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US-India Trade: ट्रंप के पास हैं कई व्यापारिक हथियार, धारा 301 और 232 से बढ़ सकती है भारत की टेंशन

अमेरिकी राष्ट्रपति को आईईईपीए की तरह कोई भी शक्ति नहीं है लेकिन ट्रंप के पास कई व्यापार हथियार हैं - कुछ शक्तिशाली, कुछ लक्षित, कुछ राजनीतिक रूप से विस्फोटक हैं

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बीएस संवाददाता   
Last Updated- February 22, 2026 | 10:59 PM IST

अमेरिकी सर्वोच्च न्यायालय के चुनिंदा देश पर जवाबी शुल्क लगाने के लिए ‘इंटरनैशनल इमरजेंसी इकनॉमिक पॉवर्स एक्ट’ (आईईईपीए) के इस्तेमाल को खारिज करने के बाद राष्ट्रपति ट्रंप और उनकी टीम शुल्क कार्रवाई को फिर से करने के लिए वैकल्पिक कानूनी रास्ते अपनाने के लिए मजबूर हो गई है। दरअसल, अमेरिकी राष्ट्रपति को आईईईपीए की तरह कोई भी शक्ति नहीं है लेकिन ट्रंप के पास कई व्यापार हथियार हैं – कुछ शक्तिशाली, कुछ लक्षित, कुछ राजनीतिक रूप से विस्फोटक हैं।

सिक्योरिटी शुल्क : धारा 232

यदि राष्ट्रपति को राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा नजर आता है तो शुल्क या कोटा प्रणाली लागू कर सकता है। भारत पर असर : .ट्रंप ने धारा 232 के तहत 2018 में स्टील व एल्यूमीनियम पर शुल्क लगा दिया था जिससे भारत पर असर पड़ा था। इस क्रम में 232 की संशोधित कार्रवाई महत्त्वपूर्ण खनिजों, इलेक्ट्रॉनिक व दवाओं से संबंधित है। इससे भारत के खनिज, वाहन उपकरणों और दवाओं के निर्यात के हित तत्काल रूप से प्रभावित होंगे।

अनुचित व्यापार : धारा 301

अमेरिका के व्यापार प्रतिनिधि  को व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 301 व्यापार नीतियों के अतार्किक, अनुचित व भेदभावपूर्ण होने की स्थिति में जांच व जवाबी कार्रवाई करने का अधिकार देती है।

भारत पर असर: भारत ने 2018 में चिकित्सा उपकरणों पर मूल्य नियंत्रण और बाजार-पहुंच बाधाओं पर जांच का सामना किया। एक नई 301 जांच पड़ताल – डिजिटल नीतियों, ई-कॉमर्स नियमों, फार्मा मूल्य निर्धारण या आईसीटी उत्पादों पर शुल्क है। इससे भारत के आईटी हार्डवेयर, फार्मास्यूटिकल्स और सेवाओं के निर्यात को खतरा पैदा हो सकता है।

बैलेंस ऑफ पेमेंट्स शुल्क

राष्ट्रपति को व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 122 शुल्क लगाने का अधिकार देती है। इसके तहत 15 प्रतिशत तक का अस्थायी, एक्रॉस-द-बोर्ड आयात अधिभार लगाने की अनुमति दी गई है।

भारत पर असर: भारत पर शुल्क 28 प्रतिशत से घटाकर 15 प्रतिशत कर दिया गया। लेकिन अपने एशियाई समकक्षों के खिलाफ प्राप्त होने वाले तरजीही लाभ को छीन लेता है। इससे बातचीत की गई अंतरिम व्यापार डील भी फिलहाल अप्रासंगिक हो जाती है।

सेफगार्ड शुल्क: धारा 201

व्यापार अधिनियम 1974 की धारा 201 आयात में उछाल होने की स्थिति में घरेलू उद्योग को गंभीर हानि की स्थिति में सेफगार्ड टैरिफ या कोटा को अधिकृत करती है।

भारत का असर: आयात में उछाल आने वाले संवेदनशील क्षेत्रों में एक प्रमुख आपूर्तिकर्ता है – सोलर मॉड्यूल, स्टील उत्पाद, टायर, रसायन, वस्त्र और ऑटो पार्ट्स।  किसी भी श्रेणी में धारा 201 का मामला तुरंत भारत के निर्यात को कम कर देगा।

एडी और सीवीडी

टैरिफ एक्ट 1930 के तहत एंटी-डंपिंग (धारा 731) और काउंटरवेलिंग ड्यूटी (धारा 701) की कार्रवाइयां अमेरिकी सरकार को उचित मूल्य से कम पर बेचे जाने वाले या विदेशी सरकारों के सब्सिडी वाले आयात पर दंडात्मक शुल्क लगाने की अनुमति देती हैं।

भारत पर असर: भारत को नियमित रूप से एडी/सीवीडी मामलों में निशाना बनाया गया है – रसायन, स्टील उत्पाद, फार्मा इंटरमीडिएट्स, टायर, आईटी हार्डवेयर इनपुट।

जवाबी शुल्क की धारा 338

शुल्क अधिनियम, 1930 की धारा 338 राष्ट्रपति को उन देशों के खिलाफ टैरिफ बढ़ाने या प्रतिबंध लगाने का अधिकार देती है जो अमेरिकी सामानों के खिलाफ ‘अनुचित या भेदभावपूर्ण’ शुल्क या व्यापार बाधाएं लगाते हैं।

भारत पर असर: यदि अमेरिकी निर्यातक – विशेष रूप से कृषि, डेरी, सूचना और टेक्नॉलजी कम्युनिकेशन (आईसीटी) या मेडिकल डिवाइस – भारत में भेदभावपूर्ण व्यवहार का दावा करते हैं तो व्हाइट हाउस संरक्षणवादी धारा 338 को धमकी दे सकता है या लागू कर सकता है। इससे द्विपक्षीय विवाद बढ़ सकता है और भारत को रक्षात्मक टैरिफ या नियामक प्रतिक्रियाओं में धकेला जा सकता है।

First Published : February 22, 2026 | 10:59 PM IST