चीनी सीजन अपने आखिरी दौर में पहुंच गया है। मिलों में गन्ना पेराई का काम बंद होना शुरू हो गया है। महाराष्ट्र की 20 चीनी मिलों में पेराई का काम पूरी तरह खत्म हो चुका है। चालू सीजन में महाराष्ट्र देश का सबसे बड़ा चीनी उत्पादक राज्य होने का तमगा हासिल करते दिखाई दे रहा है। हालांकि राज्य के गन्ना किसानों का अभी भी चीनी मिलों पर 4,601 करोड़ बकाया है।
चालू चीनी वर्ष में राज्य का पेराई सीजन 15 मार्च खत्म होने का अनुमान है। लेकिन राज्य की 157 चीनी मिलों पर 15 फरवरी तक गन्ना किसानों का 4,601 करोड़ रुपये का गन्ने का उचित और लाभकारी मूल्य (एफआरपी) बकाया है। राज्य चीनी आयुक्तालय के मुताबिक महाराष्ट्र में पेराई कर रही 206 चीनी मिलों में से 157 मिलों ने 15 फरवरी तक के पूरी तरह से एफआरफी का भुगतान नहीं किया। राज्य की 49 मिलों ने 100 फीसदी भुगतान किया है। 58 मिलों ने 80 से 99.99 फीसदी, 58 मिलों ने 60 से 79.99 फीसदी और 41 मिलों ने 60 फीसदी से कम एफआरपी का भुगतान किया है।
ताजा आंकड़ों के मुताबिक किसानों का एफआरपी के तौर पर 33,697 करोड़ होता है जिसमें से चीनी मिलों ने 29,096 करोड़ रुपये एफआरपी के तौर दिये हैं जबकि 4,601 करोड़ रुपये का भुगतान बाकी है। आयुक्तालय के अधिकारियों का कहना है कि हम राज्य में अभी चल रही चीनी मिलों का डेटा इकट्ठा कर रहे हैं। मिलों को किसानों का एफआरपी भुगतान समय पर करने के निर्देश दिए गए हैं।
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महाराष्ट्र में चीनी मिलों ने गन्ना पेराई का काम समेटना शुरू कर दिया हैं। राज्य चीनी आयुक्तालय के मुताबिक, 15 फरवरी तक 20 चीनी मिलों ने पेराई बंद कर दिया है। 2025-26 सीजन में 210 चीनी मिलें गन्ना पेराई में शामिल हुई, जिसमें 103 सहकारी और 107 निजी मिलें थी। इन मिलों ने 960.79 लाख टन गन्ने की पेराई करके 89.84 लाख टन चीनी का उत्पादन किया। राज्य का औसत रिकवरी रेट 9.35 फीसदी है। जबकि 2024-25 सीजन में राज्य में चीनी का उत्पादन 85 लाख टन था और औसत रिकवरी 9.5 फीसदी थी। 2023-24 सीजन के दौरान, राज्य में 110 लाख टन चीनी का उत्पादन हुआ था।
देश के प्रमुख चीनी उत्पादक राज्य महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश और कर्नाटक में देश में उत्पादित कुल चीनी में से 87.48 फीसदी का उत्पादन हुआ है। नेशनल फेडरेशन ऑफ कोऑपरेटिव शुगर फैक्ट्रीज लिमिटेड (NFCSF) के ताजा आंकड़ों के मुताबिक महाराष्ट्र 89.80 लाख मीट्रिक टन चीनी के साथ सबसे बड़ा उत्पादक राज्य बनकर उभरा है, जो पिछले सीजन में इसी समय के 68.10 लाख मीट्रिक टन से ज्यादा है। राज्य ने 960.43 लाख मीट्रिक टन गन्ने की पेराई की है, जबकि पिछले साल राज्य में 740.22 लाख मीट्रिक टन गन्ना की पेराई हुई थी।
चालू सीजन में उत्तर प्रदेश 65.60 लाख मीट्रिक टन चीनी उत्पादन के साथ दूसरे नंबर पर है और कर्नाटक में 41.70 लाख मीट्रिक टन चीनी का उत्पादन के साथ तीसरे स्थान पर है। गुजरात, मध्य प्रदेश और तमिलनाडु जैसे राज्यों में भी पिछले साल की तुलना में चीनी उत्पादन बेहतर हुआ है। जिसके कारण इस साल देश में चीनी उत्पादन पिछले साल की अपेक्षा अधिक रहने वाला है।