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ऑक्सीजन की कमी से इस्पात उत्पादन पर पड़ रहा असर

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Last Updated- December 12, 2022 | 4:12 AM IST

सरकार द्वारा उद्योग या गैर-चिकित्सकीय उद्देश्य के लिए लिक्विड ऑक्सीजन इस्तेमाल को प्रतिबंधित किए जाने से घरेलू सेकंडरी इस्पात क्षेत्र प्रभावित हुआ है। इस्पात क्षेत्र का कुल घरेलू सालाना उत्पादन में करीब 50 प्रतिशत का योगदान है।
एकीकृत कंपनियों को चालू वित्त वर्ष में कुल इस्पात उत्पादन 8-10 प्रतिशत घटने की आशंका है।
कल्याणी स्टील्स लिमिटेड के प्रबंध निदेशक आर के गोयल ने बिजनेस स्टैंडर्ड को बताया, हमने ऑक्सीजन की गैर-उपलब्धता की वजह से अपना संयंत्र बंद कर दिया है और हमें उत्पादन में हर महीने 20,000 टन इस्पात का नुकसान हो रहा है। हम नहीं जानते कि हम कब अपनी इकाई पुन: चालू कर पाएंगे, क्योंकि ऑक्सीजन को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है।’ बीएसई पर सूचीबद्घ यह कंपनी विशेष इस्पात के व्यवसाय से जुड़ी हुई है और उसकी निर्माण इकाई कर्नाटक के हॉस्पेट में है।
महिंद्रा सैन्यो स्पेशल स्टील के अधिकारी ने नाम नहीं बताने के अनुरोध के साथ कहा, ऑक्सीजन के अभाव की वजह से पिछले 18-19 दिन में इस्पात उत्पादन नहीं हुआ है। अब तक हम अपने पास मौजूद घरेलू आपूर्ति इन्वेंट्री से काम चला रहे थे। अब संयंत्र पूरी तरह से बंद हो गया है।’ कंपनी रायगढ़ के खोपोली (महाराष्ट्र) में 200,00 टन क्षमता का इस्पात संयंत्र चलाती है।
आरपी स्टील और अरोड़ा स्टील भी ऐसी अन्य सेकंडरी स्पेशियलिटी इस्पात कंपनियों में शुमार हैं जो ऑक्सीजन की गैर उपलब्धता से प्रभावित हुई हैं।
जॉइंट प्लांट कमेटी के आंकड़े के अनुसार, भारत का घरेलू इस्पात उत्पादन वित्त वर्ष 2021 के पहले 11 महीनों में 8.56 करोड़ टन पर था, जो पिछले साल की समान अवधि के मुकबले 10.3 प्रतिशत कम है। खपत भी 9.9 प्रतिशत तक घटकर 8.469 करोड़ टन रह गई थी।
टाटा स्टील, नवीन जिंदल के नेतृत्व वाली जिंदल स्टील ऐंड पावर, सज्जन जिंदल के नेतृत्व वाली जेएसडब्ल्यू स्टील, सरकार के स्वामित्व वाली सेल, और एएम/एनएस इंडिया उन एकीकृत प्राथमिक इस्पात उत्पादकों में शामिल हैं जो अपनी निजी ऑक्सीजन चिकित्सकीय इस्तेमाल के लिए पहले ही स्थानांतरित कर चुकी हैं। इससे चालू वित्त वर्ष में उनका उत्पादन 8-10 प्रतिशत तक प्रभावित होने की आशंका है।
उद्योग के अधिकारियों का मानना है कि ऑक्सीजन प्रतिबंधित होने से सभी सेकंडरी उत्पादक प्रभावित नहीं हुए हैं। इंस्टीट्यूट ऑफ स्टील डेवलपमेंट ऐंड ग्रोथ के महासचिव पी के सेन के अनुसार, सेकंडरी उत्पादक इस्पात बनाने के लिए इंडक्शन आर्क फर्नेस यानी भ_ियों का इस्तेमाल करते हैं, जिसमें ऑक्सीजन की जरूरत नहीं होती है, क्योंकि ये भ_ियां स्पेशियलिटी स्टील का उत्पादन नहीं करती हैं। उन्होंने कहा, ये सिर्फ टीएमटी बार्स जैसी निर्माण सामग्री का उत्पादन करती हैं। यही वजह है कि ये कंपनियां प्रभावित होने से बची रहेंगी।’
सेकेंडरी इस्पात क्षेत्र असंगठित और अव्यवसिथत है, इसलिए इनकी इलेक्ट्रिक आर्क फर्नेस (ईएएसी) और इंडक्शन आर्क फर्नेस का अनुपात उपलब्ध नहीं है। घरेलू इस्पात उत्पादन पर प्रभाव के बावजूद आपूर्ति को लेकर स्थिति बाजार में कमजोर मांग की वजह से ज्यादा प्रभावित होती नहीं दिख रही है।

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First Published - May 30, 2021 | 8:43 PM IST

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