निजी क्षेत्र के सबसे बड़े ऋणदाता एचडीएफसी बैंक को भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) की घोषणा के बाद सबसे पहले कदम उठाने का फायदा मिला। आरबीआई द्वारा विशेष स्वैप विंडो सुविधा की घोषणा के बाद विदेशी बॉन्ड बाजार में जाने वाला यह पहला बैंक था और पिछले हफ्ते एचडीएफसी बैंक ने कम दर पर 75 करोड़ डॉलर जुटाए थे। कई अन्य बैंक भी ऐसा ही करने की योजना बना रहे थे।
भारतीय ऋणदाताओं की पूंजी जुटाने की बढ़ती गतिविधियों की भनक लगते ही निवेशक भी रिटर्न में बदलाव की उम्मीद करने लगे। उन्हें एहसास था कि आरबीआई द्वारा स्वैप लागत पर सब्सिडी दिए जाने से बैंकों के लिए कोष की लागत घटेगी। नतीजतन भारत के ऋणदाता द्वारा हाल में जारी किए गए डॉलर बॉन्ड पर स्प्रेड लगातार बढ़ रहा है। एचडीएफसी बैंक ने 5 साल के बॉन्ड के जरिये 75 करोड़ डॉलर जुटाए जिसकी प्रभावी ब्याज दर संबंधित अवधि में अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड से 90 आधार अंक ज्यादा थी।
हालांकि पावर फाइनैंस कॉरपोरेशन (पीएफसी) ने 5 साल के बॉन्ड निर्गम के जरिये 30 करोड़ डॉलर जुटाए मगर इसकी ब्याज दर संबंधित अमेरिकी ट्रेजरी की यील्ड से 105 आधार अंक ज्यादा रही। इसी तरह ऐक्सिस बैंक ने अमेरिकी ट्रेजरी यील्ड से 110 आधार अंक ज्यादा ब्याज दर पर पूंजी जुटाई।
इन सौदों की जानकारी रखने वाले एक सूत्र ने बताया कि ऐक्सिस बैंक 50 करोड़ डॉलर से 1 अरब डॉलर के बीच पूंजी जुटाना चाहता था लेकिन ज्यादा ब्याज दर के कारण उसे निर्गम का आकार कम करना पड़ा।
एचडीएफसी बैंक के बॉन्ड पर प्रभावी ब्याज या कूपन दर 5.067 फीसदी रही, जो डॉलर बॉन्ड निर्गम पर उसका अब तक का सबसे कम स्प्रेड है। पीएफसी के निर्गम की ब्याज दर 5.32 फीसदी और ऐक्सिस बैंक की 5.35 फीसदी थी।
घटनाक्रम के जानकार एक सूत्र ने कहा, ‘मुझे लगता है कि एचडीएफसी बैंक को पहले बॉन्ड बाजार में जाने का फायदा मिला। उसके बाद पीएफसी और ऐक्सिस बैंक ने भी पूंजी जुटाई मगर इन्हें उतनी अच्छी प्रतिक्रिया नहीं मिली। इसकी वजह यह थी कि निवेशक शायद भारत से आने वाली आपूर्ति का अनुमान जरूरत से ज्यादा लगा रहे हैं। लोगों को लगता है कि विदेशी बाजार में निर्गम की बाढ़ आ जाएगी जबकि असलियत में भारत के बैंक बॉन्ड बाजार से पूंजी जुटाने के मामले में बहुत समझदारी से काम लेंगे।’
निवेशकों की अतिरिक्त ब्याज दर की मांग बैंकों की उम्मीदों के मुताबिक नहीं थी। सूत्रों का कहना है कि भारतीय बैंक कीमत के और आकर्षक होने तक इंतजार करना पसंद कर सकते हैं।
सूत्र ने कहा, ‘डॉलर बॉन्ड जारी करने के लिए काफी तैयारी की जरूरत होती है और इसके लिए समय कम होता है। इसलिए वही बैंक बाजार में आ सकते हैं जिन्होंने पहले से ही तैयारी कर रखी हो। 2-3 बैंक तैयारी कर रहे हैं और कुछ अन्य बैंक भी बॉन्ड जारी कर सकते हैं लेकिन बॉन्ड की वैसी बाढ़ नहीं होगी जिसकी उम्मीद निवेशक कर रहे हैं।’
भारतीय स्टेट बैंक और बैंक ऑफ बड़ौदा जल्द बड़े निर्गम के साथ बॉन्ड बाजार में आ सकते हैं। ये प्रस्तावित निर्गम विदेशी पूंजी को आकर्षित करने और रुपये को सहारा देने के लिए आरबीआई के हालिया कदमों का हिस्सा हैं।