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सुप्रीम कोर्ट ने छीना ट्रंप का ‘ट्रेड बाजूका’, क्या अब बेअसर होगी राष्ट्रपति की टैरिफ वाली धमकी?

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने ट्रंप के अचानक टैरिफ लगाने के अधिकार पर रोक लगा दी है, लेकिन वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता अब भी बरकरार है और नए कदमों को लेकर सभी सतर्क हैं

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बीएस वेब टीम   
Last Updated- February 22, 2026 | 7:58 PM IST

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप के बड़े पैमाने पर लगाए टैरिफ को खारिज कर दिया है। इससे ट्रंप की पल भर में टैरिफ लगाने और धमकियां देने वाली ताकत काफी कमजोर पड़ गई है। लेकिन व्यापार करने वाले देशों और कंपनियों के लिए अब भी चिंता की लहर बनी हुई है। लोग सोच रहे हैं कि आगे क्या होगा।

सुप्रीम कोर्ट ने ट्रंप की पसंदीदा ताकत पर लगाई लगाम

कोर्ट का फैसला ट्रंप के लिए बड़ा झटका है। उन्होंने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट यानी IEEPA के जरिए बहुत से टैरिफ लगाए थे। अब वो टूल काम नहीं करेगा। कोर्ट ने 6-3 के मजबूत वोट से ये फैसला सुनाया। मतलब ट्रंप अब पहले की तरह किसी भी वक्त, किसी भी वजह से टैरिफ की धमकी नहीं दे सकते। खासकर जब बात व्यापार से बाहर की हो।

एशिया सोसाइटी पॉलिसी इंस्टीट्यूट में सीनियर वाइस प्रेसिडेंट हैं व पूर्व अमेरिकी ट्रेड अधिकारी वेंडी कटलर कहती हैं कि ट्रंप को अनिश्चितता से बहुत फायदा मिलता था। दूसरे देश डरते रहते थे कि वो अगला कदम क्या उठाएंगे। लेकिन अब उनके पंख कट गए हैं। नया टैरिफ सिर्फ 150 दिनों तक चलेगा। बाकी कानूनों के तहत नए टैरिफ लगाने में महीनों लगेंगे। इसलिए वो अब ‘कहीं भी, कभी भी, किसी भी वजह से’ वाला हथियार नहीं चला पाएंगे।

ट्रंप का तुरंत पलटवार, टैरिफ बढ़ाकर 15% कर दिया

फैसले के कुछ घंटे बाद ही ट्रंप ने जवाब दे दिया। उन्होंने सारे आयात पर 10 प्रतिशत का नया टैरिफ लगा दिया और नई ट्रेड जांच शुरू करने का आदेश दिया। इन जांच से आने वाले महीनों में और टैरिफ लग सकते हैं। साथ ही उन्होंने करीब 20 देशों के साथ हुए व्यापार और निवेश समझौतों को छेड़ने से साफ मना कर दिया। ये समझौते ज्यादातर उन देशों से थे जहां पहले से टैरिफ ज्यादा थे।

लेकिन 24 घंटे भी नहीं बीते थे कि ट्रंप ने इस टैरिफ को 15 प्रतिशत कर दिया। ये कानून के मुताबिक सबसे ऊंची दर है। वेंडी कटलर कहती हैं कि ये तेजी ट्रंप की उसी स्टाइल को दिखाती है जिसमें वो दूसरे देशों को हमेशा अनिश्चित रखना चाहते हैं।

एक्सपर्ट बोले: बड़ा टैरिफ हथियार गया, लेकिन असर ज्यादा नहीं होगा

सेंटर फॉर स्ट्रैटेजिक एंड इंटरनेशनल स्टडीज के विलियम रेइंश कहते हैं कि कोर्ट के इस फैसले से ट्रंप की दूसरे देशों को डराने वाली बड़ी छड़ी छिन गई है। हालांकि आर्थिक नुकसान ज्यादा नहीं होगा क्योंकि नया टैरिफ और बाकी टैरिफ पुराने वाले की जगह ले लेंगे।

काउंसिल ऑन फॉरेन रिलेशंस के अध्यक्ष माइकल फ्रोमन ने कहा कि अभी कई सवाल अनसुलझे हैं। जैसे गैरकानूनी टैरिफ के पैसे वापस कैसे मिलेंगे। सबसे अहम बात ये है कि ट्रंप अब व्यापार से बाहर के मुद्दों पर टैरिफ को सजा या दबाव का हथियार नहीं बना पाएंगे। ट्रंप ने IEEPA का इस्तेमाल करके कई गैर-व्यापारिक मामलों में टैरिफ की धमकी दी थी। जैसे यूरोपीय देशों को ग्रीनलैंड पर अपने दावे का विरोध करने पर, कनाडा को चीन से इलेक्ट्रिक वाहन आयात करने पर, और ब्राजील को उनके पूर्व राष्ट्रपति जायर बोल्सोनारो के साथ बर्ताव पर।

अटलांटिक काउंसिल के जोश लिप्स्की कहते हैं कि अभी ये कहना जल्दबाजी होगी कि ट्रंप की लीवरेज पर कितना असर पड़ेगा। ये उनके अंतरराष्ट्रीय आर्थिक एजेंडे को बड़ा झटका जरूर है, लेकिन दूसरे कानूनों के कारण पूरी तरह से रुक नहीं जाएगा।

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पुरानी डील्स पर सस्पेंस, देश सतर्क

करीब 20 समझौतों का भविष्य अभी साफ नहीं है। ट्रंप, यूएस ट्रेड रिप्रेजेंटेटिव जैमिसन ग्रीर और ट्रेजरी सेक्रेटरी स्कॉट बेसेंट ने साफ कहा कि ये डील जस की तस रहेंगी। विश्लेषक मानते हैं कि देश इन्हें रद्द या बदलने की हिम्मत नहीं करेंगे। क्योंकि ट्रंप नाराज होकर कुछ भी कर सकते हैं।

कोलंबिया यूनिवर्सिटी की एडजंक्ट प्रोफेसर और पूर्व ट्रेड अधिकारी मिरियम सापिरो कहती हैं कि ट्रंप का ‘ट्रेड बाजूका’ तो चला गया, लेकिन पुरानी डील्स नहीं टूटेंगी। फिर भी नई बातचीत में दूसरे देशों को थोड़ी ज्यादा ताकत मिल गई है। देश अभी भी अमेरिका से डील करना चाहेंगे क्योंकि अनिश्चितता है और अमेरिका को मजबूत साथी बनाए रखना जरूरी है।

ट्रंप के लिए IEEPA का रिस्क लेना फायदे का सौदा था। इससे कुछ डील जल्दी हो गईं। जैमिसन ग्रीर ने फॉक्स न्यूज पर कहा कि उस वक्त ये सही टूल था क्योंकि तेजी और लचीलापन चाहिए था। उन्होंने कहा, “हमें कोई पछतावा नहीं। अब हम दूसरा टूल इस्तेमाल करेंगे।”

विदेशों में सतर्क प्रतिक्रिया

विदेशी देशों ने शुरुआत में काफी सावधानी से प्रतिक्रिया दी। साउथ कोरिया ने कहा कि वो कोर्ट का फैसला और अमेरिका का जवाब दोनों देख रहे हैं। नवंबर में फाइनल हुई टैरिफ एग्रीमेंट की बातें दोस्ताना तरीके से जारी रखेंगे। इस एग्रीमेंट में 350 बिलियन डॉलर के निवेश का वादा शामिल है।

कोरिया इकोनॉमिक इंस्टीट्यूट ऑफ अमेरिका के टॉम रामेज लिखते हैं कि ट्रंप प्रशासन के पास अभी भी दूसरे टैरिफ के रास्ते खुले हैं। इसलिए साउथ कोरिया और उनकी कंपनियां अपनी प्रतिबद्धताएं निभाएंगी। अगर कोई देश पीछे हटा तो ट्रंप उसे नजरअंदाज नहीं करेंगे।

(रॉयटर्स के इनपुट के साथ)

First Published : February 22, 2026 | 7:53 PM IST