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विदेश में भी चलेगा UPI? बड़ा कदम संभव

विदेश में भारतीय पर्यटकों को मिलेगा फायदा, सुरक्षा पर होगी कड़ी जांच

Last Updated- February 03, 2026 | 9:36 AM IST
UPI

चीन से ताल्लुक रखने वाली कंपनी ऐंट इंटरनैशनल का डिजिटल पेमेंट प्लेटफॉर्म अलीपे प्लस विदेश में लेनदेन के लिए भारत के यूनिफाइड पेमेंट्स इंटरफेस (यूपीआई) से जुड़ सकता है। दो सरकारी सूत्रों ने बताया कि भारत सरकार इस सिलसिले में ऐंट इंटरनैशनल से बात कर रही है।

बात बन गई तो सबसे ज्यादा फायदा भारतीय पर्यटकों को होगा। इसके बाद वे विदेश में उन व्यापारियों को यूपीआई के जरिये भुगतान कर पाएंगे, जो अलीपे प्लस के साथ जुड़े हैं। भारत सरकार और भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) के अधिकारियों की सिंगापुर मुख्यालय वाली ऐंट इंटरनैशनल के साथ बातचीत को चीन के साथ सुधरते रिश्तों का संकेत माना जा रहा है। ऐंट इंटरनैशनल की स्थापना चीन के दिग्गज समूह ऐंट ने की थी और अब यह स्वतंत्र रूप से काम कर रही है।

अलीपे प्लस की वेबसाइट के अनुसार कंपनी की सेवा इस्तेमाल करने वाले लोगों के 180 करोड़ से ज्यादा खाते 100 से ज्यादा बाजारों में 15 करोड़ से ज्यादा व्यापारियों से खरीदफरोख्त कर सकते हैं। एशिया, यूरोप, पश्चिम एशिया और लैटिन अमेरिका में कंपनी की अच्छी-खासी पैठ है।

भारत में यूपीआई हर जगह पहुंच चुका है और इस पर हर महीने तकरीबन 1,800 करोड़ लेनदेन होते हैं। सरकार और आरबीआई विदेश में भी इसका इस्तेमाल बढ़ाने की कोशिश में हैं ताकि भारतीय यात्री और प्रवासी भारतीय रुपये में लेनदेन कर सकें। इससे उनकी परेशानी कम होगी और विदेशी मुद्रा में भुगतान पर होने वाला बेजा खर्च भी बचेगा।

सूत्रों ने नाम बताने से इनकार कर दिया क्योंकि ऐंट इंटरनैशनल के साथ बातचीत को अभी सार्वजनिक नहीं किया गया है। वित्त मंत्रालय, रिजर्व बैंक और भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (एनपीसीआई) ने इस बारे में पूछे जाने पर तत्काल कोई टिप्पणी नहीं की। ऐंट इंटरनैशनल ने भी इस बारे में सवाल का जवाब नहीं दिया।

सरकारी सूत्रों ने यह भी कहा कि अलीपे को जुड़ने देने की इजाजत सुरक्षा पर विचार करने के बाद ही दी जाएगी। एक सूत्र ने कहा, ‘अलीपे की जड़ें चीन में ही हैं, इसलिए भू-राजनीतिक रुख या देश के डिजिटल ढांचे और डेटा की सुरक्षा की चिंता हो सकती है।’ 2020 में सीमा पर झड़प के बाद भारत ने चीन के निवेशकों पर सख्त पाबंदी और कायदे लागू कर दिए, जो अब भी चल रहे हैं।

संबंधों में गर्माहट

सीमा पर गतिरोध के बाद दोनों देशों के संबंधों में तनाव हो गया, जिससे उनके बीच पूंजी, प्रौद्योगिकी और प्रतिभा का आदान-प्रदान धीमा हो गया। चीन की कंपनियों या चीनियों के स्वामित्व वाली कंपनियों से हो रहे निवेश की जांच में भारत सख्ती बरतने लगा। इस कारण इलेक्ट्रिक कार उपक्रम में 100 करोड़ डॉलर के बीवाईडी के प्रस्तावित निवेश समेत कई सौदे अटक गए।

लेकिन अमेरिका ने पिछले साल भारत पर भारी शुल्क लगा दिए, जिसके बाद उसने चीन के साथ संबंधों को पटरी पर लाने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। प्रधानमंत्री सात साल बाद चीन यात्रा पर गए और वहां के राष्ट्रपति शी चिनफिंग से मुलाकात के दौरान दोनों देशों के संबंधों को बेहतर बनाने के तरीकों पर चर्चा की। भारत ने पिछले साल अक्टूबर में चीन के लिए सीधी वाणिज्यिक उड़ानें भी शुरू कर दीं, जो पांच साल से रुकी हुई थीं। साथ ही चीन के पेशेवरों के लिए वीजा के नियमों में भी ढील दे दी गई।

First Published - February 3, 2026 | 9:24 AM IST

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