वित्त-बीमा

वसूली एजेंट करेंगे परेशान तो बैंकों का भी होगा नुकसान

भारतीय रिजर्व बैंक के नए मसौदे में कॉल टाइमिंग, शिकायत पर वसूली रोकने और डेटा सुरक्षा के स्पष्ट नियम

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संजीव सिन्हा   
Last Updated- February 23, 2026 | 8:35 AM IST

भारतीय रिजर्व बैंक ने कर्ज की जबरन वसूली पर लगाम कसने और बैंकों, गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियों (एनबीएफसी) तथा अपने दायरे में आने वाली दूसरी संस्थाओं के लिए एक जैसे पैमानों का मसौदा तैयार किया है। पिछले कुछ सालों से कर्ज की वसूली करने वाले एजेंटों के गलत तौर-तरीकों की काफी आलोचना होती रही है। इसीलिए वसूली एजेंटों पर सख्ती से नजर रखकर, कर्जदार की गोपनीयता को डिजिटल निजी डेटा संरक्षण (डीपीडीपी) अधिनियम, 2023 की तर्ज पर सुरक्षित कर और स्पष्ट संवाद तथा शिकायत निवारण को अनिवार्य बनाकर रिजर्व बैंक पूरी व्यवस्था में अधिक जवाबदेही सुनिश्चित करने का संकेत दे रहा है।

वसूली ढांचे का विस्तार

सही तरीके से वसूली को लंबे समय से अनिवार्य कर दिया गया है मगर इन नियमों की बारीकियां पहले प्रमुख बैंकों और आवास वित्त कंपनियों (एचएफसी) पर ही लागू होती थीं। छोटी एनबीएफसी, सहकारी बैंक और ग्रामीण क्षेत्रीय बैंक मोटे सिद्धांतों पर ही चलते थे। करंजावाला ऐंड कंपनी के पार्टनर डेजिग्नेट विशाल गेहराना कहते हैं, ‘निर्देशों के मसौदे में सभी ऋणदाताओं के लिए एकसमान और व्यावहारिक पैमाने दिए गए हैं। अब संस्था कोई भी हो, न्यूनतम सुरक्षा तो मिलेगी ही। रिजर्व बैंक नियामकीय खामियों को पाट रहा है और पूरी प्रणाली में जवाबदेही बढ़ा रहा है।’

बोर्ड की जिम्मेदारी

मसौदे के मुताबिक वसूली पर अब बोर्ड की नजर रहेगी, जिसके लिए एजेंटों की नियुक्ति, ऑडिट और निगरानी की स्पष्ट नीतियां बनानी होंगी। एजेंटों का पेशेवर सत्यापन भी जरूरी होगा। विधि फर्म इकनॉमिक लॉज प्रैक्टिस के वरिष्ठ वकील मुकेश चंद समझाते हैं, ‘मसौदे में वसूली एजेंट के साथ बैंकों की भी जवाबदेही तय की गई है। अब बदसलूकी को एजेंटों की हरकत बताकर बैंक पल्ला नहीं झाड़ सकते। वसूली एजेंटों की जांच-परख, ऑडिट और सार्वजनिक जानकारी अनिवार्य होने से ऋणदाता अपने नाम पर की गई हरकतों के लिए खुद जिम्मेदार होंगे।’ गेहराना बताते हैं कि ज्यादा वसूली पर ज्यादा इंसेंटिव की व्यवस्था बंद की जा रही है। कर्जदार से संपर्क का रिकॉर्ड रखना होगा। इन तरीकों से कर्ज वसूली में जवाबदेही बहुत बढ़ जाएगी।

एजेंट की जानकारी

ऋणदाताओं को वसूली एजेंट के बारे में पहले ही बताना होगा। किसी भी बदलाव की जानकारी भी एसएमएस या ईमेल के जरिये फौरन देनी होगी। ऋणदाताओं को अधिकृत एजेंटों की अपडेटेड सूची अपनी वेबसाइट, ऐप और शाखाओं पर देनी होगी। ऋणदाताओं को ए-आई के जरिये कर्ज वसूली के सॉल्यूशन्स प्रदान करने वाली क्रेडिटास सॉल्यूशंस के सह-संस्थापक अंशुमान पंवार ने कहा, ‘इससे कर्जदारों को भरोसा होता है कि वह सही और अधिकृत एजेंट से ही मिल रहे हैं और अनधिकृत वसूली का जोखिम कम हो जाता है।’

छोटे कर्ज वसूलने के लिए एजेंटों को पहले से तय जगह पर ही जाना चाहिए और घर पर तभी पहुंचना चाहिए, जब कर्जदार से मुलाकात नहीं हो पा रही हो। कर्जदार को बताया जाए कि बातचीत रिकॉर्ड की जा सकती है। इससे फर्जी एजेंटों का पहुंचना या परेशान करना बंद होगा और शुरू से ही पारदर्शिता तथा जवाबदेही बनेगी।

एजेंटों का आचरण तय

वसूली एजेंट सुबह 8 बजे से शाम 7 बजे के बीच ही कर्जदार से बात कर सकते हैं। उन्हें कर्जदार के बताए समय और जगह को मानना होगा तथा उचित रसीद आदि देनी होगी। एजेंटों को परेशान करने, धमकी देने, बार-बार फोन करने, रिश्तेदारों या सहकर्मियों के पास जाने, सबके सामने शर्मिंदा करने, बकाया रकम बढ़ा-चढ़ाकर बताने या गुमनाम संदेश भेजने से साफ मना किया गया है। गेहराना के अनुसार इसे नियमों का उल्लंघन मानकर ऋणदाता पर जुर्माना लगाया जा सकता है।

तीसरे पक्ष द्वारा संपर्क पर सख्त पाबंदियां लगाने, सीमित जानकारी साझा करने, कॉल रिकॉर्डिंग के कायदे बनाने और रजामंदी पर ही मिलने जैसे नियम वसूली के तरीकों को डीपीडीपी अधिनियम, 2023 के कायदों के अनुरूप बनाते हैं। इससे तय होता है कि कर्ज वसूली के लिए किसी की निजता या गरिमा को ताक पर नहीं रखा जा सकता। एक अहम बदलाव यह भी है कि कर्जदार वसूली पर सवाल उठाता या शिकायत करता है तो वसूली रोकनी पड़ेगी और शिकायत निपटने का इंतजार करना होगा। शिकायत मामूली हो तो वसूली की जा सकती है।

नफा-नुकसान

अच्छी बात है कि सभी विनियमित ऋणदाताओं के लिए एक जैसे पैमाने हैं। मसौदे में ऋणदाताओं की जवाबदेही तय करने से शिकायतें बहुत कम हो जाएंगी। बीएमआर लीगल में पार्टनर शैंकी अग्रवाल कहते हैं, ‘निगरानी और बातचीत की रिकॉर्डिंग से बढ़ी पारदर्शिता कर्जदारों और एजेंटों की सुरक्षा करती है। वसूली के लिए प्रशिक्षण, निगरानी और जवाबदेही जरूरी करने से प्रक्रिया में मानवीयता, जवाबदेही और भरोसा बढ़ जाता है।’ मगर नियम सख्त होने पर वास्तविक चूक में वसूली सुस्त हो सकती है और अनुपालन का खर्च बढ़ सकता है। बेहद मामूली शिकायत की स्पष्ट परिभाषा नहीं होने के कारण वसूली में देर हो सकती है।

वसूली एजेंट से कैसे निपटें

कर्जदार हमेशा कर्ज देने वाले के संपर्क में रहें। सहजमनी डॉट कॉम के संस्थापक और भारतीय प्रतिभूति एवं विनिमय बोर्ड (सेबी) में पंजीकृत निवेश सलाहकार अभिषेक कुमार समझाते हैं, ‘बैंक से ऋण पुनर्गठन योजना पर बात शुरू करें। यह मुमकिन नहीं हो तो कर्ज निपटाने यानी सेटल करने की कोशिश करें।’ वह मानते हैं कि कर्जदार खुद बात शुरू करे तो मामला बाहरी वसूली एजेंट के पास जाने से बच सकता है। वसूली एजेंट की पहचान जांचें और आधिकारिक रास्ते से ही बात करें। अग्रवाल की सलाह है कि नोटिस, ईमेल और रसीदों की प्रतियां संभालकर रखी जाएं और बकाया रकम गलत लगने पर फौरन लिखित शिकायत दर्ज कराई जाए। ध्यान रखें कि एजेंट आपको न तो धमकी दे सकते हैं, न डरा सकते हैं और न ही सबके सामने शर्मसार कर सकते हैं। अपने अधिकर जानिए और हिम्मत के साथ मामले से निपटिए।

First Published : February 23, 2026 | 8:35 AM IST