facebookmetapixel
Advertisement
चीन से क्या सीखकर बदलेगा भारत का भविष्य? अमिताभ कांत ने बताया रास्तादूसरे देशों पर टैरिफ लगाकर इनकम टैक्स खत्म करने की तैयारी में ट्रंप! ऐलान ने मचाई हलचलसिर्फ इकोनॉमिक ग्रोथ काफी नहीं, ह्यूमन डेवलपमेंट पर भी फोकस जरुरी: BS मंथन में बोले अमिताभ कांतऊंची ब्याज दरों के बावजूद चमका सोना, बदल रही है निवेशकों की सोचBS Manthan 2026: भारत के भविष्य का ब्लूप्रिंट आज होगा तैयार, मंच पर होंगे निर्मला सीतारमण और प्रल्हाद जोशी; जानें किस सेशन में क्या खासGold-Silver Price Today: MCX पर सोना 1.60 लाख के पार, चांदी में भी तूफानी तेजी; गहने खरीदने से पहले चेक करें आज के रेटUS Tariffs: भारत के सोलर कारोबार पर ट्रंप का टैरिफ वार, 126% शुल्क से मचा हड़कंपBusiness Standard Manthan – 2026 | Day 2- Hall 2Business Standard Manthan – 2026 | Day 2- Hall 1Stock Market Update: शेयर बाजार में जोरदार उछाल! सेंसेक्स 600 अंक उछला, निफ्टी 25,600 के पार; IT और बैंकिंग शेयरों ने भरी उड़ान

मद्रास हाईकोर्ट ने EPFO के 18 जनवरी के सर्कुलर को रद्द किया, कर्मचारियों को हाई पेंशन का विकल्प मिलेगा

Advertisement

सुप्रीम कोर्ट के नवंबर 2022 के आदेश के अनुसार, 15,000 रुपये से अधिक मासिक वेतन वाले कर्मचारियों को उच्च पेंशन का विकल्प देने की अनुमति जारी रहेगी।

Last Updated- September 11, 2025 | 9:17 AM IST
EPFO Withdrawal Rules

मद्रास उच्च न्यायालय के मुदरै पीठ ने कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (ईपीएओ) के पीएफ कोष का स्वयं प्रबंधन करने वाली कंपनियों के उच्च पेंशन के आदेश के अनुरूप पिछली तारीख से अपने नियमों में संशोधन करने की अनुमति नहीं देने के 18 जनवरी के परिपत्र को रद्द कर दिया। श्रमिकों को उच्च पेंशन की अनुमति सर्वोच्च न्यायालय के नवंबर 2022 के आदेश के अनुरूप दी गई थी।

आदेश में कहा गया, ‘ उत्तरदाता (ईपीएफओ) का 18 जनवरी को जारी परिपत्र सर्वोच्च न्यायालय के सुनील कुमार मामले में जारी आदेश का उल्लंघन नहीं हो सकता है। इसे रद्द किया जाए।’ सर्वोच्च न्यायालय ने नवंबर, 2022 के आदेश में यदि मासिक वेतन की सीमा 15,000 रुपये से अधिक हो तो 1 सितंबर, 2014 से कार्यरत पात्र कर्मचारियों को उनके वास्तविक वेतन का 8.33 प्रतिशत योगदान करके उच्च वेतन पर पेंशन का विकल्प चुनने की अनुमति
दी थी।

सेल-बीएसपी पेंशनर्स एसोसिएशन के सचिव बी. एन. अग्रवाल के मुताबिक ऐसा लगता है कि ईपीएफओ ने कर्मचारियों और नियोक्ताओं के संयुक्त विकल्पों को नामंजूर कर दिया है। इसने मुख्यतौर पर ‘गैरवाजिब बहाने’ जैसे छूट प्राप्त ज्यादातर संस्थानों के ट्रस्ट के नियमों पर सीमाएं आदि दिए गए थे।

अभी छूट प्राप्त संस्थानों में ज्यादातर संयुक्त विकल्प के तहत ट्रस्ट नियमों में इस तरह की वेतन सीमा अंतर्निहित नहीं थी, उन पर पीएफ कार्यालय ने विचार किया है। अब उच्च न्यायालय के आदेश के तहत 31 जनवरी या उससे पहले ईपीएफओ में उच्च पेंशन का आवेदन स्वीकार हो चुके आवेदनों पर संयुक्त विकल्प की अनुमति दी गई है।

Advertisement
First Published - September 11, 2025 | 9:17 AM IST

संबंधित पोस्ट

Advertisement
Advertisement
Advertisement