भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) द्वारा जारी नवीनतम आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2024-25 में सार्वजनिक क्षेत्र के बैंकों के कर्मचारियों की संख्या में 5 वर्षों में पहली बार वृद्धि हुई, जबकि इस दौरान निजी क्षेत्र के बैंकों में कर्मचारियों की संख्या में गिरावट आई है।
सरकारी बैंकों में कर्मचारियों की संख्या 31 मार्च 2025 के सालाना आधार पर 0.22 प्रतिशत बढ़कर 7,57,641 हो गई, जबकि एक साल पहले कर्मचारियों की संख्या 7,56,015 थी। वहीं इस दौरान निजी बैंकों के कर्मचारियों की संख्या 0.86 प्रतिशत घटकर 8,38,150 रह गई, जो एक साल पहले 8,45,407 थी। सरकारी बैंकों ने इसके पहले बैलेंस शीट में सुधार के साथ समेकन पर ध्यान दिया था। अब बेहतरीन बैलेंस शीट होने और नियामक माहौल बेहतर होने के कारण उन्होंने भर्तियां शुरू कर दी है। वहीं निजी बैंक कर्मचारी बढ़ाने के बजाय तकनीक और डिजिटल पहल पर ध्यान दे रहे हैं।
ग्रांट थॉर्नटन भारत के पार्टनर और फाइनैंशियल सर्विस रिस्क लीडर विवेक अय्यर ने कहा, ‘सरकारी बैंकों ने समेकन, नियामकीय सुधार, सेवानिवृत्तियों और कुशलता अभियानों के कारण भर्तियां रोक दी थी।’ उन्होंने कहा कि बैलैंस शीट में सुधार, नियामकीय सरलता की संभावनाओं और घरेलू वृद्धि को देखते हुए अब वे धीरे धीरे भर्तियां फिर शुरू कर रहे हैं। खासकर प्रबंधन के स्तर पर कर्मचारियों के नौकरियां छोड़ने के कारण कर्मचारियों की कमी की भरपाई के लिए भर्तियां कर रहे हैं।