महाराष्ट्र

GEC समिट: डेवलपमेंट एजेंसियां बदल रहीं महाराष्ट्र की तस्वीर, पेश किया मल्टी-मॉडल विकास का मेगा ब्लूप्रिंट

खास यह कि इनका जोर एकल परियोजनाओं पर नहीं, बल्कि शहर, सड़कें, हवाई अड्डे और औद्योगिक क्षेत्र आदि सभी तरह की दीर्घकालिक आ​र्थिक गतिविधियों पर है

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सोहिनी दास   
Last Updated- February 19, 2026 | 10:52 PM IST

मुंबई में ग्लोबल इकनॉमिक को-ऑपरेशन (जीईसी) समिट में महाराष्ट्र की शीर्ष बुनियादी ढांचा एजेंसियों ने राज्य में अगले चरण के विकास का खाका पेश किया। खास यह कि इनका जोर एकल परियोजनाओं पर नहीं, बल्कि शहर, सड़कें, हवाई अड्डे और औद्योगिक क्षेत्र आदि सभी तरह की दीर्घकालिक आ​र्थिक गतिविधियों पर है।

महाराष्ट्र स्टेट रोड डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमएसआरडीसी) समृद्धि महामार्ग के आसपास के प्रमुख इंटरचेंज पर बड़े लॉजिस्टिक्स और औद्योगिक क्षेत्र के माध्यम से विकास को गति दे रहा है। साथ ही फ्रेट, एमएसएमई और विनिर्माण के क्षेत्र में विकास के लिए मुंबई, वधावन और नए इंटरनैशनल एयरपोर्ट के आसपास सैकड़ों वर्ग किलोमीटर की योजना बना रहा है।

सिटी ऐंड इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (सीआईडीसीओ) का पूरा जोर कार्गो और मल्टीमॉडल कनेक्टिविटी के विस्तार के साथ इंटरनैशनल एयरपोर्ट को पूरी तरह चालू करने, आंतरिक शहर और एजुकेशन सिटी के साथ-साथ एयरपोर्ट से लगते वा​णि​ज्यिक क्षेत्रों के विकास के माध्यम से नवी मुंबई को चमकाने पर है।

इसी प्रकार महाराष्ट्र इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन (एमआईडीसी) मुंबई-पुणे इंडस्ट्रियल कॉरिडोर, नए क्लस्टर आधारित औद्योगिक संप​त्तियों और सड़क एवं पोर्ट के करीब पीपीपी-आधारित विनिर्माण केंद्रों के माध्यम से औद्योगिकीकरण के अगले चरण को गति दे रहा है।

यही नहीं एमएमआरडीए 337 किलोमीटर के मेट्रो नेटवर्क, अलीबाग-विरार मल्टीमॉडल कॉरिडोर, बुलेट ट्रेन और मुंबई 3.0 और 4.0 के तहत नए विकास क्षेत्रों को विस्तार दे रहा है। इसका उद्देश्य मेट्रोपॉलिटन क्षेत्र में नए जमाने की नौकरियां और निवेश जोन बनाना है।

एमएसआरडीसी के लिए राजमार्ग अब आ​र्थिक विकास योजनाओं का सबसे बड़ा साधन हैं। मैनेजिंग डायरेक्टर अनिलकुमार गायकवाड़ ने कहा कि एमएसआरडीसी की स्थापना 1996 में प्रमुख सड़क परियोजनाओं को क्रियान्वित करने के लिए हुई थी, लेकिन समय के साथ इसकी भूमिका बढ़ती गई। मुंबई-पुणे एक्सप्रेसवे और बांद्रा-वर्ली सी लिंक जैसी शुरुआती बड़ी परियोजनाओं से इसका जोर राज्यव्यापी संपर्क पर हो गया है।

कुल 701 किलोमीटर लंबे हिंदू हृदयसम्राट बालासाहेब ठाकरे महाराष्ट्र समृद्धि महामार्ग का उल्लेख करते हुए गायकवाड़ ने कहा, ‘यहां 26 इंटरचेंज हैं। प्रत्येक इंटरचेंज लगभग 8,000 हेक्टेयर क्षेत्र से जुड़ा है।’ एमएसआरडीसी इनमें से 15 क्षेत्रों के लिए योजनाएं तैयार करने वाली एजेंसी होगा। कुल मिलाकर यह एजेंसी मुंबई, एमएमआर क्षेत्र, वधावन और आगामी इंटरनैशनल एयरपोर्ट के आसपास के बड़े क्षेत्रों सहित 7,000 वर्ग किलोमीटर से अधिक में विकास योजनाओं का खाका तैयार कर रही है।

सीआईडीसीओ के प्रबंध निदेशक विजय सिंघल ने महाराष्ट्र के आ​र्थिक विकास पर प्रकाश डालते हुए कहा कि देश के निर्यात और औद्योगिक उत्पादन में राज्य की हिस्सेदारी लगभग 15 प्रतिशत है। इसी के साथ एफडीआई में 31 प्रतिशत और डेटा सेंटर क्षमताओं में लगभग 70 प्रतिशत हिस्सा भी राज्य का है।

सीआईडीसीओ की सबसे बड़ी परियोजना नवी मुंबई इंटरनैशनल एयरपोर्ट से इस एजेंसी की कार्यान्वयन क्षमता का पता चलता है। सिंघल ने कहा, ‘जब हमने एक साल पहले घोषणा की थी कि यह हवाई अड्डा आठ महीनों में पूरा हो जाएगा, तो किसी को विश्वास नहीं हो रहा था।’

दिसंबर 2025 से शुरू होकर एयरपोर्ट ने पहले ही 25,000 करोड़ रुपये के फेडएक्स हब सहित बड़े कार्गो निवेश को आकर्षित किया है। जल्द ही यहां अंतरराष्ट्रीय उड़ानों का संचालन शुरू हो जाएगा। दो रनवे, चार टर्मिनल और 9 करोड़ यात्रियों की क्षमता के साथ मुंबई अब दो इंटरनैशनल एयरपोर्ट वाले वैश्विक शहरों के छोटे समूह में शामिल हो गया है।

एमआईडीसी पूरे राज्य में औद्योगिक विस्तार कर रही है। संयुक्त सीईओ कुणाल खेमनार ने कहा कि 2030 तक 1 लाख करोड़ डॉलर की अर्थव्यवस्था बनने के महाराष्ट्र के लक्ष्य को हासिल करने में औद्योगिक वृद्धि महत्त्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। उन्होंने कहा, ‘हमारे पास पूरे राज्य में 300 से अधिक औद्योगिक क्षेत्र हैं।’ उन्होंने यह भी विस्तार से समझाया कि संतुलित और न्यायसंगत विकास में इस एजेंसी की भूमिका कैसी है।

क्षेत्रीय स्तर पर मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन डेवलपमेंट अथॉरिटी (एमएमआरडीए) इन एजेंसियों की विकास पहलों में हाथ बंटाता है। मुख्य निवेश और योजना अ​धिकारी शंकर देशपांडे ने बताया कि मुंबई मेट्रोपॉलिटन रीजन अलग-अलग चार विकास परियोजनाओं पर एक साथ काम कर रहा है। पुराने शहर से लेकर एयरपोर्ट और पालघर-वधावन बेल्ट के पास उभरते क्षेत्रों में विकास गतिवि​धियां जोरों पर चल रही हैं।

First Published : February 19, 2026 | 10:50 PM IST