बाजार

Market Alert: क्या सोना-चांदी बनेंगे निवेशकों के लिए सुरक्षित ढाल? ट्रंप के फैसले से मची हलचल

एक्सपर्ट्स का कहना है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा ट्रंप के टैरिफ पर रोक के बाद सोमवार को शेयर बाजारों में भारी उतार-चढ़ाव की संभावना है

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पुनीत वाधवा   
Last Updated- February 22, 2026 | 10:45 PM IST

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के ऑर्डर पर वै​श्विक वित्तीय बाजार सोमवार को प्रतिक्रिया दे सकते हैं। अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रप​ति डॉनल्ड ट्रंप के लगाए गए जवाबी शुल्कों पर हथौड़ा चला दिया है। दूसरी ओर, विश्लेषकों का कहना है कि सभी देशों से आयात पर 15 फीसदी का नया वै​श्विक टैरिफ लगाकर ट्रंप ने अमेरिका-भारत के बीच हुई अंतरिम व्यापार व्यवस्था को असरदार तरीके से बदल दिया है।

सेबी में पंजीकृत ट्रेडिंग और वेल्थ टेक फर्म एनरिच मनी के मुख्य कार्या​धिकारी पोनमुडी आर ने कहा, ‘हालांकि इससे टेक्सटाइल, दवा, जेम्स और मशीनरी जैसे क्षेत्रों में भारतीय निर्यातकों के लिए अल्पावधि में अनिश्चितता पैदा हुई है। लेकिन यह कदम पहले उठाए गए कदमों की तुलना में कम गंभीर माना जा रहा है और इससे निरंतर बातचीत करने की गुंजाइश पैदा हुई है।’ विश्लेषक इस घटनाक्रम और विभिन्न  परिसंप​त्ति वर्गों पर इसके प्रभाव पर किस तरह की प्रतिक्रिया दे रहे हैं, इस पर एक नजरः

भारतीय बाजार

यू आर भट, सह-संस्थापक एवं निदेशक, अल्फानीति फिनटेक 

हाल के घटनाक्रम से यह अनिश्चितता पैदा हो गई है कि टैरिफ किस तरह असर डालेंगे, खासकर तब जब डॉनल्ड ट्रंप ने 1974 के ट्रेड ऐक्ट की धारा 122 का इस्तेमाल करके 150 दिन के लिए 10 प्रतिशत का अस्थायी आयात शुल्क लगाया और फिर इसे बढ़ाकर 15 फीसदी कर दिया। यह जान लीजिए कि बाजार को अनिश्चितता पसंद नहीं है।

फिर भी, अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले ने भारत के निर्यात को बांग्लादेश जैसे दूसरे देशों के बराबर खड़ा कर दिया है। इसके बजाय हम चाहते हैं कि भारत में ट्रेड के लिए हमारी प्रतिस्पर्धा में अहम बढ़त हो। फिर ईरान के साथ नए भू-राजनीतिक हालात पैदा हो रहे हैं। अगर तनाव बढ़ा और तेल कीमतों में बढ़ोतरी हुई तो ये बाजार की बढ़त पर लगाम लगा सकते हैं। सोना और चांदी जैसी कीमती धातुओं को सेफ-हेवन यानी सुर​क्षित निवेश विकल्प के तौर पर लोग खरीद सकते हैं। मेरा मानना है कि निवेशकों को बाजार में किसी भी तेजी पर बेच देना चाहिए।

वै​श्विक व्यापार

देवीप्रसाद नायर, हेड ऑफ बिजनेस (एमएफ, पीएमएस, एआईएफ), हीलियस इंडिया

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले से एक साल से वै​श्विक व्यापार पर मंडरा रहा बड़ा संकट दूर हो गया है। विश्व के शएयर बाजारों के लिए यह स्पष्टता मायने रखती है। वॉल स्ट्रीट की बात करें तो टैरिफ वापस लेने से मार्जिन से जुड़ी स्पष्टता हुई है, उत्पादन लागत का जो​खिम कम हुआ है और नरम जीडीपी और कठोर महंगाई के साथ भी जवाबी कदमों की आशंका घटी है।  

अमेरिकी बाजार, डॉलर

नाइजल ग्रीन, सीईओ, डीवेर ग्रुप

राष्ट्रपति ट्रंप का खास आर्थिक एजेंडा, उनका टैरिफ सिस्टम, साफ तौर पर कमजोर पड़ता दिख रहा है। इक्विटी बाजार आगे की सोच रहे हैं और उन्हें बड़ी अमेरिकी कंपनियों की मजबूत बैलेंस-शीट, एआई और टेक में लगातार पूंजीगत खर्च और इस उम्मीद से समर्थन मिल रहा है कि नीति बनाने वाले आखिरकार बहुत बुरे नतीजों से बचेंगे। आयात लागत से जुड़ा महंगाई का कुछ दबाव समय के साथ कम हो सकता है। फिर भी, लगातार राजकोषीय घाटे और मजबूत वेतन वृद्धि से भी यील्ड पर ऊपर की ओर दबाव बने रहने की उम्मीद है। अमेरिकी डॉलर में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। लागू करने की समय-सीमा, संभावित कानूनी कदम और भूराजनीतिक ​स्थिति, ये सभी मायने रखते हैं। बाजार संभावनाओं के हिसाब से चलेंगे।

बोफा सिक्योरिटीज

ज्यादा टैरिफ वृद्धि के लिए रुकावट थे। अब उन्हें थोड़ा हटाने से भी मदद मिल सकती है। लेकिन, हमें अमेरिका और दुनिया भर में व्यापार से जुड़ी अनिश्चितताएं बढ़ने की भी आशंका है, जो नकारात्मक असर डाल सकती हैं। इसके अलावा, यह खबर अल्पाव​धि में थोड़ी डिसइन्फ्लेशनरी होनी चाहिए। अगर बेरोज़गारी दर गिरती रहती है, तो अमेरिकी फेड और कटौती शायद नहीं करना चाहेगा। यह इस बात पर निर्भर करता है कि टैरिफ किस हद तक बदले जाते हैं।  यदि बेरोजगारी दर गिरती रहती है, तो अमेरिकी फेड आगे कटौती नहीं करना चाहेगा, यह इस बात पर निर्भर करता है कि टैरिफ किस हद तक बदले जाते हैं।

बाजार रणनीति

अजित मिश्रा, वरिष्ठ शोध उपाध्यक्ष, रेलिगेयर 

खासकर 24 फरवरी को होने वाली मासिक एफऐंडओ एक्सपायरी को देखते हुए बाजारों में उतार-चढ़ाव बना रह सकता है। अमेरिकी राष्ट्रपति के नए आदेश के बाद होने वाले घटनाक्रम पर भी बाजारों की नजर रहेगी। ये घटनाक्रम व्यापार परिदृश्य, टैरिफ ढांचे और वै​श्विक जो​खिम धारणा पर असर डाल सकते हैं। ऊपर की तरफ, 25,800–26,000 जोन निफ्टी के लिए मुख्य प्रतिरोध दायरा बना हुआ है।

बुलिश मोमेंटम के लिए 26,000 से ऊपर लगातार तेजी की जरूरत होगी। मौजूदा मुश्किलों की वजह से आईटी क्षेत्र पर सावधान रहें और वै​श्विक रुझानों तथा आय ​स्थिरता पर ज्यादा स्पष्टता आने तक निवेश को सीमित बनाए रखें।

First Published : February 22, 2026 | 10:45 PM IST