प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो
निजी क्षेत्र के ऋणदाता आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने रविवार को कहा कि उसने चंडीगढ़ शाखा में लगभग 590 करोड़ रुपये की धोखाधड़ी का पता लगाया है, जो हरियाणा राज्य सरकार से संबंधित खातों से जुड़ी है। बैंक ने अपनी शाखा के 4 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है। उधर हरियाणा सरकार ने राज्य में सरकारी काम के लिए आईडीएफसी फर्स्ट बैंक और एयू स्मॉल फाइनैंस बैंक को अपने पैनल से बाहर कर दिया है।
यह गड़बड़ी तब सामने आई जब राज्य सरकार के एक विभाग ने आईडीएफसी फर्स्ट बैंक में अपना बैंक खाता बंद करने और धनराशि दूसरे बैंक में भेजने का अनुरोध किया। विभाग द्वारा उल्लिखित राशि खाते में मौजूद राशि से मेल नहीं खाती थी।
धोखाधड़ी का पता चलने के बाद बैंक को प्रावधान के लिए पूंजी अलग रखनी होती है। बैंक द्वारा पता लगाई गई धोखाधड़ी की राशि वित्त वर्ष 2025-26 की अक्टूबर-दिसंबर तिमाही के लगभग 503 करोड़ रुपये के शुद्ध लाभ से अधिक है।
एक्सचेंजों को दी गई जानकारी में बैंक ने कहा कि वह फॉरेंसिक ऑडिट करने के लिए एक स्वतंत्र बाहरी एजेंसी नियुक्त करने की प्रक्रिया में है। उसने कहा कि नियामक और वैधानिक लेखा परीक्षकों को धोखाधड़ी के बारे में सूचित कर दिया गया है।
मुंबई स्थित ऋणदाता ने कहा कि एक शुरुआती आंतरिक मूल्यांकन में चंडीगढ़ की एक शाखा में कुछ कर्मचारियों द्वारा की गई ‘अनधिकृत और धोखाधड़ी वाली गतिविधियों’ की पहचान की गई है, जो संभावित रूप से अन्य व्यक्तियों या संस्थाओं के साथ मिलीभगत में की गई हैं।
हरियाणा सरकार के विभाग के अनुरोध और खाते में मौजूद राशि के बीच विसंगतियां देखे जाने के बाद 18 फरवरी से राज्य की अन्य सरकारी संस्थाओं ने अपने संबंधित खातों के बारे में बैंक से संपर्क किया। बैंक के रिकॉर्ड में दिखाई देने वाली राशियों और खाताधारकों द्वारा बताई गई राशियों में फिर से अंतर देखा गया।
बैंक ने स्पष्ट करते हुए कहा, ‘पहली नज़र में चंडीगढ़ में एक विशेष शाखा में कुछ कर्मचारियों द्वारा हरियाणा राज्य सरकार के कुछ खातों में अनधिकृत और धोखाध़ड़ी वाली गतिविधियां की गई हैं और इसमें संभावित रूप से अन्य व्यक्ति / संस्थाएं / समकक्ष शामिल हैं।’ शाखा के अन्य ग्राहकों के खातों में कोई ऐसी समस्या नहीं है।
बैंक ने अपनी फाइलिंग में कहा, ‘उपरोक्त उल्लिखित शाखा में पहचाने गए खातों में समाधान के तहत कुल राशि लगभग 590 करोड़ रुपये है।’ इसमें कहा गया है कि अंतिम वित्तीय प्रभाव दावों को मान्य करने, वसूली के प्रयासों और कानूनी कार्यवाही पूरी करने के बाद निर्धारित किया जाएगा। बैंक ने यह भी कहा है कि कुछ लाभार्थी बैंकों को पैसे वापस करने का अनुरोध भेजा गया है।
बैंक ने अपने 4 कर्मचारियों को निलंबित कर दिया है, जिनकी जांच चल रही है। बैंक ने कहा है कि वह जिम्मेदार कर्मचारियों और इस घटना से जुड़े बाहरी लोगों के खिलाफ कड़ी अनुशासनात्मक, सिविल और आपराधिक कार्रवाई करेगा। धोखाधड़ी के मामले की निगरानी और फॉलोअप के लिए बनी विशेष समिति की बैठक 20 फरवरी को हुई। उसके बाद मामले को ऑडिट समिति और 21 फरवरी को हुई निदेशक मंडल की बैठक में रखा गया।
आईडीएफसी फर्स्ट बैंक ने इस मामले की शिकायत पुलिस अधिकारियों से की है और अन्य संबंधित प्रवर्तन एजेंसियों के पास शिकायत करने की प्रक्रिया में है। बैंक ने कहा कि वह जांच एजेंसियों को पूरी मदद करेगा।
हरियाणा सरकार ने 18 फरवरी को जारी सरकारी अधिसूचना में कहा गया, ‘अब से इन बैंकों के माध्यम से कोई भी सरकारी फंड, जमा, निवेश या लेनदेन नहीं किया जाएगा।’ नए नियमों के तहत प्रशासनिक सचिव सिर्फ राज्य में चल रहे राष्ट्रीयकृत बैंकों में सरकारी योजनाओं के खाते खोलने की मंजूरी दे सकते हैं। निजी बैंकों में खाता खोलने के लिए पहले से मंजूरी लेनी होगी।
राज्य सरकार ने अधिसूचना में बताया कि वित्त विभाग ने पाया कि कुछ बैंक शर्तों का पालन नहीं कर रहे हैं, जिन शर्तों के तहत विभाग और निगम सावधि जमा कर रहे हैं।
राज्य सरकार ने कहा, ‘कई मामलों में यह देखा गया है कि ज्यादा ब्याज देने वाले लचीले सावधि जमा या दूसरे सावधि जमा साधनों में धन रखने के साफ निर्देश के बावजूद बैंक बचत खाते में धन रख रहे हैं, जिससे कम रिटर्न मिल रहा है। इससे सरकार को वित्तीय हानि हो रही है।’
शुक्रवार को बैंक के शेयर 83.56 रुपये प्रति शेयर पर बंद हुए थे, जो पहले की बंदी से 0.72 प्रतिशत अधिक था।