Dry day today on Gandhi Jayanti: आज देश अपने राष्ट्रपिता महात्मा गांधी को उनकी 154वीं जयंती पर याद कर रहा है। आज सुबह-सुबह प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी राजघाट पहुंचे और बापू को श्रद्धांजलि दी। पीएम के अलावा राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और उपराष्ट्रपित जगदीप धनखड़, कांगेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे, लोकसभा स्पीकर ओम बिरला सहित तमाम नेताओं ने बापू को श्रद्धांजलि दी। देश सिर्फ बापू को याद ही नहीं कर रहा बल्कि उनके दिखाए राह पर चलने का पूरा प्रयास भी कर रहा है।
गांधी जयंती पर शराबबंदी (ड्राई-डे) ऐसा ही एक कदम है। 2 अक्टूबर को, बार, होटल, शराब की दुकानें, थोक डीलर और यहां तक कि कैसीनो सहित सभी लाइसेंस प्राप्त संस्थाओं को शराब बेचने से प्रतिबंधित कर दिया गया है। सरकार दशकों से Dry Day की नीति का पालन कर रही है।
ड्राई डे का मतलब शराब की बिक्री पर प्रतिबंध से है। चूंकि शराब की बिक्री राज्य का विषय है, इसलिए पूरे देश में शराबबंदी के कानून अलग-अलग हैं। उदाहरण के लिए, दिल्ली सरकार तीन राष्ट्रीय छुट्टियों गणतंत्र दिवस, गांधी जयंती और स्वतंत्रता दिवस पर शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगाती है। इसके अलावा, राजधानी दिल्ली कई अन्य महत्वपूर्ण धार्मिक दिनों को भी ड्राई-डे के रूप में सूचीबद्ध करती है। दिल्ली सरकार के उत्पाद शुल्क विभाग के मुताबिक, इसमें राम नवमी, गुरु रवि दास जयंती, होली आदि शामिल हैं।
दूसरी ओर, गुजरात और बिहार जैसे राज्य हैं जो अपने अधिकार क्षेत्र में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हैं। इसके विपरीत, हरियाणा एकमात्र ऐसा राज्य है जहां केवल एक ड्राई-डे है। स्वतंत्रता दिवस और गणतंत्र दिवस पर भी हरियाणा सरकार शाम 5 बजे के बाद शराब की बिक्री की अनुमति देती है। हालांकि, राज्य में गांधी जयंती पर शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध होता है।
गुजरात में 1960 से शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा हुआ है। गुजरात के अलावा, बिहार ने अप्रैल 2016 में शराब की बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया और यह प्रतिबंध आज भी जारी है।
मिजोरम भी ड्राई स्टेट में शामिल है, यहां की राज्य सरकार ने 2019 में शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा दिया था। उत्तर पूर्व के एक अन्य राज्य, नागालैंड ने भी 1989 से शराब की बिक्री पर प्रतिबंध लगा रखा है।
शराब पर गांधी जी के दर्शन और विचारों को उजागर करने के लिए गांधी जयंती पर शराब की बिक्री प्रतिबंधित है। महात्मा गांधी शराब सेवन के विरोधी थे। उन्होंने कहा था, “शराब और नशीली पदार्थों की बुराई कई मायनों में मलेरिया आदि से होने वाली बुराई से कहीं ज्यादा बदतर है; क्योंकि, जहां ये केवल शरीर को नुकसान पहुंचाती है, वहीं ये शरीर और आत्मा दोनों को नुकसान पहुंचाती है।”
वर्ष 1947 में आजादी मिलने के बाद, संविधान में राज्य नीति के निदेशक सिद्धांतों (डीपीएसपी) में शराब पर प्रतिबंध शामिल था। बता दें कि इन नीतियों को अदालत में जाकर लागू नहीं करवाया जा सकता है, मगर यह देश के लिए एक गाइडलाइन के रूप में कार्य करती हैं।