भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बुधवार को कहा कि भारत के वैश्विक बॉन्ड सूचकांकों में शामिल होने के लिए आवश्यक अधिकांश कदम पहले ही उठाए जा चुके हैं। निवेश को आसान बनाने के मकसद से निवेशकों के अनुकूल कुछ कदम या तो लागू किए जा रहे हैं या आने वाले हफ्तों में क्रियान्वित कर दिए जाएंगे।
मल्होत्रा ने ईटी नाऊ के साथ एक साक्षात्कार में कहा, ‘जो कुछ भी किया जाना था वह पहले ही किया जा चुका है। निवेश सुगम बनाने के कुछ उपाय विचाराधीन हैं और उनमें से अधिकांश या तो पूरे हो चुके हैं या कुछ दिनों से लेकर कुछ हफ्तों में पूरे हो जाएंगे।’
2024 में जेपी मॉर्गन के उभरते बाजार ऋण सूचकांक में घरेलू सॉवरिन बॉन्डों को शामिल किए जाने के बाद भारत ब्लूमबर्ग के एग्रीगेट बॉन्ड इंडेक्स में शामिल होने की उम्मीद कर रहा है। भारत की बाहरी स्थिति पर मल्होत्रा ने कहा कि अर्थव्यवस्था 2013 की खलबली की तुलना में बहुत मजबूत स्थिति में है। पिछले वित्त वर्ष में चालू खाते का घाटा लगभग 0.6 प्रतिशत था, जबकि 2013 में यह लगभग 5 प्रतिशत था, जबकि विदेशी मुद्रा भंडार 10 महीने से अधिक का आयात करने के लिए पर्याप्त है।
उन्होंने कहा कि विदेशी मुद्रा भंडार बाहरी ऋण के लगभग 89 प्रतिशत के बराबर है। साथ ही भारत का विदेशी मुद्रा भंडार अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष के रिजर्व एडेक्वेसी मीट्रिक से अधिक है। उन्होंने कहा चालू खाता और पूंजी खाता दोनों ही लचीले बने हुए हैं।
मल्होत्रा ने दोहराया कि रुपये की स्थिति बाजार द्वारा निर्धारित बनी हुई है और रिजर्व बैंक केवल अत्यधिक अस्थिरता को रोकने और व्यवस्थित बाजार की स्थिति सुनिश्चित करने के लिए हस्तक्षेप करता है। घरेलू वृद्धि को लेकर गवर्नर ने कहा कि वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद निवेश की गतिविधियां बेहतर बनी हुई है। उन्होंने रक्षा, नवीकरणीय ऊर्जा, आतिथ्य और जहाज निर्माण क्षेत्रों में निवेश का हवाला दिया। उन्होंने कहा कि क्षमता उपयोग उच्च स्तर पर है और फाइनैंसिंग की स्थितियां समर्थन प्रदान कर रही हैं। ऋण, इक्विटी पूंजी और आंतरिक नकदी उपलब्ध है।
घरेलू बचत के शेयर बाजारों में जाने की चिंता पर मल्होत्रा ने कहा कि यह प्रवृत्ति स्वस्थ विविधीकरण को दर्शाती है। उन्होंने कहा कि जमा वृद्धि सुधरकर लगभग 12 प्रतिशत हो गई है और ऋण वृद्धि बाधित नहीं है। मल्होत्रा ने कहा, ‘ऋण की वजह से जमा आता है।’ उन्होंने कहा कि ऋण देने की क्षमता पूंजी और नकदी की वजह से बाधित थी, न कि जमा में कुल वृद्धि का असर था।