कटऑफ कम करने का असर सरकारी और निजी दोनों तरह के संस्थानों पर पड़ेगा।

संशोधित मानदंडों के तहत आरक्षित श्रेणियों के लिए कटऑफ को 40वें पर्सेंटाइल से घटाकर शून्य पर्सेंटाइल कर दिया गया है, जिसमें न्यूनतम योग्यता अंक 800 में से 235 से गिरकर -40 हो गए हैं।

इसी तरह सामान्य और ईडब्ल्यूएस उम्मीदवारों के लिए योग्यता पर्सेंटाइल 50 से घटाकर 7 कर दी गई है। बेंचमार्क विकलांगता (पीडब्ल्यूबीडी) वाले सामान्य उम्मीदवारों के लिए यह 45 अंक से घटाकर 5 पर्सेंटाइल कर दिया गया है।

जानकार सूत्रों ने यह भी कहा कि सीटें खाली रहने का कारण योग्य या सक्षम डॉक्टरों की कमी बिल्कुल नहीं है। एक अधिकारी ने भी यह दोहराते हुए कहा, ‘सीटें नहीं भरने का कारण पात्रता या क्षमता की कमी नहीं है, बल्कि मौजूदा योग्यता पर्सेंटाइल मानदंडों के कारण है, जिस कारण खाली सीटें होने के बावजूद योग्य उम्मीदवार दाखिले से वंचित रह गए।’

First Published : January 15, 2026 | 8:59 AM IST