facebookmetapixel
PhonePe IPO को मिली SEBI की मंजूरी, कंपनी जल्द दाखिल करेगी अपडेटेड DRHPBudget 2026: क्या इस साल के बजट में निर्मला सीतारमण ओल्ड टैक्स रिजीम को खत्म कर देगी?Toyota ने लॉन्च की Urban Cruiser EV, चेक करें कीमत, फीचर्स, डिजाइन, बैटरी, बुकिंग डेट और अन्य डिटेलसोना-चांदी ने तोड़े सारे रिकॉर्ड, गोल्ड पहली बार ₹1.5 लाख के पार, चांदी ₹3.30 लाख के करीबPSU Bank Stock: लंबी रेस का घोड़ा है ये सरकारी शेयर, ब्रोकरेज ने ₹150 तक के दिये टारगेटबैंकिंग सेक्टर में बदल रही हवा, मोतीलाल ओसवाल की लिस्ट में ICICI, HDFC और SBI क्यों आगे?Suzlon Energy: Wind 2.0 से ग्रोथ को लगेंगे पंख! मोतीलाल ओसवाल ने कहा- रिस्क रिवार्ड रेश्यो बेहतर; 55% रिटर्न का मौका₹12.80 से 21% फिसला वोडाफोन आइडिया का शेयर, खरीदें, होल्ड करें या बेचें?Q3 नतीजों के बाद Tata Capital पर मेहरबान ब्रोकरेज, टारगेट बढ़ाया, शेयर नई ऊंचाई परSuzlon 2.0: विंड एनर्जी से आगे विस्तार की तैयारी, EV और AI भी हो सकते हैं पूरी तरह ग्रीन

अमेरिकी फेडरल रिजर्व की चाल पर शेयर कीमतों में बदलाव

Last Updated- December 12, 2022 | 2:37 AM IST

आंकड़ों से पता चलता है कि शेयर बाजारों में आई तेजी का संबंध अमेरिकी फेडरल रिजर्व की बैलेंस शीट (अर्थव्यवस्था में पूंजी प्रवाह के उतार-चढ़ाव से संबंधित) के आकार से जुड़ा हुआ है।
दुनियाभर के प्रमुख इक्विटी सूचकांक (सेंसेक्स और निफ्टी-50 समेत) मार्च 2020 के अपने निचले स्तरों से करीब दोगुने हो चुके हैं और इनका संबंध अमेरिकी फेडरल की बैलेंस शीट में उतार-चढ़ाव और वैश्विक वित्तीय बाजारों में तरलता से रहा है।
उदाहरण के लिए, दुनिया का सबसे ज्यादा कारोबार वाला इक्विटी इंडेक्स एसऐंडपी सूचकांक कैलेंडर वर्ष 2021 की शुरुआत से 16 प्रतिशत चढ़ा है, जो अमेरिकी फेड की बैलेंस शीट में 12 प्रतिशत की वृद्घि के आसपास है। भारतीय बाजार और अमेरिकी फेडरल बैलेंस शीट के बीच सह-संबंध अभी तक काफी मजबूत बना हुआ है। निफ्टी-50 इस साल अब तक 14 प्रतिशत तक जबकि बीएसई का सेंसेक्स 11 प्रतिशत तक चढ़ा है।
महामारी फैलने के बाद से, अमेरिकी फेडरल की बैलेंस शीट मार्च 2020 के 4.2 लाख करोड़ डॉलर से 76 प्रतिशत बढ़कर बुधवार को 8.2 लाख करोड़ डॉलर पर पहुंच गई।
समान अवधि में, एसऐंडपी 500 में 90 प्रतिशत की तेजी आई, जबकि डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज 83 प्रतिशत चढ़ा। भारत में सेंसेक्स मार्च 2020 के अपने निचले स्तरों से करीब दोगुना हुआ है, जबकि निफ्टी में 110 प्रतिशत की तेजी आई है।
जेएम फाइनैंशियल इंस्टीट्यूशनल सिक्योरिटीज के प्रबंध निदेश्खक एवं मुख्य रणनीतिकार धनंजय सिन्हा का कहना है, ‘इक्विटी बाजारों में कॉरपोरेट आय के मुकाबले तरलता ज्यादा महत्वपूर्ण कारक है। आर्थिक गतिविधि में अनुरूप वृद्घि के बगैर वैश्विक पूंजी की आपूर्ति में अप्रत्याशित तेजी आई थी। इससे अत्यधिक तरलता की स्थिति पैदा हुई और इक्विटी समेत परिसंपत्ति बाजारों में इसका असर दिखा।’
 उदाहरण के लिए, अमेरिकी फेडरल ने मार्च से भारी मौद्रिक वृद्घि के बाद पिछले साल जून और जुलाई में अपनी बैलेंस शीट में कमी की थी। इसकी वजह से शेयर में गिरावट और बाजार अस्थिरता को बढ़ावा मिला। इक्विटी कीमतों में वैश्विक तेजी सितंबर 2020 में पुन: दिखी, जब अमेरिकी फेडरल ने अपनी बैलेंस शीट का विस्तार फिर से शुरू किया था।
विश्लेषकों का कहना है कि इक्विटी बाजारों और अमेरिकी फेडरल बैलेंस शीट का आपसी संबंध है। यह संबंध फेडरल रिजर्व के बॉन्ड खरीदारी कार्यक्रम से जुड़ा हुआ है जिससे ब्याज दरें नीचे बनाए रखने और इक्विटी बाजारों के लिए तरलता प्रदान करने में मदद मिलती है।
मौजूदा समय में, अमेरिकी फेडरल रिजर्व विभिन्न तरह के बॉन्डों (मॉर्गेज संबंधित प्रतिभूतियों समेत) की खरीदारी के जरिये प्रति महीने करीब 120 अरब डॉलर की दर पर अपनी बैलेंस शीट का विस्तार कर रहा है।
अमेरिकी फेड की बैलेंस शीट में बदलावों के लिए बाजार की संवेदनशीलता ने हालांकि बॉन्ड खरीदारी कार्यक्रम में संभावित नरमी को प्रभावित किया है और इसके परिणामस्वरूप बैलेंस शीट में ठहराव या कमजोरी भी आई है।
सिन्हा का कहना है, ‘अमेरिकी फेड की आसान मौद्रिक नीति ने अब अमेरिकी आवासीय बाजार में गर्माहट ला दी है और मकानों की कीमतें तेजी से बढ़ रही हैं। इसके अलावा बढ़ती मुद्रास्फीति से भी अमेरिकी फेड के लिए बॉन्ड खरीदारी कार्यक्रम में नरमी लाने का दबाव पड़ रहा है।’
पिछले समय में, वर्ष 2015 और 2018 में शेयर कीमतों में बड़ी गिरावट आई थी, जब अमेरिकी फेड ने अपने बॉन्ड खरीदारी कार्यक्रम को पूरा करने के लिए समान प्रयास किया था।

First Published - July 18, 2021 | 11:26 PM IST

संबंधित पोस्ट