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ऊंची ब्याज दरों के बावजूद चमका सोना, बदल रही है निवेशकों की सोच

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ऊंची ब्याज दरों, बढ़ते वैश्विक कर्ज और केंद्रीय बैंकों की लगातार खरीद के बीच सोना बना लंबी अवधि का रणनीतिक निवेश, 5,000 डॉलर के ऊपर भी मजबूती के संकेत

Last Updated- February 25, 2026 | 10:52 AM IST
Gold Price Outlook

Gold Price Outlook: पहले सोना तब खरीदा जाता था जब कोई बड़ा संकट आता था। लेकिन अब हालात बदल गए हैं। मोतीलाल ओसवाल फाइनेंशियल सर्विसेज की 24 फरवरी 2026 की रिपोर्ट के अनुसार, सोना अब एक नए दौर में प्रवेश कर चुका है। इसे ‘स्ट्रक्चरल रीप्राइसिंग’ कहा गया है, यानी सोने की कीमत अभी थोड़े समय के लिए नहीं बढ़ी है, बल्कि यह बढ़त लंबे समय तक रह सकती है। सोने की कीमत 5,000 डॉलर प्रति औंस से ऊपर पहुंच चुकी है। अब सोना सिर्फ मुश्किल समय में काम आने वाली चीज नहीं रहा, बल्कि दुनिया की आर्थिक व्यवस्था का एक महत्वपूर्ण हिस्सा बनता जा रहा है।

ऊंची ब्याज दरें भी नहीं रोक पाईं तेजी

आमतौर पर जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तो सोने की कीमत गिरती है, क्योंकि सोना ब्याज नहीं देता। लेकिन 2023 से 2025 के बीच उल्टा हुआ। ब्याज दरें ऊंची रहीं, फिर भी सोने की कीमत बढ़ती रही। रिपोर्ट के मुताबिक, यह बड़ा संकेत है कि निवेशकों की सोच बदल रही है। अब लोग केवल छोटी अवधि के रिटर्न नहीं देख रहे, बल्कि दुनिया भर के बढ़ते कर्ज और सरकारों पर बढ़ते दबाव को देख रहे हैं। सरकारी बॉन्ड जैसे पारंपरिक सुरक्षित निवेश पर भरोसा कमजोर हुआ है। ऐसे में सोना एक ऐसा साधन बन गया है, जिसे कोई सरकार छाप नहीं सकती और जिसकी कीमत घटा नहीं सकती।

भू-राजनीतिक तनाव से बढ़ी मांग

पूर्वी यूरोप, पश्चिम एशिया, आर्कटिक और एशिया के कुछ हिस्सों में बढ़ते तनाव ने दुनिया में अनिश्चितता बढ़ा दी है। इसके साथ व्यापार तनाव और टैरिफ से महंगाई और मुद्रा में उतार-चढ़ाव बढ़ा है। ऐसे हालात में सोने की मांग बढ़ना स्वाभाविक है, क्योंकि इसे सुरक्षित और न्यूट्रल निवेश माना जाता है।

यह भी पढ़ें | Gold-Silver Price Today: MCX पर सोना 1.60 लाख के पार, चांदी में भी तूफानी तेजी; गहने खरीदने से पहले चेक करें आज के रेट

केंद्रीय बैंकों पर दबाव और भरोसे में कमी

रिपोर्ट के मुताबिक, सरकारों पर कर्ज बढ़ रहा है और आर्थिक दबाव भी बढ़ रहा है। ऐसे में केंद्रीय बैंकों के लिए लंबे समय तक ब्याज दरें ज्यादा ऊंची रखना आसान नहीं है। जब लोगों का भरोसा पारंपरिक सुरक्षित निवेश पर कम होने लगता है, तो वे सोने की तरफ रुख करते हैं। अब सोना सिर्फ थोड़े समय की सुरक्षा नहीं, बल्कि लंबे समय के लिए संभालकर रखने वाली मजबूत संपत्ति बनता जा रहा है।

सप्लाई सीमित, इसलिए कीमत मजबूत

दुनिया में सोने का उत्पादन ज्यादा नहीं बढ़ रहा है। नई खदानें शुरू होने में कई साल लगते हैं और लागत भी बढ़ गई है। एक्सचेंजों पर उपलब्ध सोने का स्टॉक भी घटा है। मतलब मांग बढ़ रही है, लेकिन तुरंत उपलब्ध सोना कम है। इससे कीमतों को मजबूती मिल रही है।

भारत में सोने की अलग कहानी

भारत में सोने की मांग दो बड़े कारणों से बढ़ी है:

1. रुपये में कमजोरी:

रुपये में उतार-चढ़ाव के बीच सोना घरों के लिए सुरक्षित बचत का जरिया बना हुआ है।

2. गोल्ड ईटीएफ में तेजी:

कुछ सालों की सुस्ती के बाद गोल्ड ईटीएफ में फिर से निवेश बढ़ा है। अब लोग सिर्फ गहनों के रूप में नहीं, बल्कि डिजिटल और पेपर गोल्ड के जरिए भी निवेश कर रहे हैं।

केंद्रीय बैंक लगातार खरीद रहे हैं सोना

पिछले चार साल से दुनिया भर के केंद्रीय बैंक हर साल करीब 1,000 टन सोना खरीद रहे हैं। यह केवल अस्थायी खरीद नहीं, बल्कि रिजर्व को सुरक्षित बनाने की रणनीति है। कई देश डॉलर पर निर्भरता कम करना चाहते हैं।

आगे क्या उम्मीद?

मोतीलाल ओसवाल का मानना है कि आने वाले समय में भी सोना मजबूत बना रहेगा। रिजर्व में विविधता, सीमित सप्लाई और वैश्विक अनिश्चितता सोने को सहारा देगी।

रिपोर्ट के अनुसार, 5,000 डॉलर प्रति औंस के आसपास और उससे ऊपर कीमत बनी रह सकती है। 4,000 और 4,200 डॉलर के स्तर को मजबूत आधार माना गया है। अगर डॉलर-रुपया दर 91 मानें, तो यह घरेलू बाजार में करीब 1,23,000 से 1,30,000 रुपये के बराबर होता है। रिपोर्ट में यह भी कहा गया है कि सोने में उतार-चढ़ाव 20 से 25 प्रतिशत तक रह सकता है। इसलिए एक साथ बड़ी रकम लगाने के बजाय किस्तों में निवेश करना समझदारी होगी।

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First Published - February 25, 2026 | 10:36 AM IST

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