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PFC और REC के विलय को मिली मंजूरी, देश को मिलेगा ₹11 लाख करोड़ का सबसे बड़ा इंफ्रा फाइनेंसर

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पीएफसी और आरईसी के विलय से देश की सबसे बड़ी इंफ्रा फंडिंग कंपनी बनेगी। इससे बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया आसान होगी और बाजार में फिजूलखर्ची घटेगी

Last Updated- June 29, 2026 | 10:13 PM IST
pfc rec merger
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

सरकारी स्वामित्व वाली पावर फाइनैंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) और आरईसी लिमिटेड के विलय से एकीकृत ट्रेजरी ऑपरेशन के माध्यम से बॉन्ड जारी करने की प्रक्रिया सुव्यवस्थित होने की उम्मीद है। बाजार सहभागियों ने कहा कि इसके कारण फंड जुटाने में ओवरलैपिंग कम होने और और बड़े बेंचमार्क आकार के इश्यू जारी होने की संभावना है।

सोमवार को पीएफसी और आरईसी के निदेशक मंडल ने विलय योजना को मंजूरी दी। इसके तहत आरईसी के शेयरधारकों को आरईसी के प्रत्येक 100 इक्विटी शेयरों के बदले पीएफसी के 88 इक्विटी शेयर प्राप्त होंगे।

हालांकि जारी होने वाले कुल बॉन्डों में मामूली कमी आ सकती है, लेकिन विलय के बाद बनी इकाई की धन की कुल जरूरत में कोई बदलाव होने की संभावना नहीं है, क्योंकि यह बिजली और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में बड़े निवेशों के लिए धन मुहैया करना जारी रखेगा।

रॉकफोर्ट फिन्कैप एलएलपी के संस्थापक और मैनेजिंग पार्टनर वेंकटकृष्णन श्रीनिवासन ने कहा, ‘विलय हुई इकाई को एक एकल ट्रेजरी ऑपरेशन से लाभ होने की उम्मीद है। इससे बॉन्ड जारी करने की बेहतर योजना और धन की दक्षता में सुधार होगा। हालांकि ओवरलैपिंग उधारी समाप्त होने से सकल बॉन्ड जारी करने में कमी आ सकती है, लेकिन धन की कुल जरूरत में उल्लेखनीय रूप से कमी आने की संभावना नहीं है।’ 

इस विलय के बाद बड़ा संस्थान भारत के बुनियादी ढांचा क्षेत्र को धन मुहैया कराने वाला सबसे बड़ा संस्थान होगा, जिसका लोनबुक 11 लाख करोड़ रुपये से ऊपर होगा। हालांकि, हाउसिंग डेवलपमेंट फाइनेंस कॉर्पोरेशन के एचडीएफसी बैंक के साथ विलय के विपरीत इस लेनदेन से कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार की गणित में कोई महत्त्वपूर्ण बदलाव होने की उम्मीद नहीं है। पीएफसी और आरईसी दोनों सरकारी स्वामित्व वाली गैर-बैंकिंग वित्तीय कंपनियां हैं जो ऋण देने के लिए बॉन्ड और अन्य थोक उधार पर निर्भर हैं। इसलिए विलय के बाद बनी इकाई बिजली और बुनियादी ढांचा क्षेत्रों में निवेश को धन मुहैया कराने के लिए कॉर्पोरेट बॉन्ड बाजार तक पहुंचना जारी रखेगी।

एक बाजार प्रतिभागी ने कहा, ‘एचडीएफसी और एचडीएफसी बैंक विलय ने स्थायी रूप से बॉन्ड आपूर्ति को कम कर दिया, क्योंकि फंडिंग जमा में स्थानांतरित हो गई। पीएफसी और आरईसी के मामले में विलय के बाद बनी इकाई की बॉन्ड बाजार पर निर्भरता जारी रहेगी। इसलिए यह आपूर्ति कम होने के बजाय दक्षता में सुधार का मसला अधिक है।’

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First Published - June 29, 2026 | 10:13 PM IST

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