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बेहतर नतीजे के लिए सिप को दीर्घावधि निवेश के साथ जोड़ें

Last Updated- December 12, 2022 | 5:16 AM IST

सिस्टमैटिक इन्वेस्टमेंट प्लान (एसआईपी या सिप) की बढ़ती लोकप्रियता के चलते आजकल ज्यादातर निवेशक इक्विटी म्युचुअल फंड में निवेश करते समय यह विकल्प अपनाते हैं। हालांकि सिप योजना अब भी डेट फंड में आम नहीं हो पाई है जहां यह काफी फायदेमंद हो सकती है। कॉरपोरेट प्रशिक्षक (डेट बाजार) और लेखक जयदीप सेन कहते हैं, ‘हम अक्सर इक्विटी के संदर्भ में सिप के बारे में सोचते हैं क्योंकि शेयर बाजार ज्यादा अस्थिर है और रुपये की औसत लागत की अवधारणा यहां ज्यादा प्रासंगिक है जिसका मतलब यह है कि अगर आप किसी फंड में निश्चित अवधि में निवेश करते हैं तब आप विभिन्न कीमतों पर ज्यादा यूनिट खरीद सकते हैं लेकिन सिप डेट फंड के लिहाज से भी एक अच्छा विचार है।’
निवेश के लिए तैयारी
हर महीने तनख्वाह पाने वाले लोगों के लिए डेट फंड में सिप के जरिये अपना डेट फंड आवंटन तेजी से तैयार करने में मदद मिल सकती है। सेन कहते हैं, ‘वेतन पाने वाले लोग एक निश्चित रकम सिप में लगा सकते हैं क्योंकि ऐसे में यह पैसा कहीं और खर्च हो सकता है। बड़े वित्तीय लक्ष्य हासिल करने के लिए धीरे-धीरे अपने कोष का निर्माण करने का यह एक अच्छा तरीका है। आप जितना निवेश करना चाहते हैं, मुमकिन है कि वह एक बार में उपलब्ध नहीं हो लेकिन सिप के माध्यम से समय के साथ तैयार किया जा सकता है।’
ब्याज दर अस्थिरता
सिर्फ  इक्विटी फंड ही नहीं बल्कि डेट फंडों में भी अस्थिरता आ सकती है। जब ब्याज दरें बढ़ती हैं तब बॉन्ड की कीमतें खासतौर पर लंबी अवधि के बॉन्ड में गिरावट आती है। इससे बॉन्ड फंड के शुद्ध परिसंपत्ति मूल्य (एनएवी) पर उलटा असर पड़ता है। उदाहरण के तौर पर वैल्यू रिसर्च के आंकड़ों के अनुसार, फरवरी 2021 में कॉरपोरेट बॉन्ड फंड को औसतन 0.56 फीसदी का नुकसान हुआ। डेट फंड में सिप के जरिये निवेशक इस तरह के उतार-चढ़ाव से बेहतर तरीके से निपट सकते हैं। वेल्थ लैडर डाइरेक्ट के संस्थापक एस श्रीधरन कहते हैं,’ फि लहाल हम ब्याज दर चक्र के सबसे निचले स्तर पर नजर आते हैं। एक एसआईपी एनएवी के ऊपरी और निचले दोनों पक्ष संभालने की क्षमता रखती है, इसी वजह से लंबी अवधि में इनकी खरीद लागत के मुकाबले संतुलित नतीजे देती है। ऐसे में निवेशक डेट फंड सिप में निवेश शुरू कर सकते हैं, भले ही उसका ब्याज दर चक्र जो भी हो।’ सिप में निवेश से बाजार के उतार-चढ़ाव को देखते हुए अलग से कोई रणनीति बनाने की जरूरत खत्म हो जाती है। सेन कहते हैं, ‘डेट फंड निवेशक अगर सिप में निवेश कर रहे हैं वे उस वक्त भी कम एनएवी से फायदा उठाने में सक्षम होंगे जब दरें बढ़ रही हैं।’
क्रेडिट प्रतिफल से लाभ
जिन बॉन्ड में विभिन्न स्तर के क्रेडिट जोखिम होते हैं उनका अलग-अलग प्रतिफल भी होता है। विभिन्न बॉन्ड मसलन एएए बॉन्ड और एए बॉन्ड के बीच प्रतिफल के अंतर में भी बदलाव आता रहता है। कभी-कभी, प्रतिफल 200 आधार अंक हो सकता है और कभी-कभी (जब डिफॉल्ट का डर अधिक होता है) यह 400 आधार अंक तक बढ़ सकता है। इस तरह के उतार-चढ़ाव से भी बॉन्ड की कीमतें प्रभावित होती हैं। सिप के जरिये धीरे-धीरे निवेश का दायरा बढ़ाने से निवेशक को इस तरह के उतार-चढ़ाव का फायदा मिल सकता है।
सिप में दीर्घकालिक निवेश
जब आप लंबी अवधि के लिए निवेश कर रहे हैं यानी अपनी सेवानिवृत्ति के लिए या बच्चों की पढ़ाई के नजरिये से निवेश करना चाहते हैं तब आप केवल इक्विटी पोर्टफोलियो के भरोसे अपने भविष्य की योजना नहीं बना सकते हैं क्योंकि यह काफी अस्थिर होगा। ऐसे में आपका निवेश, डेट फंड में भी होना चाहिए। यह निवेशक की जोखिम लेने की क्षमता के आधार पर 20-50 प्रतिशत के दायरे में हो सकती है।    

First Published - May 2, 2021 | 11:08 PM IST

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