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8th Pay Commission: फिटमेंट फैक्टर 2, 2.5 और 3 होने पर कितनी बढ़ेगी लेवल 1 से 7 तक के कर्मचारियों की सैलरी और HRA?

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8वें वेतन आयोग के तहत फिटमेंट फैक्टर बढ़ने से केंद्रीय कर्मचारियों की बेसिक सैलरी और HRA में बंपर उछाल आने की उम्मीद है, जिससे उनका कुल वेतन काफी बढ़ जाएगा

Last Updated- June 29, 2026 | 7:36 PM IST
8th Pay Commission
प्रतीकात्मक तस्वीर | फाइल फोटो

8वें वेतन आयोग को लेकर केंद्रीय कर्मचारियों और पेंशनभोगियों के बीच हलचल काफी तेज हो गई है। देश के करीब 55 लाख सेवारत सरकारी कर्मचारियों और लगभग 69 लाख पेंशनर्स की नजरें इस समय एक सबसे जरूरी पहलू पर टिकी हैं, जिसे फिटमेंट फैक्टर कहा जाता है। यही वह गुणांक है जो यह तय करता है कि नए वेतन आयोग के लागू होने पर कर्मचारियों की बेसिक सैलरी (मूल वेतन) और पेंशन में कितना बदलाव होगा।

कर्मचारी यूनियनों की तरफ से इस बार फिटमेंट फैक्टर को 2 से लेकर 5 तक रखने की मांग की जा रही है, जिस पर वेतन आयोग के अधिकारियों के साथ विचार-विमर्श का दौर जारी है। चूंकि कर्मचारियों को मिलने वाला मकान किराया भत्ता (HRA) और अन्य सभी भत्ते सीधे तौर पर बेसिक सैलरी से लिंक होते हैं, इसलिए फिटमेंट फैक्टर में होने वाली बढ़ोतरी का सीधा असर कर्मचारियों की कुल इन-हैंड सैलरी पर पड़ेगा।

अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर पर कैसे बदलेगी बेसिक सैलरी?

वेतन आयोग द्वारा अलग-अलग पे-लेवल के लिए फिटमेंट फैक्टर की सिफारिश की जाती है। समझने के लिए हम यहां पांच अलग-अलग पे-लेवल (पे-मैट्रिक्स के स्तर) और उनकी मौजूदा बेसिक सैलरी का उदाहरण ले रहे हैं। इसके जरिए आसानी से समझा जा सकता है कि अगर सरकार 2x, 2.5x या 3x का गुणांक तय करती है, तो बेसिक सैलरी का गणित किस तरह बदल जाएगा:

अलग-अलग फिटमेंट फैक्टर के आधार पर बेसिक सैलरी (अनुमानित)

पे-लेवल और पद  मौजूदा बेसिक सैलरी (₹) 2x फिटमेंट फैक्टर पर बेसिक सैलरी (₹) 2.5x फिटमेंट फैक्टर पर बेसिक सैलरी (₹) 3x फिटमेंट फैक्टर पर बेसिक सैलरी (₹)
लेवल 1 (शुरुआती पद/MTS) 18,000 36,000 45,000 54,000
लेवल 2 (लोअर डिवीजन क्लर्क) 19,900 39,800 49,750 59,700
लेवल 4 (अपर डिवीजन क्लर्क) 25,500 51,000 63,750 76,500
लेवल 6 (असिस्टेंट सेक्शन ऑफिसर) 35,400 70,800 88,500 1,06,200
लेवल 7 (सेक्शन ऑफिसर / इंस्पेक्टर) 44,900 89,800 1,12,250 1,34,700
नोट: ऊपर दिए गए आंकड़े पूरी तरह से कैलकुलेशन और उदाहरण के तौर पर हैं। वेतन में वास्तविक बढ़ोतरी इस बात पर निर्भर करेगी कि 8वां वेतन आयोग फाइनल रिपोर्ट में क्या सिफारिश करता है और सरकार उस पर क्या मंजूरी देती है।

बेसिक पे बढ़ने से कैसे रॉकेट की तरह भागेगा HRA?

केंद्रीय कर्मचारियों का हाउस रेंट अलाउंस (HRA) सीधे तौर पर उनकी बेसिक सैलरी के प्रतिशत के रूप में निकाला जाता है। वर्तमान व्यवस्था (7वें वेतन आयोग) के तहत शहरों को उनकी आबादी और श्रेणी के हिसाब से तीन क्लास X, Y और Z में बांटा गया है। मौजूदा नियमों के अनुसार, X क्लास वाले महानगरों में 30%, Y क्लास के मध्यम शहरों में 20% और Z क्लास के छोटे या ग्रामीण इलाकों में 10% HRA मिलता है।

अगर हम एक न्यूनतम अनुमान मानकर चलें कि सरकार 2x फिटमेंट फैक्टर को ही मंजूरी देती है, तो ऊपर बताए गए पांचों पे-लेवल के कर्मचारियों की नई संशोधित बेसिक पे पर HRA का गणित कितना बदल जाएगा, इसे नीचे दी गई टेबल से समझा जा सकता है:

2x फिटमेंट फैक्टर पर संशोधित HRA का गणित (30%, 20% और 10% की दर से)

मौजूदा बेसिक सैलरी (₹) 2x पर नई बेसिक सैलरी (₹) X शहर (30% HRA) (₹) Y शहर (20% HRA) (₹) Z शहर (10% HRA) (₹)
18,000 (लेवल 1) 36,000 10,800 7,200 3,600
19,900 (लेवल 2) 39,800 11,940 7,960 3,980
25,500 (लेवल 4) 51,000 15,300 10,200 5,100
35,400 (लेवल 6) 70,800 21,240 14,160 7,080
44,900 (लेवल 7) 89,800 26,940 17,960 8,980

हालांकि, फिटमेंट फैक्टर को कभी भी सीधे तौर पर भत्तों या HRA पर गुणा नहीं किया जाता है, लेकिन यह सैलरी के उस मुख्य आधार (बेसिक पे) को इतना बड़ा कर देता है कि उस पर कैलकुलेट होने वाले भत्ते अपने आप भारी-भरकम हो जाते हैं। 8वें वेतन आयोग के लागू होने के बाद अंतिम HRA स्लैब में सरकार कोई नया बदलाव करती है या इसे इसी प्रतिशत पर रखती है, यह आने वाले समय में कैबिनेट की अंतिम मुहर के बाद ही साफ होगा।

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First Published - June 29, 2026 | 7:32 PM IST

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