facebookmetapixel
Advertisement
होराइजन इंडस्ट्रियल पार्क्स आईपीओ आज से खुला, ₹2600 जुटाने का प्लान, निवेश करें या छोड़ दें?फेड से राहत की उम्मीद ने बढ़ाई सोने-चांदी की चमक, MCX पर दोनों के भाव चढ़ेसरकारी बैंकों के लिए सुधारों का नया खाका, ‘विकसित भारत’ के बैंकिंग रोडमैप पर होगा मंथनL&T का बड़ा डिफेंस प्लान! रडार से लेजर हथियार तक बढ़ाएगी ताकत, इलेक्ट्रॉनिक्स में ₹5,000 करोड़ निवेश की तैयारीFY27 की पहली तिमाही में बुकिंग घटी, DLF की बिक्री 94% लुढ़की; जानिए किस कंपनी ने मारी बाजीPM सूर्य घर में बड़े बदलाव की तैयारी! रूफटॉप सोलर के साथ बैटरी स्टोरेज जोड़ने का सुझावMuthoot FinCorp Q1 Result: मुथूट फिनकॉर्प की कमाई में बंपर उछाल, मुनाफा 3 गुना बढ़ा; IPO से जुटाने की तैयारी ₹3,000 करोड़Opening Bell: शेयर बाजार में गिरावट! Sensex 200 अंक टूटा; Nifty 24,300 के करीब; PSU बैंक शेयरों में दबावEV खरीदने वालों की कतार लंबी! जुलाई में इलेक्ट्रिक दोपहिया की बिक्री 88% बढ़ी, कंपनियां मांग पूरी करने में नाकामStocks to Watch Today: रिलायंस-रोल्स रॉयस की बड़ी डील से लेकर BEML के ऑर्डर तक, आज इन शेयरों में दिख सकता है एक्शन

जल्द सस्ते होंगे होम और कार लोन? RBI की मॉनेटरी पॉलिसी पर आई बड़ी रिपोर्ट

Advertisement

पिछले कुछ सालों में ऊंची महंगाई ने RBI को सख्त कदम उठाने पर मजबूर किया था।

Last Updated- March 27, 2025 | 6:05 PM IST
Loan

भारत की अर्थव्यवस्था को रफ्तार देने के लिए रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया (RBI) अगले महीने अपनी नीतिगत ब्याज दर (रेपो रेट) में 0.25% की कटौती कर सकता है। यह अनुमान इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च (Ind-Ra) ने अपनी ताजा रिपोर्ट में लगाया है। एजेंसी का कहना है कि वित्तीय वर्ष 2025-26 (FY26) में RBI कुल 0.75% तक की कटौती कर सकता है, बशर्ते महंगाई काबू में रहे और वैश्विक चुनौतियां न बढ़ें।

क्यों जरूरी है दरों में कटौती?

रेपो रेट वह ब्याज दर है, जिस पर RBI बैंकों को कर्ज देता है। इसे कम करने से बैंक सस्ते कर्ज दे पाते हैं, जिससे लोग और कंपनियां ज्यादा खर्च और निवेश करते हैं। इससे अर्थव्यवस्था में तेजी आती है। Ind-Ra के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत ने कहा, “हमें उम्मीद है कि FY25 में महंगाई 4.7% तक सिमट जाएगी। ऐसे में RBI के पास दरें घटाने का मौका है, लेकिन FY26 में यह कटौती 0.75% तक सीमित रह सकती है।”

हालांकि, अगर अमेरिका ने आयात पर भारी टैरिफ लगाए और इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ा, तो RBI इससे भी ज्यादा कटौती कर सकता है। टैरिफ से निर्यात प्रभावित हो सकता है, जिसे संभालने के लिए सस्ते कर्ज जरूरी होंगे।

महंगाई का घटता दबाव

पिछले कुछ सालों में ऊंची महंगाई ने RBI को सख्त कदम उठाने पर मजबूर किया था। मई 2022 से फरवरी 2023 के बीच रेपो रेट 2.5% बढ़ाकर 6.5% तक पहुंच गया था। लेकिन अब हालात बदल रहे हैं। Ind-Ra का अनुमान है कि जनवरी-मार्च 2025 में महंगाई 4% से नीचे आ सकती है। यह पिछली 21 तिमाहियों में पहली बार है। फरवरी 2025 में RBI ने रेपो रेट 0.25% घटाकर 6.25% कर दिया था, जो इस बदलाव का संकेत है।

FY26 में क्या होगा?

Ind-Ra को उम्मीद है कि अप्रैल 2025 से शुरू होने वाले वित्तीय साल में RBI तीन बार दरें कम करेगा और यह कुल 0.75% तक होगा। फरवरी 2025 की कटौती जोड़ें, तो कुल 1% की कमी होगी और रेपो रेट 5.5% पर पहुंच जाएगा। अगर महंगाई 4% के आसपास रही, तो वास्तविक ब्याज दर (महंगाई घटाकर) 1.5% होगी, जो अर्थव्यवस्था के लिए संतुलित मानी जाती है।

RBI का अगला कदम कब?

RBI की मौद्रिक नीति समिति (MPC) FY26 में 6 बार मीटिंग करेगी। पहली मीटिंग 7-9 अप्रैल 2025 को होगी, जहां Ind-Ra को 0.25% कटौती की उम्मीद है। फरवरी 2025 की बैठक के मिनट्स बताते हैं कि RBI को अर्थव्यवस्था की सुस्ती की चिंता है। ऐसे में महंगाई को काबू में रखते हुए ग्रोथ को सपोर्ट करना उसकी प्राथमिकता होगी।

आम लोगों के लिए क्या मतलब?

  • कर्ज लेने वालों के लिए: सस्ते लोन से EMI का बोझ कम हो सकता है।
  • उद्यमियों के लिए: कारोबार बढ़ाने के लिए कर्ज आसान और सस्ता होगा।
  • खरीदारों के लिए: महंगाई कम रहने से जेब पर दबाव कम पड़ेगा।

कुल मिलाकर, Ind-Ra का मानना है कि घटती महंगाई और सुस्त पड़ती ग्रोथ के बीच RBI अगले साल ब्याज दरों में कटौती का रास्ता अपनाएगा। अप्रैल 2025 से शुरू होकर यह सिलसिला FY26 तक चल सकता है, जिससे रेपो रेट 5.5% तक पहुंच जाए। लेकिन अगर अमेरिका के टैरिफ जैसे वैश्विक झटके आए, तो RBI को और बड़े कदम उठाने पड़ सकते हैं। यह सब महंगाई और ग्रोथ के बीच संतुलन का खेल है, और RBI इस पर पूरी नजर रखे हुए है।

Advertisement
First Published - March 27, 2025 | 5:57 PM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement