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कर्नाटक के सब्जीवाले को 29 लाख का GST नोटिस, सिर्फ UPI से 4 साल में 1 करोड़ 63 लाख का लेनदेन  

जीएसटी विभाग ने उन्हें नोटिस भेजते हुए कहा, “आपने पिछले चार वर्षों में ₹1.63 करोड़ का लेनदेन किया है, जिसके लिए आपको ₹29 लाख जीएसटी अदा करना होगा।”

Last Updated- July 21, 2025 | 7:30 PM IST
vegetable prices
प्रतीकात्मक तस्वीर

डिजिटल भुगतान से कारोबार करना अब हर किसी के लिए आसान नहीं रहा। कर्नाटक के हावेरी जिले के एक छोटे सब्ज़ी विक्रेता को ₹29 लाख का जीएसटी नोटिस मिला है, जिससे न सिर्फ वह परेशान हैं, बल्कि उन्होंने अब यूपीआई के जरिए भुगतान लेना पूरी तरह बंद कर दिया है। उन्होंने अब ग्राहकों से केवल नकद भुगतान लेना शुरू कर दिया है।

शंकरगौड़ा हडिमानी, जो हावेरी में म्युनिसिपल हाई स्कूल मैदान के पास अपनी छोटी सी दुकान चलाते हैं, को यह नोटिस तब मिला जब जीएसटी अधिकारियों ने उनके पिछले चार वर्षों में किए गए डिजिटल लेनदेन की जांच की।

कैसे आया GST Officials की नजर में – 

Deccan Herald की रिपोर्ट के अनुसार, शंकरगौड़ा ने चार सालों में कुल ₹1.63 करोड़ का डिजिटल लेनदेन किया था, जिसमें अधिकांश भुगतान यूपीआई और डिजिटल वॉलेट्स के माध्यम से किए गए। इस आधार पर जीएसटी विभाग ने उन्हें नोटिस भेजते हुए कहा, “आपने पिछले चार वर्षों में ₹1.63 करोड़ का लेनदेन किया है, जिसके लिए आपको ₹29 लाख जीएसटी अदा करना होगा।”

वहीं सब्जी विक्रेता शंकरगौड़ा कहते हैं, “मैं किसानों से सब्ज़ियां खरीदकर अपनी दुकान पर बेचता हूं। ग्राहक आजकल यूपीआई से भुगतान करना पसंद करते हैं। मैंने हर साल आयकर रिटर्न (ITR) दाखिल किया है, मेरे पास सभी रिकॉर्ड हैं। फिर भी मुझे ₹29 लाख का नोटिस दे दिया गया है। मैं इतना पैसा कहां से लाऊं?”

क्या सब्ज़ियों पर लगता है जीएसटी?

भारत में ताज़ी और बिना प्रसंस्कृत सब्ज़ियों पर कोई जीएसटी नहीं लगता, यानी इन पर 0% टैक्स है। यह छूट किसानों और खुदरा विक्रेताओं — दोनों के लिए लागू होती है। हालांकि, यदि सब्ज़ियां सूखी, पैक की गईं, लेबल लगी हों या प्रसंस्कृत हों, तो उन पर 5% से लेकर 12% तक जीएसटी लागू हो सकता है। इस मामले में, शंकरगौड़ा केवल ताज़ी सब्ज़ियां बेचते हैं, जिन्हें वह सीधे किसानों से खरीदते हैं। ऐसे में उन पर जीएसटी लागू नहीं होना चाहिए।

छोटे कारोबारियों के लिए टैक्स नियम क्या कहते हैं?

  • यदि किसी छोटे व्यापारी की सालाना आय ₹2.5 लाख से अधिक है, तो उसे आयकर रिटर्न दाखिल करना अनिवार्य है। 
  • ₹50 लाख तक सालाना टर्नओवर वाले छोटे कारोबारी प्रेसम्प्टिव टैक्सेशन योजना (ITR-4 Sugam) का उपयोग कर सकते हैं, जिससे उन्हें केवल अनुमानित मुनाफा घोषित करना होता है। 
  • आईटीआर दाखिल करने की अंतिम तिथि इस साल (वित्त वर्ष 2024-25) के लिए 15 सितंबर 2025 है (यदि ऑडिट की आवश्यकता नहीं है)। 

क्या कहते है टैक्स एक्सपर्ट ?

कर विशेषज्ञों के अनुसार, सिर्फ डिजिटल लेनदेन की राशि के आधार पर जीएसटी लागू नहीं किया जा सकता, खासकर जब व्यापार जीएसटी-मुक्त वस्तुओं का हो। उन्होंने कहा कि विभाग को यह जांचना चाहिए कि बिक्री किस वस्तु की थी, न कि केवल लेनदेन की रकम देखकर नोटिस भेज देना चाहिए।

शंकरगौड़ा ने विभाग से न्याय की गुहार लगाई है और कहा कि वह केवल सब्ज़ियां बेचते हैं, जो जीएसटी के दायरे में नहीं आतीं। उन्होंने बताया कि उनके पास आयकर रिटर्न, लेनदेन के रिकॉर्ड और बैंक स्टेटमेंट्स मौजूद हैं, जिनसे यह साबित किया जा सकता है कि उनका व्यापार जीएसटी मुक्त है।

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First Published - July 21, 2025 | 7:14 PM IST

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