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‘रेसिप्रोकल’ टैरिफ रद्द, सोना-चांदी और शेयर बाजार पर क्या पड़ेगा असर? एक्सपर्ट्स की राय

अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद गोल्ड, सिल्वर, डॉलर और इक्विटी मार्केट की दिशा पर विशेषज्ञों की राय

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पुनीत वाधवा   
Last Updated- February 23, 2026 | 9:27 AM IST

Trump Tariffs Impact: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने राष्ट्रपति डॉनल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए व्यापक ‘रेसिप्रोकल’ टैरिफ को रद्द कर दिया है। माना जा रहा है कि इस फैसले का असर सोमवार को वैश्विक वित्तीय बाजारों में दिख सकता है। हालांकि, ट्रंप ने सभी देशों से आयात पर 15 प्रतिशत का नया वैश्विक टैरिफ लागू कर दिया है। विश्लेषकों का कहना है कि इससे अमेरिका और भारत के बीच चल रही अंतरिम व्यापार व्यवस्था नए सिरे से तय होगी।

भारतीय बाजार पर असर

Alphaniti Fintech के को-फाउंडर और डायरेक्टर यूआर भट के अनुसार टैरिफ को लेकर अनिश्चितता बढ़ी है और बाजार आमतौर पर अनिश्चितता पसंद नहीं करते। उनका कहना है कि अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भारत के निर्यात अब बांग्लादेश जैसे देशों के बराबर हो गए हैं। लेकिन असली जरूरत यह है कि भारत को प्रतिस्पर्धी देशों पर बढ़त मिले, तभी ज्यादा व्यापार भारत की ओर आएगा।

यूआर भट ने यह भी कहा कि ईरान से जुड़ी भू-राजनीतिक स्थिति बाजार के लिए जोखिम बन सकती है। यदि तनाव बढ़ता है और कच्चे तेल की कीमतें चढ़ती हैं तो बाजार की तेजी सीमित रह सकती है। ऐसे माहौल में सोना और चांदी जैसे सुरक्षित निवेश विकल्पों की मांग बढ़ सकती है। उन्होंने तेजी आने पर मुनाफावसूली की सलाह दी है।

Helios India में हेड ऑफ बिजनेस देविप्रसाद नायर का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के फैसले से वैश्विक व्यापार पर छाया बड़ा संकट कुछ हद तक कम हुआ है। उनके अनुसार इससे कंपनियों की लागत और मुनाफे को लेकर स्पष्टता बढ़ेगी और सप्लाई चेन पर दबाव घटेगा। यह कॉरपोरेट अमेरिका के लिए सकारात्मक संकेत है।

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अमेरिकी बाजार और डॉलर

deVere Group के सीईओ नाइजेल ग्रीन के मुताबिक ट्रंप की टैरिफ नीति कमजोर पड़ती दिख रही है, लेकिन अमेरिकी शेयर बाजार मजबूत बैलेंस शीट, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और टेक्नोलॉजी में लगातार निवेश के कारण टिके हुए हैं। उनका कहना है कि आयात लागत घटने से महंगाई का दबाव कुछ कम हो सकता है, हालांकि बढ़ता सरकारी घाटा और वेतन वृद्धि बॉन्ड यील्ड पर दबाव बनाए रख सकते हैं। अमेरिकी डॉलर में उतार चढ़ाव जारी रह सकता है।

फेड की ब्याज दर पर असर

BofA Securities का मानना है कि टैरिफ में कमी आर्थिक वृद्धि के लिए सहायक हो सकती है, लेकिन व्यापार से जुड़ी अनिश्चितता बनी रहेगी। यदि बेरोजगारी दर घटती रहती है तो अमेरिकी फेडरल रिजर्व दरों में कटौती करने से बच सकता है।

निवेश रणनीति

Religare Broking के सीनियर वाइस प्रेसिडेंट अजीत मिश्रा के अनुसार बाजार में उतार चढ़ाव बना रह सकता है, खासकर फरवरी 24 को होने वाली मासिक डेरिवेटिव एक्सपायरी के आसपास। उन्होंने कहा कि निफ्टी के लिए 25,800 से 26,000 का स्तर महत्वपूर्ण रेजिस्टेंस है। 26,000 के ऊपर टिके रहने पर ही मजबूत तेजी लौट सकती है। आईटी सेक्टर में फिलहाल सतर्क रहने और सीमित निवेश रखने की सलाह दी गई है।

First Published : February 23, 2026 | 9:23 AM IST