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यूपी में बिजली उपभोक्ताओं को झटका, ज्यादा देना पड़ सकता है बिल

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Last Updated- January 09, 2023 | 11:17 PM IST
electricity consumption

उत्तर प्रदेश में उपभोक्ताओं को नए साल में बिजली जोर का झटका देने वाली है। राज्य विद्युत नियामक आयोग में सोमवार को बिजली कंपनियों की ओर से वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) और बिजली दरों को लेकर प्रस्ताव पेश किया गया है।

बिजली कंपनियों की ओर से पेश प्रस्ताव में शहरी घरेलू उपभोक्ताओं के लिए सबसे ज्यादा 18 से 23 फीसदी वृद्धि की बात कही गई है जबकि उद्योगों के लिए बिजली 16 फीसदी तक महंगी हो सकती है। कंपनियों नें जो प्रस्ताव दिए हैं उसके मुताबिक कृषि क्षेत्र के लिए भी बिजली दरें 10 से 12 फीसदी तक बढ़ाई जाएंगी। कम उपभोग करने वाले घरेलू लाइफ लाइन उपभोक्ताओं की बिजली दरों में 17 फीसदी की वृद्धि प्रस्तावित है।

प्रदेश की सभी बिजली कंपनियों की तरफ से आज अलग-अलग विद्युत नियामक आयोग में औसत कुल 15.85 फीसदी बिजली दरों में भारी वृद्धि का बिजली दर प्रस्ताव व वार्षिक राजस्व आवश्यकता वर्ष 2023-24 के लिए दाखिल कर दी गई है। इसमें घरेलू उपभोक्ताओं की बिजली दरों में लगभग 18 से 23 फीसदी तक वृद्धि प्रस्तावित की गई है।

सोमवार को दाखिल सभी बिजली कंपनियों की वार्षिक राजस्व आवश्यकता लगभग 92,547 करोड रुपये है, वहीं वितरण हानियां 14.9 फीसदी है। प्रस्ताव के मुताबिक वर्ष 2023-24 में राजस्व की आवश्यकता व प्राप्ति के बीच का अंतर 9,140 करोड़ रुपये है। इस अवधि में जो कुल बिजली खरीद अनुमानित की गई है वह लगभग 1,34,751 करोड़ रुपये है।

दाखिल प्रस्ताव के मुताबिक 150 यूनिट प्रतिमाह बिजली का उपभोग करने वाले शहरी घरेलू उपभोक्ताओं को अब 5.50 रुपये प्रति यूनिट की जगह 6.50 रुपये देने होंगे। वहीं 151 से 300 यूनिट उपभोग पर 6 रुपये की जगह 7 रुपये प्रति यूनिट देने होंगे।

शहरी घरेलू उपभोक्ताओं को प्रतिमाह 300 यूनिट से ज्यादा उपभोग पर 6.50 रुपये की जगह 8 रुपये देने होंगे। कृषि क्षेत्र के लिए बिजली की दर में 20 पैसे प्रति यूनिट का इजाफा प्रस्तावित है। ग्रामीण क्षेत्रों के घरेलू उपभोक्ताओं के लिए भी एक रुपये से 1.50 रुपये तक की वृद्धि प्रस्तावित है।

यह भी पढ़ें: 2025 महाकुंभ से पहले UPSRTC के बेड़े में शामिल होंगी 5000 नई बसें

बिजली दरों में प्रस्तावित वृद्धि का विरोध करते हुए राज्य उपभोक्ता परिषद ने विद्युत नियामक आयोग के चेयरमैन व सदस्य से मुलाकात कर उन्हें याचिका सौंपी है। परिषद अध्यक्ष अवधेश वर्मा का कहना है कि उपभोक्ताओं का बिजली कंपनियों पर 25,133 करोड़ रुपये बकाया निकल रहा है। इस दशा में कुल बिजली दरों में 35 फीसदी अथवा अगले 5 वर्षों तक प्रत्येक वर्ष 7 फीसदी तक की कमी की जाये।

उन्होंने कहा कि प्रदेश की बिजली कंपनियों द्वारा घरेलू विद्युत उपभोक्ताओं की बिजली दरों में भारी बढ़ोतरी का प्रस्ताव दिया गया है जिसका उपभोक्ता परिषद हर स्तर पर विरोध करेगा। वर्मा का कहना है कि पावर कॉरपोरेशन ने किसानों की बिजली दरों में भी 10 से 12 फीसदी तक वृद्धि प्रस्तावित की है जो अपने आप में चौंकाने वाला मामला है।

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First Published - January 9, 2023 | 7:57 PM IST

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