GI-Tagged Salem Sago: भारत के भौगोलिक संकेतक (GI) उत्पादों को वैश्विक पहचान दिलाने की दिशा में बड़ा कदम उठाते हुए कृषि एवं प्रसंस्कृत खाद्य उत्पाद निर्यात विकास (APEDA) ने तमिलनाडु के सेलम से GI-टैग प्राप्त ‘सेलम साबूदाना’ की पहली सीधी निर्यात खेप कनाडा के लिए रवाना कराई। आधा टन की यह खेप सीधे GI अधिकृत संस्था सलेम स्टार्च एंड सैगो मैन्युफैक्चरर्स सर्विस इंडस्ट्रियल कोऑपरेटिव सोसाइटी लिमिटेड (SAGOSERVE) यानी सैगोसर्व द्वारा भेजी गई।
अब तक सेलम साबूदाना (Salem Sago) देश के विभिन्न राज्यों के व्यापारियों के जरिए विदेशों तक पहुंचता था, लेकिन पहली बार उत्पादक संस्था ने खुद अंतरराष्ट्रीय बाजार तक सीधा रास्ता बनाया है। पहले सेलम साबूदाना महाराष्ट्र, गुजरात, राजस्थान और पश्चिम बंगाल के व्यापारियों के जरिए अमेरिका, ब्रिटेन, कनाडा, वियतनाम और सिंगापुर जैसे देशों में जाता था, लेकिन यह पहली बार है जब उत्पादक संस्था ने सीधे निर्यात किया है। इस उपलब्धि को आगे बढ़ाने के लिए 18 फरवरी को निर्यात-उन्मुख कार्यक्रम भी आयोजित किया गया, जिसमें नए वैश्विक बाजारों की संभावनाएं तलाशने पर चर्चा हुई। सीधे निर्यात की इस पहल से खासतौर पर टैपिओका उगाने वाले किसानों और आदिवासी समुदायों की आय बढ़ने की उम्मीद है।
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334 सदस्य-निर्माताओं वाली सैगोसर्व संस्था किसानों और उत्पादकों के लिए विपणन, भंडारण, गुणवत्ता सुधार और आधुनिक प्रोसेसिंग सुविधाएं उपलब्ध कराती है। सेलम वर्षों से साबूदाने (sago) और स्टार्च उद्योग का अहम केंद्र रहा है। मार्च 2023 में GI टैग मिलने के बाद से इस पारंपरिक उत्पाद को वैश्विक बाजार में नई पहचान मिल रही है। देश में टैपिओका से बनने वाले साबूदाने का सबसे ज्यादा उत्पादन तमिलनाडु में होता है और साबूदाना टैपिओका की जड़ों से तैयार किया जाता है और भारत के कई हिस्सों में प्रमुख खाद्य सामग्री के रूप में उपयोग होता है।