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1901 के बाद 2025 रहा देश का आठवां सबसे गर्म साल: IMD

IMD की रिपोर्ट के मुताबिक 2025 में औसत तापमान सामान्य से 0.28 डिग्री सेल्सियस ज्यादा रहा, चरम मौसम घटनाओं में 2,760 लोगों की मौत

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संजीब मुखर्जी   
Last Updated- January 02, 2026 | 9:10 AM IST

IMD 2025 Weather: भारतीय मौसम विज्ञान विभाग (आईएमडी) ने आज बताया कि वर्ष 2025, 1901 के बाद से देश के लिए आठवां सबसे गर्म वर्ष रहा है। इस दौरान सामान्य से अधिक यानी कुल 11 चक्रवाती दबाव बने जबकि आमतौर पर इनकी संख्या छह होती है। मौसम की अतियों के कारण 2,760 लोगों को जान गंवानी पड़ी। इनमें से 1,317 मौतें बिजली गिरने तथा आंधी-तूफान के कारण हुईं।

जनवरी से मार्च 2026 के लिए मौसमी वर्षा पूर्वानुमान और जनवरी 2026 के लिए तापमान पूर्वानुमान और वर्ष 2025 में भारत की जलवायु संबंधी रिपोर्ट जारी करते हुए, IMD के महानिदेशक मृत्युंजय महापात्र ने कहा कि वर्ष 2025 में पूरे भारत का वार्षिक औसत स्थलीय तापमान 1991–2020 के दीर्घकालीन औसत से 0.28 डिग्री सेल्सियस अधिक रहा।

महापात्र ने कहा, ‘इसके चलते 2025, 1901 में तापमान को दर्ज किए जाने की शुरुआत के बाद से आठवां सबसे गर्म वर्ष बन गया। अब तक दर्ज सबसे अधिक गर्म वर्ष 2024 है। उस वर्ष पूरे देश के तापमान में दीर्घकालिक औसत से 0.65 डिग्री सेल्सियस की बढ़ोतरी हुई थी।’

1901 के बाद के सबसे गर्म पांच साल बीते 16 वर्षों में हुए हैं। इससे साफ होता है कि देश के मौसम पर जलवायु परिवर्तन का असर बढ़ रहा है। मौसम विभाग ने कहा कि 2025 में देश में 11 चक्रवाती बने। इसके अलावा बादल फटने, भारी बारिश, बाढ़, भूस्खलन, बिजली गिरने तथा आंधी तूफान जैसी अतिरंजित मौसम वाली घटनाएं भी घटित हुईं।

महापात्र ने कहा कि वर्ष 2025 में देशभर में विभिन्न चरम मौसम घटनाओं के कारण लगभग 2,760 मौतें दर्ज की गईं। इनमें उत्तर प्रदेश में बिजली गिरने, आंधी-तूफान, भारी वर्षा, बाढ़, लू और शीत लहर के कारण 410 से अधिक मौतें हुईं। इसके बाद मध्य प्रदेश रहा, जहां बिजली गिरने, आंधी-तूफान, भारी वर्षा, बाढ़, तेज हवाओं और लू के कारण 350 से अधिक मौतें दर्ज की गईं। महाराष्ट्र में 270 से अधिक मौतें हुईं और झारखंड में 200 से अधिक मौतें दर्ज की गईं।

जनवरी से मार्च 2026 तक के मौसम के बारे में उन्होंने कहा कि इस अवधि में पश्चिमोत्तर भारत यानी जम्मू और कश्मीर, हिमाचल प्रदेश, उत्तराखंड, लद्दाख, पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश में सामान्य से कम बारिश होने की उम्मीद है। यह दीर्घकालीन औसत के 86 फीसदी तक रह सकती है। 1971 से 2020 के बीच इन इलाकों में दीर्घकालिक बारिश का औसत 184.3 मिलीमीटर रहा है।

उन्होंने कहा, ‘इसका रबी की फसल पर कुछ असर हो सकता है। बारिश लाभप्रद हो सकती है लेकिन उत्तर भारत के अधिकांश इलाके सिंचित हैं और जलाशय तथा अन्य जल प्रणालियां अच्छे मॉनसून के कारण लबालब हैं।’ IMD ने कहा कि अकेले जनवरी 2026 में पश्चिमोत्तर और पूर्वोत्तर भारत को छोड़ दें तो देश के अधिकांश हिस्सों में मासिक न्यूनतम तापमान सामान्य से कम रह सकता है। इतना ही नहीं जनवरी 2026 में मध्य भारत के कुछ इलाकों में शीत लहर की भी आशंका है। पूर्वी उत्तर प्रदेश और बिहार इससे खासतौर पर प्रभावित हो सकते हैं।

First Published : January 2, 2026 | 8:56 AM IST